समय लोगन का संगे साँप-सीढ़ी के खेल हर काल-खंड में खेलले बा,अजुवो खेल रहल बा। चाल-चरित्र-चेहरा के बात करे वाला लोग होखें भा सेकुलर भा खाली एक के हक-हूकूक मार के दोसरा के तोस देवे वाला लो होखे,समय के चकरी के दूनों पाट का बीचे फंसिये जाला। एहमें कुछो अलगा नइखे। कुरसी मनई के आँखि पर मोटगर परदा टाँग देले, बोल आ चाल दूनों बदल देले। नाही त जेकरा लगे ठीक-ठाक मनई उनुका कुरसी रहते ना चहुंप पावेला, कुरसी जाते खीस निपोरले उहे दुअरे-दुअरे सभे से मिले ला डोलत देखा…
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जेकर खेती ओकर मति
शीतलहर के प्रकोप में अलग अलग तरह से गरमी के पैदा करे क उताजोग हो रहल बा आ लोग ओकरा के महसूसतो बा। ओह पर चरचा के बजारो गरम हो चुकल बा। कबों कवनो बैठक त कबों कवनो खिलाड़ी गरमी के श्रोत बन रहल बाड़ें। समइयो एक्के आँख से देखउवल के चल रहल बा। चाल चरित्र के बात करे वाला लोगवो एक्के आँख से देखे क आदती हो चुकल बा। उ लोग देखते भर नइखे बलुक फीरी में धमकियो दे रहल बा उहो भोंपू लगा के । मुख पोथी के…
Read More‘चौधरी कन्हैया प्रसाद स्मृति सृजन सम्मान से दुगो भोजपुरी साहित्यकार सम्मानित भइलें
विश्व पुस्तक मेला के अंतिम दिने सर्व भाषा ट्रस्ट के स्टाल पर चौधरी कन्हैया प्रसाद सिंह स्मृति न्यास आरा आ सर्व भाषा ट्रस्ट का ओर से भोजपुरी साहित्य के संरक्षण-संवर्धन आ सृजन खातिर वर्ष 2025 का डॉ संतोष पटेल आ वर्ष 2026 का श्री जयशंकर प्रसाद द्विवेदी के ‘चौधरी कन्हैया प्रसाद स्मृति सृजन सम्मान’ से राष्ट्रीय पुस्तक न्यास के संपादक श्री लालित्य ललित के हाथों सम्मानित कइल गइल।
Read Moreनैनन चलावेली बान
ले भौंहन क तीर कमान नैनन ! नैनन चलावेली बान। रति सी अंग अंग हौ ढारल सोझा आइल बा, सभ हारल भरमावै सभके धियान। नैनन— साज समाज बीच जब आवे अवते इहाँ मधुर मुसुकावे सुघरई क छोड़े निसान। नैनन — जब जब सुर में गीत सुनावे मन के तार तार झनकावे सांसत में डारस परान। नैनन— जयशंकर प्रसाद द्विवेदी
Read Moreबुझीं जनि ठिठोली
कउवो से करकस कोइलिया के बोली बुझीं जनि ठिठोली,इहे हियरा टटोली। बकुला भगत संगे हुंडरो बा आइल देखीं भला आजे बिलरो धधाइल बघवो त मनवाँ के राज आज खोली। बुझीं जनि ठिठोली,इहे हियरा— रात दिन होत बात बाS अझुरउवा उपरा त अउर भीतर बाउर भउवा भरलको पुरलको फइलउले बा झोली । बुझीं जनि ठिठोली,इहे हियरा— बुझलें न अबले, जोड़त हाथ दुअरे लागत बा आइल चुनउवा ह नियरे भरमावे भर दिन चार चार गो टोली । बुझीं जनि ठिठोली,इहे हियरा— जयशंकर प्रसाद द्विवेदी 09-10-2025
Read Moreस्त्री संवेदना के धारदार कृति:निमिया रे करुआइनि
पुस्तक- निमिया रे करुआइनि विधा-उपन्यास / उपन्यासकार – मीनाधर पाठक प्रकाशन वर्ष-2024 /प्रकाशन संस्थान – सर्वभाषा प्रकाशन , नई दिल्ली -59 ‘निमिया रे करुआइनि’ स्त्री संवेदना के उनुका मन के मोताबिक आ उनुका स्थिति का हिसाब से गढ़ाइल बा। कथाकार अपना कथा-विन्यास के स्मृतियन से जोड़त रोचक बनावे में कवनों कोर कसर नइखे छोड़ले। एह उपन्यास के नायिका सुरसतिया (सुरसती) के करुणा आ दुःख भरल जिनगी के जतरा जवन मन,मेहनत आ देह के शोषण से होके गुजरल बा , ओकर नीमन से शब्द चित्र खिंचाइल बा। एही उपन्यास के…
Read Moreपार्टी विथ डिफरेंस
पार्टी विथ डिफरेंस हईं हम होखे जय-जयकार। हो बाबू !हाउस टैक्स उपहार। तहरे माला हमै बनवलस पार्षद, मेयर आ विधायक । हमही लायक सांसद बानी टैक्स के चलाइब सायक। चैन से रहि ना पइबा घरे नगर निगम के मार। हो बाबू !हाउस टैक्स उपहार। पानी बिजुरी कूड़ा पूरा घर-घर हेरवाइब सर्वे कर । टैक्स क सोंटा चली दबा के कंहरे भा जीयें मर मर कर । जनता के राहत ना कउनों देखत अँखिया फार। हो बाबू !हाउस टैक्स उपहार। चमचा फोरें घर-घर के आ बेलचा…
Read Moreका हो मुखिया !
घूमत रहलें गल्ली-गल्ली देखत कहवाँ ऊंच-खाल बा। पूछलें रामचरितर उनुसे का हो मुखिया ! का हाल बा। कवन नवकी घोषना भइल कतना फंड बा आइल रउरा घरे मुखियाइन त रहनी खूबै धधाइल। हमनी के ना कुछौ मयस्सर रउरा धइले खूब ताल बा। का हो मुखिया ! का हाल बा। पर शौचालय बन्हल कमीसन मनरेगा बा लमहर मीसन एह घरी चलत बा जमके पूजा घर के उद्धारी सीजन । देवी देवतन के कामो में रउरा छनत खूब माल बा। का हो मुखिया ! का हाल बा। पानी के…
Read Moreनवके मनराखन के मनकही
का जमाना आ गयो भाया, लागत बा कि जयचंदन के फिरो दिन बहुरे लागल। अपना के फलाना भाषा के साहित्यकार कहवा के लुगरी आ लकड़ी बिटोरे में सरम ना लागे बाक़िर ओह भाषा पर अंगुरी उठावत बेरा अपना के बड़का भाषाविद बुझे लागल बा लोग। साँच के नकारे के फेरा में लोग कुछो लिखे- बोले लागत बा। लोग बुझत बा कि ई भषवा परती सरकारी जमीन ह, ओहपे कुछो करीं, धरीं, केहू कहे सुने वाला नइखे। केहू साँच बतावतो होखे त बतावत रहे, अपना कोरट के जज अपनही नु बानी,…
Read Moreतोल मोल के बोल
लेवरल पोतल ह उप्पर से भितरी बड़का झोल, फकीरा, तोल मोल के बोल, फकीरा।2। लगल घून हौ धरम करम में नेह चटलेस दियका। लूह लागल हीत-नाता के सरम बिलाइल, डहका । इंटरनेट पर पीटत बबुआ परंपरा के ढोल, फकीरा , तोल मोल के बोल, फकीरा।2। तूरत फ़ारत झंखत झारत आगि लगवलें घर घर । कवनो बात भइल बा इहवाँ बोलत बाटे टर टर । जेकरा खातिर छोड़ला सभके उहे खोलता पोल, फकीरा, तोल मोल के बोल, फकीरा।2। के के फुकले बा पुवरउटी इरिखा में जरि जरि के।…
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