देखS चिरकुटई

  देखS चिरकुटई चरम पर ए बाबा।   कतहीं केकरो कुछुओ बोलस अपना मनही मगन हो डोलस लागल बा धसका मरम पर ए बाबा।   खीस निपोरि टेसुआ बहावे कुछहू बोलि सभही भरमावे सरमाते नइखे सरम पर ए बाबा ।   ओकर चरित्तर सभही जनलस ओकरा बड़का धुरुत मनलस छिछिआई रोवत करम पर ए बाबा। देखS चिरकुटई चरम पर ए बाबा।   जयशंकर प्रसाद द्विवेदी

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साहित्य अकादमी-भाषा सम्मान-2021

साहित्य अकादमी भाषा सम्मान एगो भारतीय साहित्यिक पुरस्कार हवे, जवना के शुरुवात साहित्य अकादमी 1954 में कइलस। तब से ई पुरस्कार मान्यता प्राप्त भाषावन में साहित्यिक रचनात्मकता  का संगही शैक्षिक अनुसंधान के बढ़न्ति खाति एह सम्मान के स्थापना भइल। जवना में लेखक,विद्वान,संपादक,संग्रहकर्ता ,कलाकार भा अनुवादक लोगिन के ई सम्मान दीहल जा रहल बा, जे संबन्धित भाषन के आधुनिकीकरन भा बढ़न्ति में आपन जोगदान दीहले बा। एह सम्मान में एगो शाल,पुरस्कार पट्टिका आ 1 लाख रूपिया दीहल जाला।  भोजपुरी जइसन भाषावन के जवना के मान्यता नइखे मिलल, भाषा  सम्मान, साहित्य अकादमी…

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“भोजपुरी साहित्य सरिता” अंक-सितम्बर राजेश बादल जी के नजर से

पत्रिका : भोजपुरी साहित्य सरिता संपादक : जयशंकर प्रसाद द्विवेदी (जे.पी. द्विवेदी)। प्रकाशक : सर्व भाषा ट्रस्ट, नई दिल्ली। ISSN : 2582-1342 पता : 15/ए, मानसरोवर, लालकुआं, गाजियाबाद उत्तर प्रदेश । चलभाष : 09999614657. बड़ी रोचक कहानी ह । बरहुआ, चकिया, चंदौली में जन्मल जयशंकर प्रसाद द्विवेदी जी, बीटेक कईला के बाद इंजीनियरिंग कईले और अब लगातार भोजपुरी भाषा के विकास खातिर काम करत बाड़न । जउना भोजपुरी के लोग गांव क भाषा कहेला, उनका के उ भाषा के प्रति एतना लगाव बाटे कि पढ़ल-लिखल होखला के बाद भी उ…

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चठइल

ओझइती कइके लउटत घड़ी संतजी का खरहुल में चठइल पसरल लउकल। सोंचलन की भीतरा ढुक के देख लिहल जाव जदि दू चार गो भेंट जाई त भात पर का चोखा के जोगार हो जाई। जब ऊ चठइल का लती के उलिट पलिट के देखलन त अचरज में पड़ गइलन। काहे कि हर लतिये में सात गो आठ गो चठइल फरल रहे। ऊ चटकवाही देखावत लगलें तुड़े आ जमीने पर धरे।उनुका मन में एगो डरो रहे कि कहीं एही बीच खरहुल के मउआर आ गइल त चठइल अधिआ लीही।भल भइल केहू…

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” शिक्षक दिवस” आ हम शिक्षक

जब से कुछ टेवलगर भइनीं आ इस्कूल में पहुँचावल गइनीं तबे से ०५ सितम्बर के ‘ शिक्षक दिवस ‘ मनावे के बात भुलाये ना। हमार गाँवो किसान, सैनिक जवान आ सही में देखीं त शिक्षके के गाँव ह। घर पीछु एगो-दूगो शिक्षक जरूरे मिल जइहें। जब हमरा के सन् १९७३-७४ ई. के गाँव के इस्कूल में पहुँचावल गइल तवने घरी हमरा घर में बाबूजी, चाचा लोग आ भइया के मिला के चार जने शिक्षक रहलें। गाँव में प्राइमरी इस्कूल त सन् १९२४-२५ ई. का पहिलहीं से रहे जवन देस के…

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साहित्यकार के माने-मतलब

साहित्य एगो अइसन शब्द ह जवना के लिखित आ मौखिक रूप में बोले जाये वाली बतियन के देस आ समाज के हित खाति उपयोग कइल जाला। ई  कल्पना आ सोच-विचार के रचनात्मक भाव-भूमि देवेला। साहित्य सिरजे वाले लोगन के साहित्यकार कहल जाला आ समाज आ देस अइसन लोगन के बड़ सम्मान के दीठि से देखबो करेला। समय के संगे एहु में झोल-झाल लउके लागल बा। बाकि एह घरी कुछ साहित्यकार लो एगो फैसन के गिरफ्त में अझुरा गइल बाड़न। एह फैसन के असर साहित्यिक क्षेत्र में ढेर गहिराह बले भइल…

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शिवनंदन कवि आ उनकर दूगो गीत

भोजपुर के बड़हरा ब्लॉक में एगो गाँव बा मौजमपुर। एहिजा के रहलें एगो शिवनंदन कवि। उनकर एगो कविता बा जवना में पत्थल-पानी परला के चलते छान्ह-छप्पर आ रब्बी के फसल के भारी बरबादी के वर्णन बा। ई घटना 1941 के ह। कवि एह गीत में एकतालीस के जिकिरो कइले बा। एह गीत में घटना के साल के संगे-संगे कवि के नाव- गाँव के भी जिकिर बा। आ अतने ले ना, कवि ‘आत्म-छवि’ (आपन रंग-रूप) के भी उल्लेख कइले बा, आपन मजाक उड़ावे के शैली में। छान्ही प के खपड़ा-नरिया सब…

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पन्द्रह अगस्त मनावल जाई

झूठ साँच के लेवा गुदरी फूँकि पहाड़ उड़ावल जाई पन्द्रह अगस्त मनावल जाई।   बबुआ भइया सुन ए बचवा ढरा गइल सब एके संचवा लक़दक़ सजल आवल जाई पन्द्रह अगस्त मनावल जाई।   भाँवरि घूमल बिहने बिहने अरजी फरजी के का कहने कबों बिचार बनावल जाई पन्द्रह अगस्त मनावल जाई।   अरखे के कुल भाव-कुभाव केकर केकर देखब सुभाव सब गुड़ गोबर गावल जाई पन्द्रह अगस्त मनावल जाई।   मरे जवान भा मरे किसान माथे जरिको न पड़े निसान निकहे ढ़ोल बजावल जाई पन्द्रह अगस्त मनावल जाई।   बेरोजगार चरम…

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मटिया क गांव

पीपर पकरिया के गछनार छाँव हो, ऊँच नीच खोरिया में मटिया क गांव हो। मुर्ग़ा के बोलिया पर जहवाँ बिहान बाय, मनवा रिझावै बदे बिरहा के तान बाय। दिन रात चलत थकत नाही पाँव हो, ऊँच नीच खोरिया में मटिया क गांव हो।। देहियाँ क जहवाँ सिंगार बाटै माटी, जोगवल जात बा पुरान परिपाटी। कगवा क बोलिया सगुन काँव काँव हो, ऊँच नीच खोरिया में मटिया क गांव हो।। कबहुँ सुखात ना पसीनवा क सोती, खेतवा कियरिया से काढ़ि लेत मोती। कबौं बिधि दहिने कबहुँ जात बाँव हो, ऊँच नीच…

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सुनली ह ! आज 15 अगस्त हौ

तिरंगा के कहनी में बा जोश इहवाँ कहाँ बाचल बाटे होश चोरवे खोजत बाड़े सन चोर गली-कूचा में चालू गस्त हौ। सुनली ह ! आज 15 अगस्त हौ॥   बिला रहल बाटे जवान-किसान नीक के बाटे, सभै परेशान माजा लूटल कुछ लोगिन के बा बाकि त इहवाँ, सबही त्रस्त हौ। सुनली ह ! आज 15 अगस्त हौ॥   आपुस मे कतना बाटे राड़ कतौ सूखा बाटे कतौ बाढ़ इहाँ के मनई क दशा दिशा का दिल्ली में भइया सभै मस्त हौ। सुनली ह ! आज 15 अगस्त हौ॥   गोरका…

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