एगो मसखरापन के भाव-कुभाव सब जगह हावी बा

1.एगो भोजपुरी निरगुन के मरम

“सभकर ख़ूनवा एकही रे हऊवे, धरमवा अलगा – अलगा बा। केहू माई-बाप के चरनिया के धोवे, केहू के माई-बाप दिन -रात रोवे। माई के ममता एकही रे हऊवे, ललनवा अलगा – अलगा बा। हीरा जनम पवल- s सुंदर तन हो, तब काहे गंदा बाटे तोहार मन हो। सभकर नेहिया एकही रे हऊवे,बिचारवा अलगा-अलगा बा।”

एह भोजपुरी पारंपरिक निर्गुण में जीवन के जइसे मए मरम राखि दिहल गइल बा। सभकर ख़ून के रंग एकही होला,लाल रंग। धरम अलग-अलग होला। अर्थात् धरम इंसानियत के बांटे के काम करेला। किछु लोग माई – बाप के ख़ूब सेवा करेला,किछु लोग के माई-बाप दिन-रात रोवत रहेला। माई के ममता एकही होला,ओकर संतान अलग-अलग होले। एह गीत में मनुष्य जीवन के हीरा लेखा बेशकीमती मानल गइल बा आ सवाल कइल गइल बा कि एतना कीमती आ सुंदर तन पा के ओकर मन काहे गंदा बाटे। आखिर में ईहो कहल गइल बा कि नेहिया एकही होले,बिचार अलग-अलग होला। कहे के गरज ई बा कि प्रेम जोड़ेला आ बिचार अलग करेला,एक से दोसरा के। एह निर्गुण में जेवन संदेश छुपल बा ऊ इंसान के इंसान से जोड़े वाला बा। एहिजा संवेदना प सब ज़ोर बा बिचार प किछुओ ना।

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  1. ग्लोबल रंगदार डोनाल्ड ट्रंप

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“राजा हमार हंँवें रंँगदारवा जवारवा उन्हुकर नाँव जानेला।

नेता -अभिनेता-पुलिस थानवा लोगवा तमाम जानेला।”

उपरोक्त भोजपुरी गीत के बोल में केवनो विशेष कथ्य नइखे बुझात। एह गीत में एगो मेहरारू आपन मरद के तारीफ़ के पुल बांध रहल बिया। ऊ उन्हुका के राजा कहि के संबोधित कर रहल बिया। ऊ कह रहल बिया कि हमार राजा रंगदार हंवें। ज़िला-जवार उन्हुकर नाँव जानेला। एहिजा हम बतावल चाहब कि भोजपुरी अंचल में रंगदार गुंडा – अपराधी,धौंस जमा के काम करावे वाला,जबरन वसूली करे वाला के कहल जाला। भोजपुरिया समाज में मेहरारू राजा,राजा जी,रजऊ आदि संबोधन आपन मरद के देला लोग। एह भोजपुरी गीत में आपन रंगदार मरदो पर गरब कइल गइल बा। नेता, अभिनेता,पुलिस थाना सब जगह पर उन्हुका के लोग जानेला। एह गीत में अपराध आ गुंडई के एगो मेहरारू ग्लोरीफिई कर रहल बिया। ओकरा के आपन समर्थन दे रहल बिया। एह गीत में नैतिकता खातिर केवनो जगह नइखे। फिर भी भोजपुरी समाज में एह गीत के बोल सोशल मीडिया पर ख़ूब वायरल हो रहल बा। माफिया, अपराधी छवि के स्थानीय नेता लोग पर गीत के ई बोल सोशल मीडिया में रील के रूप में देखल जा सकत बा। एह भोजपुरी गीत के बोल से जानल जा सकेला कि हमार भोजपुरिया समाज केवना दिशा में जा रहल बा! लोग के पसंद का बा! एह गीत के बारे में गूगल जानकारी दे रहल बा कि एकर रचनाकार बिट्टू तिवारी हंवें। एकरा के दीपक तिवारी आ मुकुल सिंह गवले बा लोग। एही साल के फरवरी में एह गीत के लोकप्रियता मिलल बा। अब समय तेज़ी से बदल रहल बा। रचना में पहिले अच्छाई के पक्ष लिहल जात रहे। बुराई के कंडेम कइल जात रहे। अब बुराई के ऊपर गरब करे के सनेस दिहल जात रहल बा। एह गीत के वायरल भइला के परिघटना ईहो सनेस दे रहल बा कि समाज में अब ऊहे महत्व पाई जे दबंग बा। धाक् जमा के बा। कमज़ोर अब रचना में भी जगह ना पाई। एह बात के आज वैश्विक संदर्भ में भी देखल जा सकेला। एहघरी वैश्विक परिप्रेक्ष्य में रंगदारी के सबसे बड़हन उदाहरण बाड़न डोनाल्ड ट्रंप।

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3.सोशल मीडिया में वायरल भइल भोजपुरी गाना

आजुकाल्हु सोशल मीडिया में भोजपुरी गाना ख़ूब वायरल हो रहल बाड़े स। ई सब गाना भोजपुरी पारंपरिक लोक गीत के पैरोडी के रूप में सामने आ रहल बाड़े स। एगो पारंपरिक निरगुन ह -” एक दिन नदी के तीरे,जात रहनी धीरे – धीरे। हम आंखिन देखनी, सुंदर सरीरिया अगिया में जरेला हो राम।”

अब एही धुन प एगो गाना वायरल भइल बा – ” हम अंखियां देखनी, पियवा नचनिया ले के सुतेला हो ना।”

केहवां त एगो निरगुन में शरीर के नश्वरता के पाठ फढ़ावल गइल बा आ पैरोडी में ओकर धुन के रूपांतरण श्रृंगार रस में क दिहल गइल बा। एगो नारी के सौतिया डाह के,विरह -वेदना के मखौल उड़ावल गइल बा।

एही तरह से भोजपुरी में भतार,ईयार के बीच एगो नारी के अतिरंजित चित्र के उरेहल जा रहल बा। एगो वायरल गाना में प्रेमी के दयनीय दशा प कहल जा रहल बा -” सांझु -भिनुसरवा रोवे,दिन दुपहररवा रोवे। दिलवा तूड़ि -ओड़ि चलेले चिरइयां कि माड़ो के बांस धइ के ईयारवा रोवे।”

एही तरह से एगो दोसर वायरल गाना में अतिरेक में जा के कहल जा रहल बा -” बगसर से हमरा मजनुआ के पटना रेफर कइले बा,जाए द ना नइहरवा ए सैंइया,हमार ईयारवा जहरवा खइले बा।”

ऊपर के गाना में एगो लगले के बियहुता मेहरारू अपना मरद से अरज-निहोरा करत बाड़ी कि हमार ईयारवा जहर खा ले ले बा, बिछोह में। हमरा के नइहर जाए द,ओकरा से मिले खातिर।

सांच कहल जाई त कहल जा सकेला कि ई भोजपुरी के पापुलर धारा में पैरोडी जुग बा। एह में जन जीवन के रियल लाइफ के चित्र नइखे उभरत। हर बात आ रचल गइल दृश्य तर्कहीन आ अतिरंजना से भरल बा। कहे के परत बा कि एह सब गाना के समाज प उल्टा असर परि रहल बा। एक ओर त सोशल मीडिया में एह वायरल भइल गीतन के तर्ज़ आ धुन पारंपरिक आ मोहक बा त दोसरा ओर एह गीतन में जेवन अतिरंजित जथारथ के परोसल गइल बा ऊ नैतिक छरन के दरसा रहल बा। ई एगो तक़लीफदेह प्रसंग बा।

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  1. आखिर में जगरनाथवा बो

किछु दिन पहिले एगो भोजपुरी संवाद सोशल मीडिया प ख़ूब वायरल भइल रहे -“हमरा के जगरनाथवा बो क देले बिया।” एकरा प सैकड़न गो रील देखे के मिलल रहे। एह के देखि के लागत रहे कि ई एगो भोजपुरी प्रहसन के भीतर के संवाद ह। बाकिर ईहो बुझाय कि डाइन के जादू- टोना सांच होला। सोशल मीडिया के ई सब बात आसमान से नइखे टपकल। ई भोजपुरिया समाज के भीतर के अराजकता आ दशा -दिशा के दरसा रहल बा। एकर छवि एगो अइसन समाज के बन रहल बा जेवन अब आपन मौलिकता खो रहल बा आ पैरोडी के अपना रहल बा। एगो मसखरापन के भाव-कुभाव सब जगह हावी बा।

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डॉ चंद्रेश्वर

लखनऊ

 

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