ललका गुलाब समानान्तर भोजपुरी सिनेमा के लिए पहल

भोजपुरी के विरोध का सबसे आसान तरीका है भोजपुरी फिल्मों का विरोध।भोजपुरी के गीतों का विरोध।भोजपुरी फिल्मों की यात्रा निरन्तर ह्रास और छीजन की कहानी है।गंगा मइया तोहें पियरी चढइबों जैसी साफ सुथरी और भावात्मक और बेहद पारिवारिक फिल्म से होकर भोजपुरी फिल्म की पतन गाथा निरहुआ और उसके आगे तक जाती है ।दुर्भाग्य यह कि कुछ भोजपुरी विरोधी लोग ,जिनमें हिन्दी के कुछ विद्वान (?) भी शामिल हैं जो इस पतन गाथा को ही भोजपुरी की असली पहचान बताकर अपना व्यवसाय चला रहे हैं।जब भोजपुरी विरोध के लिए बाजार…

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“छापक पेड़ छिउलिया त पतवन गहबर….”

लोक साहित्य मे भारतीय सां स्कृति क छवि देखकै मिलै ले। समाज के सब रूपन से परिचित करवालै।आज के समय में जहाँ सम्बन्धन क कउनो मान ना रहि गयल बस रस्म अदायगी तक उहाँ जरूरी हो जाला हमने अपने परम्पराअउर लोक व्यवहार पर चिन्तन कयल जाय।काहे से कि आजकल एकर लोप होत जात बा।लोक जीवन में सामाजिक धार्मिक आथिर्क पझ क छटा देखेके मिलेला। आज भी गाँवन में सयुंक्त परिवार क बोलबाला बा सब लोग एकसाथ एक घर मे रहैनै,हमरे इहाँ लोकगीत मे आदर्श सम्बन्ध क रूप देखैके मिलेला। पति…

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