नकाबपोश

“गोड़ लागतानी …… बाबा  !”  पंडी जी के दसई,  फरके से गोड़ लगलें । “जय हो ……!  का आइल बाड़े दसई, कवनो काम का बा रे हमरा से ?” ” हं … बाबा ! तनी गृह प्रवेश के दिन पूछे के रहे रउवा से ” सुन  … दसई अब हम छोट जात में पूजा- पाठ, विवाह – शादी,कथा- वर्ता करावे खातिर अलगा – अलगा रेट बान्ह देले बानी। काम कके कीच कीच कइल ठीक ना लागे। हतना लेलीं, त होतना लेलीं । हं बाकिर चमरन के छोड़ के तोहनी  के…

Read More

फितूर

” चोर चमार गांव में फितूर मचा के रखले रहन सं साला…! बरियात से लवटते बटोराहे भेंटा गइलें सं । लाठी डंडा लेले सभे टूट परल ओहनिन पर। अकेले बंदूक लेले हमहीं । तीन गो के गोली मरनी सरवन के। बाकी लोग लाठी डंडा से मारत मारत भहरा देंले । खदेर खदेर के मरले लोग।  केतना के कपार फूटल। केतना के हाथ टूटल। खूब बढ़िया से थूरा गइले सं । अब नेवर हो जइहे सं । एगो अउरी चीज देखलS लोग कि ना… मारे में कूरिमियों आ अहिरों एक दू…

Read More