बुधिया

गाड़ी टेसन से अबही छूटल ना रहेल सवारी अपने मे अरूझायल हउए । केहू सूटकेस मे चेन लगावत ह,त केहू आपन बेग के सही करत ह,त केहू आपन सीट न. खोजत बा।तबही धच – घचक करत गाड़ी आगे बढै़ लगल । तब ले वहीं मे से केहू क अवाज सुनाईल ,इंजन लग गयील अब गाड़ी थोड़कीय बेर मे चली।चाय ले ला…..चाय।कुरकुरे दस रूपिया….दस। कहत चायवाला डिब्बा में घुसल। अबही गाड़ी अपने पुरे रफ्तार में आवै, बुधिया खिड़की के पास बैइठ गइल।बहरे पलेटफारम छोड़त आगे बढ़त गाड़ी क चाल समझै लगल…

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सामा चकवा लोक कथा

सामा चकवा ई लोक कथा भारतीय लोक मानस मे रचल बसल बा।एक भाई अपने बहिन बदे अपने बाप क बिरोध करेला अऊर ओके निर्दोष साबित कर के समाज के लोगन के एक नेक सन्देस देला।आज जहाँ समाज मे रिस्ते नाते बेमानी होत जात ह।ऊहा ई त्योहार क आजू के समय मे महत्व बढ. जाला।ई कहानी बा राजा कृष्न क बेटी साम्बवती रहनी।एक चुगुलखोर जाके राजा से कहेला कि सामवती क एगो ऋषि के साथे गलत समबन्ध बन व ले ह ई।राजा ओकरे बाती पर बिसवास क ई लेनै।एक बार भी…

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आपन बात

भोजपुरी साहित्य सरिता क इ अंक आप लोगन के सौंपत के बहुत हर्ष होत बा। सबसे बड़ी खुशी क इ बात ह कि ई अवसर कार्तिक महिना के बा । कउनो राष्ट्र देश के सांस्कृतिक वैभव क परिचायक उहवां के लोक साहित्य होखेला। जवने से उहवां के संस्कार परंपरा जीवन आदर्श उत्सव विषाद नायक नायिका रितु गीत विवाह गीत भजन राजनीतिक सामाजिक धार्मिक गीतन के बोल में समाहित रहेला। वइसे तो हर देश के आपन एक परम्परा होखेला लेकिन हमरे देश के बात निराला बा। इहवा “कोस -कोस पर बदलें…

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