आखिर के ठगाता

शेखर के गांजा के इ पहिलका दम रहे। अवरू सब साथी गांजा के दम पचावे आ जोम से मुँह आ नाक से धुँआ निकाले में माहिर हो चुकल रहन। पहिलके दम शेखर तनि जोर से खींच लेले रहले। उनका से बर्दाश्त ना भइल। उनकर माथा चकराए लागल। बाकि उ अपना साथी लोग से कुछ ना कहले। उनका बुझाइल कि साथी लोग मजाक उड़ावे लागी। जब दुसरका राउन्ड में चीलम उनका पास पहुँचल त उ झूठो के दम खींचे के नाटक कइले। ओकरा बाद उ ओहीजे एगो बँसखट पर ओठंघि गइले।…

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रेंड़ी के तेल

मन के अँतरे कोने में दबल लालसा कइसन-कइसन गुल खिलावेला? एह बात के अहसास तेकरे होई जे एह मरज के मरीज रहल होखे। सिधारी मिसिर आ चनरधारी मिसिर एक पीठिए भाई रहल लोग। बाबूजी पुरोहिताई पेशा प जिनिगी के जाँगर खेप लिहनीं। इचि भ बिसुनचुटकी, अगऊँ भा सवा टका दछिना के बल प घर के गाड़ी लस्टम-पस्टम चल जरूर गइल बाकि एह बरकत में अतना गुंजाइश ना रहे जे चदरी से बहरी टांग पसारल जाय। मिसिर बंधु के पढ़ाई लिखाई ‘ओनामासी धम’ से शुरू भइल आ ‘रामऽ गति, देहू सुमति…

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चिरई बड़ा जुलुम तु कइलू….।

रोज का तरे ओहू दिन इसकूल में पहुँचि के दस बरिस के मुनिया आपन सहेली लोगन के खुशखबरी देवे के ना भुलाइलि । ओइसे तऽ मुनिया के इसकूली नाम प्रेरणा हऽ बकिर घर में आ हित-नात के बीच इनकरा के लोग मुनिएँ बोलेला । मुनिया भिर रोज कऊनों न कऊनो खुशखबरी रहेला । जइसे आज हमरे बालकनी में एगो खूब सुन्नर उज्जर रंग के कबूतर आइल रहे या काल्हि हमरा छत पे एगो लाल रंग के सुग्गा आइल रहे । बकिर आज के खुशखबरी कुछ खास रहे मुनिया हँस-हँस के…

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कुजाति

ई ओ बेरा के कहानी ह, जवना बेरा सामाजिक नियम तूरला पर तूरेवाला के जाति से निकाल दिहल जात रहे आ कुजाति कहल जात रहे। ओकरा साथे खाइल-पिअल, उठल-बइठल आ बातचीत तक ले समाज के लोग बन क देत रहे। कुजाति छँटइला के पीरा आ मानसिक कष्ट के अन्दाजा दोसर केहू ना लगा पावे, छँटाएवाला के छोड़ के। झींगुर अइसहीं कुजाति छँटा गइलें आ अइसन खातिर छँटइलें जवना में रत्तियो भर उनुके दोष ना रहे। झींगुर के चार बेटा पर एगो बेटी गुलबिया रहे। झींगुर दस बिगहा के जोतनिया रहलें।…

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जीत

जटायु, हँ इहे उनुकर नाँव रहे। मूर नाँव कुछ अउर होखी बाकी हेह सबद में ना जाने का कुछ रहे जे तेकरा के पनपे ना दिहलस, बरगद के गझिन जटाजाल का तरे अइसन झँपलस कि मूर नाँव राम तकरीबन अलोपिते भ गइलें। तेकर खोज अब कगदंत के तलास से कमतर ना होई। रामाएन के जटायु त बहुते बरियारा रहन जे रावन अस अगड़धत के बाँहि के चूर हिला दिहले रहलन। इनकर काया बिपरीत रहे, कद त ना बाकी काठी के काठिए बूझींजा। हँ, उनुकर गठान के कुछ बिसेखी के नजरअंदाज…

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मोबाइल

ए भाई! चलऽ घरे। माई के तबियत खराब बा।’- मोबाइल पर कुछ लिखत चमन से उनुके छोट भाई अमन कहलें। ‘त का हो गइल? तबियत त केहू के खराब होला। बाबूजी बड़लें बाड़ें, कहि दS दवाई ले आ देसु।- मोबाइल पर आँखि धसवले चमन कहलें। ‘आरे, तबियत जोर से खराब बा। बाबूजी रोवत रहलें हँ। तू जल्दी चलऽ।’- अमन कहलें। ‘अब जइबऽ कि कसि दीं, दू चटकन? तबियत खराब बा त डाकडर बोला ल सन। हम जा के का करबि?’- चमन तनिका सा मोबाइल पर से नजर हटाके अमन पर…

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“चिठ्ठी”

“Ravi sir, there is a letter for you” “रवि सर, तहरा खातिर चिठ्ठी बा” कहत चपरासी रवि के सेक्शन में दाखिल भईल। चिठ्ठी के नाम सुन जेतना अचरज रवि के भईल ओतने उनके सहकर्मी कुल के। आजु के जमाना में भी चिठ्ठी भेजे ला केहू। रवि के भी निमन से याद रहे कि बरसो से उनका के केहू चिठ्ठी नईखे भेजले। चपरासी के हाथ में चिठ्ठी के लम्बाई से देख के ही उ समझ गईले कि इ विदेशी चिठ्ठी ह अउरी हाथ में लेते ही ओयिपर मोट लिखावट से उनका…

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नन्हकी के माई

आज भोरही से मड़इया में  खुबे आवाजाही  लागल बा। नन्हकी के माई आज अकवार से बाहर निकल जात बिया। बड़की चाची  जब खिसियास त उ घरी तनी घुघटा के  सरका के कहस- ए अम्मा!  बहरिया कोई ना रहल ह। आ नन्हकी के कबे से कहतानी सुनते नईखे।त हाली हाली निपटारा करे खातिर …………. एतने में – ‘अच्छा ठीक बा। जा घरे ‘बड़की चाची के  ऐलान सुनते भीतर चल गईली। ए नन्हकी ! सुन ! साबुन से  बढिया से मुँह धोके पउडरवा तनी लगा लीहे। अबकी तोर मुँहवा साफा लागता ।…

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बेटी के भाग

गोधन कुटा गईल रहे,लोग बियाह-शादी के रिश्ता खातिर आवे-जाय लागल रहे।रघुनाथ के भी आपन बेटी के हाथ पियर करे के रहे।एगो सेयान बेटी के बप के आँख में नींद कहाँ लागे।रगुनाथ के दिन-रात इहे चिंता सतावे, “आखिर उ रेशमा के बियाह कईसे करीहें? ” “कहाँ से ले अईहें दहेज के पईसा?” “बिना दहेज,के करी रेशमा से बियाह?” एगो जे बेटा रहले चार साल पहिले कालकात्ता सड़क दुर्घटना में चल बसले आ मेहरारू त पहिलहीं दुनिया त्याग दिहले रहली। बाकी जात-जात कह गईल रहली, “रेशमा के बियाह निमना घर मे करेम”…

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बेटा बेचा गइल

समधी जी हम रउआ गोड़ पो पगरी राखत बानी हमरा बेटी के अपना लिहीं , भोला हाथ जोड़के अपना होखेवाला समधी के आगे गिड़गिड़ाये लगलन। देखीं हमरा के समधी मत कहीं अभी शादी नईखे भइल त इ नाता कइसन दीनदयाल रोब में बोललन।फिर हाथ जोड़के भोला कहलन , शदिया तऽ होइये नु जाई राउर कृपा के खाली जरूरत बा।देखीं जवन तय बा तवन तिलक चढ़े से पहिले किलियर कर दिहीं हम कहाँ कहत बानी कि शादी ना होई दीनदयाल कहलन। देखीं हम बहुत फेरा में अभी बानी पइसा के कवनो इंतजाम…

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