देखS चिरकुटई

  देखS चिरकुटई चरम पर ए बाबा।   कतहीं केकरो कुछुओ बोलस अपना मनही मगन हो डोलस लागल बा धसका मरम पर ए बाबा।   खीस निपोरि टेसुआ बहावे कुछहू बोलि सभही भरमावे सरमाते नइखे सरम पर ए बाबा ।   ओकर चरित्तर सभही जनलस ओकरा बड़का धुरुत मनलस छिछिआई रोवत करम पर ए बाबा। देखS चिरकुटई चरम पर ए बाबा।   जयशंकर प्रसाद द्विवेदी

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साहित्यकार के माने-मतलब

साहित्य एगो अइसन शब्द ह जवना के लिखित आ मौखिक रूप में बोले जाये वाली बतियन के देस आ समाज के हित खाति उपयोग कइल जाला। ई  कल्पना आ सोच-विचार के रचनात्मक भाव-भूमि देवेला। साहित्य सिरजे वाले लोगन के साहित्यकार कहल जाला आ समाज आ देस अइसन लोगन के बड़ सम्मान के दीठि से देखबो करेला। समय के संगे एहु में झोल-झाल लउके लागल बा। बाकि एह घरी कुछ साहित्यकार लो एगो फैसन के गिरफ्त में अझुरा गइल बाड़न। एह फैसन के असर साहित्यिक क्षेत्र में ढेर गहिराह बले भइल…

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पन्द्रह अगस्त मनावल जाई

झूठ साँच के लेवा गुदरी फूँकि पहाड़ उड़ावल जाई पन्द्रह अगस्त मनावल जाई।   बबुआ भइया सुन ए बचवा ढरा गइल सब एके संचवा लक़दक़ सजल आवल जाई पन्द्रह अगस्त मनावल जाई।   भाँवरि घूमल बिहने बिहने अरजी फरजी के का कहने कबों बिचार बनावल जाई पन्द्रह अगस्त मनावल जाई।   अरखे के कुल भाव-कुभाव केकर केकर देखब सुभाव सब गुड़ गोबर गावल जाई पन्द्रह अगस्त मनावल जाई।   मरे जवान भा मरे किसान माथे जरिको न पड़े निसान निकहे ढ़ोल बजावल जाई पन्द्रह अगस्त मनावल जाई।   बेरोजगार चरम…

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सुनली ह ! आज 15 अगस्त हौ

तिरंगा के कहनी में बा जोश इहवाँ कहाँ बाचल बाटे होश चोरवे खोजत बाड़े सन चोर गली-कूचा में चालू गस्त हौ। सुनली ह ! आज 15 अगस्त हौ॥   बिला रहल बाटे जवान-किसान नीक के बाटे, सभै परेशान माजा लूटल कुछ लोगिन के बा बाकि त इहवाँ, सबही त्रस्त हौ। सुनली ह ! आज 15 अगस्त हौ॥   आपुस मे कतना बाटे राड़ कतौ सूखा बाटे कतौ बाढ़ इहाँ के मनई क दशा दिशा का दिल्ली में भइया सभै मस्त हौ। सुनली ह ! आज 15 अगस्त हौ॥   गोरका…

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चलीं बात करे के

का जमाना आ गयो भाया,बात करे के परिपाटी फेर से उपरिया रहल बा। बुझाता मौसम आ गइल बा,मोल-भाव करे के बा, त बतकही करहीं के परी। बिना बतकही के बात बनियो ना सकत। ई चिजुइए अइसन ह कि एकरे बने-बिगरे के खेला चलत रहेला। बात बन गइल होखे भा बात बिगर गइल होखे, दुनहूँ हाल मे बात के बात मे बात आइये जाले। हम कहनी ह कि एह घरी मौसमों आ गइल बा,बाकि इहाँ त बेमौसमों के लोग-बाग मन के बात करे मे ना पिछुआलें। जब बात उपरा गइल बा…

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केहू खातिर बैंगन पथ्य आ केहू खातिर बैरी

का जमाना आ गयो भाया,फुलौरा के नावों लोग भुला गइल। शहरन मे ओकर कुछ दोसरे नाँव राख़ लेले बा लोग। के जानी दही बड़ा बोले लागल बा लोग। आगु बढ़ला के फेर मे कई बेर जान बूझ बुरबकाह बनेला लोग। एह सगरी बातन के पाछे अगुवा बने के सपना होखेला। बाकि कहाउत त जस के तास बा, अजुवो ढेर लोग बेमतलबो के आपन मुँह सुजा के फुलौरा अस कइले रहेला। ई कवानों जरूरी नइखे कि मुँह फुलौरा अस बनावे के पाछे बाउरे बाति होखों, ढेर हाली लोग नीमनो बाति हो…

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आईं, गुलरी के फूल देखीं नु….?

ढेर चहकत रहने ह  कि रामराज आई , हर ओरी खुसिए लहराई । आपन राज होखी , धरम करम के बढ़न्ती होई , सभे चैन से कमाई-खाई । केहू कहीं ना जहर खाई भा फंसरी लगाके मुई । केहू कबों भूखले पेट सुतत ना भेंटाई । कुल्हि हाथन के काम मिली , सड़की के किनारे फुटपाथो पर केहू सुतल ना भेंटाई , मने सभके मुंडी पर छाजन । दुवरे मचिया पर बइठल सोचत-सोचत कब आँख लाग गइल, पते ना चलल ।  “कहाँ बानी जी” के पाछे से करकस आवाज आइल,…

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अब चरचा होई

तहरा के लागल काहें मरिचा अब चरचा होई। रयन से बाड़s फरीछा-फरीछा अब चरचा होई।   माकत रहला बथता कपरवा लागल बुझाता हर के फरवा तरहत्थी में लउकेला खरचा अब चरचा होई।   जतने अरजी ओतने फरजी चोरी कई  तू बनला दरजी बतिया थोपलकी लागे बरछा अब चरचा होई।   मेढकी कुदान अवते चुनउवा बोकरि आपन गिरवला भउवा लगता अब फाटी जाई परचा अब चरचा होई।     जयशंकर प्रसाद द्विवेदी

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आपन बात

भोजपुरी भाषा के लेके राह बनावल आ ओह राहि पर चलल दूनों दुरूह कारज बाटे। ओहू मे जब समय के मार पड़े लागे त कबों-कबों साँसो लीहल कठिन हो जाला। कुछ अइसने भोजपुरी साहित्य सरिता परिवार के रीढ़ डॉ सुमन सिंह के संगे ई नवका बरीस लेके आइल। सुमन जी के हमराही श्री राजीव सिंह जी के असामयिक निधन पूरे परिवार के मानसिक विचलन मे लिया के खाड़ कS देलस। लेखनी चले से मना कर रहल बिया,बुझता सियहिये सुखा गइल बा। आवाज भर-भरा रहल बा,गला भरल रहत बा। आँखि के…

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मार देहला रजऊ

हिन्दी के कइला बेड़ा पार हो, भोजपुरिया के मार देहला रजऊ || मार देहला रजऊ हो मार देहला रजऊ, भोजपुरिया के मार देहला रजऊ ||   दिन दिन बढे अनुसूचिया से दुरिया ओही से घरवा में तलफे भोजपुरिया इज्जत भइल मोर उघार हो भोजपुरिया के मार देहला रजऊ।|   अटकन चटकन बहुत देखवला वादा के असरा दे खुबे भरमवला अब देवे के परी अधिकार हो भोजपुरिया के मार देहला रजऊ।|   होखे उजियार चलीं दियना जराई नेहिया के लेप से मनवा मिलाई मेटि जाई मन के अन्हार हो भोजपुरिया के…

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