भुलरू बाबा के रहस्य

गाँव में एकहि गो नाव सभकरा बतकही पर चढ़ल रहे, उ रहे भुलरू बाबा के नेकी आ दान धरम । लोग बाग कहत रहले कि ऊ साधारण मनई ना, देवता के रूप हउवन। पाँच गो भाई में तिसरका, आ चालीस बरिस के हो गइले बाकिर बिआहो ना कइले आ ऊपर से विद्वान आ दानी। गांव में बाबा के बाबू जी स्कूल खोलले रहले। बाद में पक्का बनल आ सरकार से मान्यता भी मिल गइल। प्रिंसिपल आ सीनियर मास्टर खुदे भुलरू बाबा रहले। भुलरु बाबा के जिनगी स्कूल के लइका-बच्चा से…

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गीत

आफत बनके आइल कोरोना, अजी हम सुकवार नइहर की।   आटा सानत मोरी मुरूके कलाई, मुरूके कलाई अजी जीउ जर जाई, ओह पे ताना मारे सास! कहें काम इ तिहारी, अजी हम सुकवार नइहर की।   आफत बनके आइल कोरोना …   बरतन माजत मोरी हाथ करिआई, हाथ करिआई सगरी देह मरूआई, ओह पे लेबे चुटकी देवरा ! कहें काम इ तिहारी, अजी हम सुकवार नइहर की…     आफत बनके आइल कोरोना ….   मचकल कमर तबो झाड़ू लगाई, झाड़ू लगाई अजी पोछा लगाई, ओह पे मटक मटक के…

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