कजरी

1 अइलें नाही तोहरो बिरनवाँ हो, सवनवाँ आई गइलें ननदी। आई गइलें ननदी हो, आई गइलें ननदी सवनवाँ आई गइलें ननदी।   गोतिनी मोरी चलेले अतिराइल अपने पियवा के रंग में रंगाइल कि सून लागे हमरा भवनवाँ हो, सवनवाँ आई गइलें ननदी।   भोरहीं सिवाने सुनाले कजरिया रहिया निहारत तोहरी गुजरिया कि मानि लेता हमरा कहनवाँ हो, सवनवाँ आई गइलें ननदी।   बिरहा के मारल तोहरी सजनियाँ रतिया सेजिया आवे नाही निनियाँ कि लोरे सउनाइल नयनवाँ हो, सवनवाँ आई गइलें ननदी।   आई गइलें ननदी हो, आई गइलें ननदी सवनवाँ…

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