मनोहर दूनों हाथ जोड़ के भगवान से कहलें ” प्रभु हमरा के एगो बड़हन मकान दिहीं ताकि हम रउरा खातिर अलग से पूजा घर बना के राउर पूजा कर सकीं। ” ” हम तहार ई काम नइखीं कर सकत ” भगवान कहलें । ” काहे प्रभु ” मनोहर अचकचा के पूछलें । ” अभी तूं त हमरा के हरदम अपना आँखि के सोझा राखे लऽ । भोरे,सांझ के हमार पूजा करेलऽ । हमरा आगा माथ नवावे ल ।हम जे तहरा बड़हन मकान दे देबि त तूं खाली भोर आ सांझ…
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