भोजपुरी: संवेदना, संघर्ष अउर समता के भासा

भोजपुरी के नाम आवते आजु ढेर लोगन के मन में पहिल छवि “लोकप्रिय गीतन” के उभरेला  ऊ मंच, मेला, सिनेमा अउर डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बाजत चटर पटर गीत के, बाकिर ई हमरा समझ से अधूरा सच्चाई ह। भोजपुरी के असली माने, ओकर आत्मा, ओकर सांस्कृतिक गहिराई अउर मानवीय संवेदना के विस्तार एह सतही छवि से कहीं जादे व्यापक बा। भोजपुरी ना त खाली “मौसमी” गीतन के भासा ह, न खाली मनोरंजन के साधन; ई संघर्ष, करुणा, त्याग, समर्पण, श्रम, वियोग अउर मुक्ति के जियत-जागत सांस्कृतिक दस्तावेज ह। त्याग अउर समर्पण…

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‘चौधरी कन्हैया प्रसाद स्मृति सृजन सम्मान से दुगो भोजपुरी साहित्यकार सम्मानित भइलें

विश्व पुस्तक मेला के अंतिम दिने सर्व भाषा ट्रस्ट के स्टाल पर चौधरी कन्हैया प्रसाद सिंह स्मृति न्यास आरा आ सर्व भाषा ट्रस्ट का ओर से भोजपुरी साहित्य के संरक्षण-संवर्धन आ सृजन खातिर वर्ष 2025 का डॉ संतोष पटेल आ वर्ष 2026 का श्री जयशंकर प्रसाद द्विवेदी के ‘चौधरी कन्हैया प्रसाद स्मृति सृजन सम्मान’ से राष्ट्रीय पुस्तक न्यास के संपादक श्री लालित्य ललित के हाथों सम्मानित कइल गइल।

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भोजपुरी भाषा के मानकीकरण’, ‘ओकर शब्दन के एकरूपता’

‘भोजपुरी भाषा के प्रमाणिक रूप’, ‘भोजपुरी भाषा के एकरंगी रूप’, भोजपुरी भाषा के मानकीकरण के आवश्यकता’ जइसन विषय पर समय समय पर विद्वावनन के विचार आइल। भोजपुरी के मानक रूप के तैयार करे के प्रयास लगातार चल रहल बा। कहे के ना होई कि भोजपुरी साहित्य के सृजन सिद्व आ नाथ पंथ, कबीर पंथी, भगताही आ सरभंग सम्प्रदाय के संत भक्त कवियन के ‘बानी’ से शुरू भइल। बाकिर साहित्यिक रूप में भोजपुरी भाषा के निर्माण पिछला 100 साल से हो रहल बा। जब भोजपुरी साहित्य के निर्माण शुरू भइल तब…

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