‌कस्तूरी हियरा

अइसे त उनकर नाम रघुनाथ मिसिर ह, बाकिर गाँव में बड़ से छोट तक सभे उनका के रघ्घू, बाबा के नाम से  जानेला आ पुकारेला। घर के हाता में, नीम के छाँह तरे रघ्घू बाबा खटिया पर लेटल रहन। उनकर दिन के अधिकाह समय एकरे छांह में बीते ला। घर के भीतर जाये से घबड़ा लन। कभी आँगनैया बाल-बच्चन से गुलजार रहत रहे, आजु सन्नाटा के राज बा। उनकर मेहरारू,एकलउता बेटा,पतोह आ पाँच बरीस के पोता,नाव से नदी पार करत घड़ी, बढ़िआइल नदी के भेंट चढ़ गइल रहन। खाली तीन…

Read More