बनल आदमी आदमी के हीं मुश्किल। घर-घर में रावण बा मिले ना केहू संगदिल।। बनल आदमी………………………… आ○1 माई-बाप-भाई केहू लउकत ना खास बा..2 केहू के केहू पर ना तनिको विश्वास बा..2 गईल बा रुपइया देख सबका से हिल-मिल.. बनल आदमी………………………… आ○2 अखियां तरस गइल पावे ला सनेहिया..2 माटिए में मिल जाइ एक दिन इ देहिया..2 फिर काहें लोरवे से भरल रहे महफिल.. बनल आदमी………………………… आ○3 पाण्डेय आनंद से ना आगे लिखात बा..2 दानव बनल इहवा मानुष के जात बा..2 घुट-घुट के मरे नेक लोग इहवा तिल-तिल..2 बनल आदमी………………………… आनन्द कुमार…
Read MoreCategory: भोजपुरी गीत
अँगनइया लोटे बबुआ
अँगनइया लोटे बबुआ, लेहिंजा बलाइया हो अँगनइया लोटे बबुआ, लेहिंजा बलाइया॥2॥ लेहिंजा बलाइया हो लेहिंजा बलाइया अँगनइया लोटे बबुआ, लेहिंजा बलाइया।। अँगना भर, धुरिये फइलावेला मुँहे भरिके, देही लगावेला धुरिये से पोत लेला दूनों कलइया। हो अँगनइया लोटे बबुआ, लेहिंजा बलाइया। अँगनइया लोटे बबुआ, लेहिंजा बलाइया॥ पवते मोका, भागेला दुअरे सोचत आवे ना, केहू नियरे धउरी धउरी ईया उठावेलीं कन्हइया। हो अँगनइया लोटे बबुआ, लेहिंजा बलाइया। अँगनइया लोटे बबुआ, लेहिंजा बलाइया॥ देखि देखि बाबा, उचकि निहारे उहो न रहि पावें, बेगर दुलारे बोली बोली बबुआ के बाबू…
Read Moreघरे-घर खुशियां मनाव,दीया खुशी के जलाव
घरे-घर खुशियां मनाव,दीया खुशी के जलाव घरे-घर खुशियां मनाव, बात अब ई फइलाव धरा बचावे खातिर बबुआ,अब त तू आगे आव अब ना छोड़ बम पटाखा, कीरिया आज उठाव दुखियन के गले लगाव… दीया खुशी के जलाव घरे-घर खुशियां मनाव………. ना खाएब ,मेवा मिठाई, ना खाएब बाजार के आपन घरे बनाएब आज,रोकब भ्रष्टाचार के बिजली के खूब बचाव… दीया खुशी के जलाव घरे-घर खुशियां मनाव……….. दीन दुखी गरीब के साथे, बाटंम खुशियां दू चार जेतना संभव होई भइया, देहब हम लार दुलार बूढवन के गले लगाव… दीया खुशी के जलाव…
Read Moreहमहूं आजु दरिद्दर खेदब
हमहूँ आजु दलिद्दर खेदब, घुमि घुमि सूप बजाइब हो।, कहियै कै सोवलि किस्मत बा, ओके आजु जगाइब हो।। सूप बजावत पुरखा लोगवा, बदहाली में मरि गइलैं, घुसुरल जवन दरिद्दर बइठल, हमरे माथे थरि गइलैं, पकरि के टेटा ओहि कुकुरे कै, गड़ही ले दउराइब हो।, कहियै कै सोवलि किस्मत बा, ओके आजु जगाइब हो।। जेकर नाँव अकाशे दउरे, केतना सूप बजउले होई, कउने जोजन से ऊ अपने, भगिया के चमकउले होई, भगै दरिद्दर हमरे घर से , जुगुती उहै लगाइब हो।, कहियै कै सोवलि किस्मत बा, ओके आजु जगाइब हो।। लालबहादुर…
Read Moreसोहर
घरवा में जनमेली बिटिया त , हिरीदा उमंग भरे हो। बबुनी तोहरा प सब कुछ नेछावर, सोहरियो सोहरि परे हो। बाबा खुशखबरी जे सुनले, धधाइ घरवा अइलन हो, बबुनी पगरी के पाग सोझ कइलन, मोछिया अइठी बोलेहो। गुरु जी के अबहीं बोलईबी, पतरा देखाइबि , ग्रह मिलवाइबि हो। बबुनी तुहीं मोरा कुल के सिंगार, सृजन मूलाधार हउ हो। सुनि सुनि अनध बधाव, जुटेले पुर गाँव, ले ले के उपहार नू हो। बबुनी तहके निहारे खातिर धरती, आकास लागे एक भइले हो। तहके पढ़ाईबि लिखाइबि , अकासे ले उठाइबि , दुनिया…
Read Moreनिमिया के पात पर
निमिया के पात पर सुतेली मयरिया,ए गुंइया। कइसे करीं हम पुजनियां,ए गुंइया।। धुपवा जराइ हम गइनीं जगावे,ए गुंइया। मइया का ना मन भावे, ए गुंइया।। गंगा जल छींटि छींटि,लगनी जगावे,ए गुंइया। मइया करो ना घुमावे,ए गुंइया।। अछत,चनन,छाक,गइनी चढ़ावे,ए गुंइया। मइया का ना इहो भावे,ए गुंइया।। मालिनि बोला के कहनीं,मलवा ले आवे,ए गुंइया। मइया मूड़ी ना उठावे,ए गुंइया।। पूआ-पूरी ले के गइनीं,भोगवा लगावे,ए गुंइया। मइया तबो ना लोभावे,ए गुंइया।। पुतवा बोला के कहनी,झुलुहा लगावे,ए गुंइया। मइया झट उठि आवे,ए गुंइया।। अनिल ओझा ‘नीरद’
Read Moreशरद बहार
आइल शरद बहार रे,आइल शरद बहार। पहरा बीति गइल पावस के,लोग भइल खुशहाल। ताल ताल पर कलरव उतरल,धरती भइलि निहाल।। झलकलि पूरब ओर,भोर के गोरिया, दमकल भाल। चमकलि पांव पखारल मोती,गमकल मलल गुलाल।। हंसा चलल विदेसे,अइली ढेंकी बान्हि कतार रे।आइल शरद—-।। झिर-झिर बहल जोमाइल नारा,लवटल नदी बिसास। सिहरल सून अरार,निछाने फूलल गह गह कास।। गुलगुल पलिहर पर तरनाइलि,आइलि फफनलि घास। हंसि-हंसि हंसुआ चले गुजरिया,बतरस भरल लहास।। झूमि उठल मद भींनल बजरा,खंजन नयन निहार रे।आइल—-।। चम-चम किरिनि सरग से उतरलि,उज्जर दिन पुरवार। निरमल रइनि अंजोरिया उमड़लि,बिटिया बनल कुंआर।। उझिलल अमृत बुझाइल…
Read Moreराकेश पाण्डेय जी के चार गो गीत
1 पूरुब से आवेले बदरिया नु हो,जहां पिया जी हमार। भींजे मोरी कोरी रे चुनरिया नु हो,नाहीं बाड़ें रखवार। पुरुवा के झोंकवा से सिहरे बदनियां। टप टप अंचरा से चूवे मोरा पनियां। आगि लगो कोठवा अंटरिया नु हो, नाहीं बाड़ें रखवार। पूरुब से आवेले बदरिया नु हो,जहां पिया जी हमार। पिऊ पिऊ बोलेला मोर पिछवरवां। निनिया पराई गइलीं ननदी बहरवां। झलुआ क गीतिया बिरहिया नु हो, नाहीं बाड़ें रखवार। पूरुब से आवेले बदरिया नु हो,जहां पिया जी हमार। संझवा बिहनवां ना लागे मोर मनवां। सासु सुत्तें…
Read Moreतोहरे बिगारल हवे
प्रेमी तोहरे सनेहिया के मारल हवे..2 नाहीं बिगड़ा ह तोहरे बिगारल हवे..2 आ॰1 तोहके अपनों से ज्यादा उ चाहत रहे…2 तोहरा से ओकरा जीनगी में राहत रहे..2 जननी ई सब त तोहार उतारल हवे….. नाहीं बिगड़ा ह तोहरे बिगारल हवे..2 प्रेमी तोहरे सनेहिया के मारल हवे..2 आ॰2 अब सनेहिया के नमवा से डर हो गईल..2 चर्चा गउएं का संउसे शहर हो गईल..2 तिरछी नैना कटारी के फारल हवे….. नाहीं बिगड़ा ह तोहरे बिगारल हवे..2 प्रेमी तोहरे सनेहिया के मारल हवे..2 आ॰3 पांडेय आनंद किस्मत में इहे लिखाईल..2 नीर नदिया में…
Read Moreसावन -प्रेम गीत
सावन के महिना घेरले बदरिया बरसेला पनिया बीच रे आँगन में केहसे संदेसा भेजी केहु नइखे दुआरा पियउ भींजत होंइहे बीच पाँतर मे। आदारा ना हवे इहो हवे इहो हथिया बड़े बड़े बुनी पड़े धरकेला छतिया चमके बिजुरिया दूर गगन में पियउ भींजत होंइहे बीच पाँतर में। लगे तनी रहतें त पूछ लेले रहतीं संझिया के हमहूँ निक-नोहर बनवतीं केहु नाही लउके दूर डगर में पियउ भींजत होंइहे बीच पाँतर में भींजतिया चिरई भींजतिया गइया दुअरा के छान पर बइठल गौरईया हमरा ना निक लागे अइसन महल में पियउ भींजत…
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