शिवजी के मुँह पर हमेशा बारह बाजल रहत रहे। बाकिर ओह दिन ऊ बड़ा खुश रहस। उनका के खुश देखके पड़ोसी राम प्रसाद जी पूछलन, ‘‘का बात ह ? तू त केहू के खुशियो देख के खुश ना होखेल। आज अतना खुश कइसे देखाई देत बाड़ ? कवनो खास बात बा का ?’’ ‘‘मालूम बा कि ना ? लखन भइआ बड़ा आदर्शवादी बनत रहस। उनकर बड़की बेटी सुष्मिता दोसरा जात में बिआह कर रहल बिआ !’’ गोतिया के बात ! भइया के जगहँसाई के बारे में सोच-सोच के ऊ बड़ा…
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