एह लोकतंत्र में सब बा जायज

हिंसा-नफरत के बोली जायज

बम-बारूद अ गोली जायज

बे मौसम के होली जायज

एह लोकतंत्र में सब बा जायज!

 

आक्सीजन के चोरी जायज

बेईमानी-घुसखोरी जायज

बयपारिन के जमाखोरी जायज

एह लोकतंत्र में सब बा जायज!

 

बिन अपराध के जेल जायज

मीडिया के घिन खेल जायज

चोर अ पुलिस के मेल जायज

एह लोकतंत्र में सब बा जायज!

 

राजा एकदम बहरा जायज

चेहरे पे कई चेहरा जायज

बिन दुलहा के सेहरा जायज

एह लोकतंत्र में सब बा जायज!

 

महंग छिच्छा-पढ़ाई जायज

महंगी भइल दवाई जायज

साहेब के सहबाई जायज

एह लोकतंत्र में सब बा जायज!

 

झुठहा के सम्मान जायज

सच्चा के अपमान जायज

पदासीन बेइमान जायज

एह लोकतंत्र में सब बा जायज!

 

किसानन के हकमारी जायज

कविअन के दरबारी जायज

निजीकरण सरकारी जायज

एह लोकतंत्र में सब बा जायज!

 

न्याय के नाम पे खेला जायज

देह बयपार के मेला जायज

झगड़ा झंझट झमेला जायज

एह लोकतंत्र में सब बा जायज!

 

वंचित के अपमान जायज

हिन्दू अ मुसलमान जायज

अंड-बंड फरमान जायज

एह लोकतंत्र में सब बा जायज!

 

धरम के गरम बजार जायज

हत्या अ बलतकार जायज

लास पे सत्ता प्यार जायज

एह लोकतंत्र में सब बा जायज!

 

–©® राम बचन यादव

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