भोजपुरी साहित्य के काल विभाजन

कवनो भाषा के परिचय के मतलब होला ओकरा उत्पत्ति से लेके वर्तमान तक के क्रम बद्ध गतिविधि के विस्तार पूर्वक जानल भा जानकारी प्राप्त कइल। भोजपुरी हिन्द आर्यन  भाषा परिवार के एगो सशक्त भाषा ह,जवना के उत्पत्ति मागधी,प्राकृत आ ओकरा अपभ्रंश से भइल मानल जाला। आजु भोजपुरी के सर्वमान्य लिपि देवनागरी लिपि बा।

पहिले से शुरू कके आज ले गौरवशाली भोजपुरियन के चित्त, चिंतन ,चेतना में हो रहल परिवर्तन , परिमार्जन के साथे-साथे भोजपुरी साहित्य में समसामयिक बदलाव के दस्तावेजीकरण  के भोजपुरी साहित्य के इतिहास कहल जा सकेला ।

साहित्य के काल विभाजन कर्ता, कृति ,विषय, रस, स्थान, शासक, प्रवृत्ति के आधार पर होला।भोजपुरी साहित्य के सांगोपांग अध्ययन आ विवेचन खातिर काल विभाजन के आवश्यकता महसूस कइल गइल। एह पर कई विद्वान लोग काम कइलें। एह दिशाई एगो महत्वपूर्ण प्रयास डॉ उदय नारायण तिवारी जी के शोध ग्रंथ ‘भोजपुरी भाषा और साहित्य’ के रूप में सोझा आइल।  भोजपुरी साहित्य के इतिहास  कई  विद्वान लोग लिखले बा आ सभे अपना-अपना हिसाब से  काल विभाजन पर आपन विचार रखले बा। हाल के बरिसन में भोजपुरी साहित्य के इतिहास पर केन्द्रित जवन कुछ पुस्तक आइल बाड़ी सन, ओहनी के आधार पर काल विभाजन के समुझे के एगो परायास का रूप में एह आलेख के देखल जा सकेला।

डॉ अर्जुन तिवारी के पुस्तक ‘भोजपुरी साहित्य के इतिहास’ प्रकाशन वर्ष -2014, डॉ ब्रज भूषण मिश्र के पुस्तक ‘भोजपुरी कविता के इतिहास’ प्रकाशन वर्ष -2024 आ आचार्य शुभ नारायण सिंह ‘शुभ’ जी के पुस्तक ‘आधुनिक भोजपुरी साहित्य के इतिहास’ प्रकाशन वर्ष -2026 के ध्यान में राखत  कुछ तथ्य स्पष्ट करे के एगो प्रयास भर बा।

काल विभाजन :

डॉ अर्जुन तिवारी, डॉ ब्रज भूषण मिश्र आ आचार्य शुभनारायन सिंह ‘शुभ’ , ई तीनों इतिहासकार लो अपने पुस्तक में काल विभाजन के शुरुवात करे खातिर डॉ कृष्ण देव उपाध्याय जी के अध्ययन आ विभाजन के आधार मानत आगु बढ़त देखात बाड़े। डॉ कृष्ण देव उपाध्याय जी वर्णन के सुविधा खातिर  एह साहित्य के इतिहास के पाँच भाग में विभाजित कइले बानी-

1 सिद्ध साहित्य

2 नाथ साहित्य

3 संत साहित्य

4 लोक साहित्य

5 आधुनिक साहित्य

          श्री दुर्गा शंकर सिंह लिखित ‘भोजपुरी के कवि और काव्य’ ग्रंथ प्रकाशन वर्ष-1950 में नामकरण आ काल विभाजन एह अनुसार बा-

1  प्रारम्भिक अविकसित काल (सिद्ध काल)             : सन् 700- 1100 ई0 तक

2 आदि काल(ज्ञान प्रचार काल –वीरकाल)  : सन् 1100- 1325 ई0 तक

3 पूर्व मध्य काल (भक्ति काल) : सन् 1325 – 1650 ई0 तक

4 उत्तर मध्य काल(रीति काल) : सन् 1650- 1900 ई0 तक

5 आधुनिक काल (राष्ट्रीय काल और विकास काल) : सन् 1900-1950 ई0 तक

 

डॉ रिपुसूदन श्रीवास्तव जी का अनुसार –

1  आदिकाल (सिद्ध काल)           : सन् 700- 1200 ई0 तक

2 गाथा काल  : सन् 1200- 1325 ई0 तक

3 आध्यात्मिक काल : सन् 1325 – 1900 ई0 तक

4 देशभक्ति काल : सन् 1900- 1950 ई0 तक

5 आधुनिक काल  : सन् 1950 – 1975 ई0 तक

डॉ अर्जुन तिवारी जी के एह काल विभाजन में वैज्ञानिकता के अभाव मानत आपत्ति दर्ज करत बानी ।

 

रास बिहारी पाण्डेय सन् 1986 ई0 में अपने ग्रंथ ‘भोजपुरी भाषा का इतिहास में जवन काल विभाजन आ नामकरण कइले बानी,ऊ एह प्रकार से बा-

1  आरंभिक काल            : सन् 700- 1100 ई0 तक

2 चारण काल  : सन् 1100- 1400 ई0 तक

3 संत काल : सन् 1400 – 1800 ई0 तक

4 अध्ययन काल : सन् 1800- 1900 ई0 तक

5 वर्तमान  काल  : सन् 1900 ई0  से अब तक( 1986 ई0)

एहु काल विभाजन पर डॉ अर्जुन तिवारी जी असहमत  बानी । एह दिसाई उहाँ के आपन तर्क रखले बानी ।

भोजपुरी सम्मेलन पत्रिका (मई 1994) में डॉ रामशीष  प्रसाद भोजपुरी साहित्य के काल विभाजन पर आपन विचार रखले बानी । उहाँ के अनुसार –

1  आरंभ काल(सिद्ध नाथ काल ): सन् 800- 1100 ई0 तक

2 आदि काल (गाथा काल )  : सन् 1100- 1400 ई0 तक

3 मध्य काल (संत काल ): सन् 1400 – 1900 ई0 तक

4 आधुनिक काल :

राष्ट्रीय सामाजिक जागरण काल :सन् 1900- 1947 ई0 तक

विकास काल : सन् 1947 ई0 से अब तक

हवलदार त्रिपाठी ‘सहृदय’ 2002 ई0 में प्रकाशित अपने पुस्तक ‘भोजपुरी भाषा का इतिहास’ में काल विभाजन आ नामकरण अइसे कइले बानी-

1  शुरुवात काल (नाथ साहित्य)     : सन् 750- 1050 ई0 तक

2 पवारा काल  : सन् 1051- 1350 ई0 तक

3 कबीर काल : सन् 1351 – 1650 ई0 तक

4 भक्ति काल : सन् 1651- 1850 ई0 तक

5 आजादी के पहिले तक के काल  : सन् 1851 – 1946 ई0 तक

6  आधुनिक काल : सन् 1947 ई0 से आजु तक (2002)

 

डॉ अर्जुन तिवारी जी भोजपुरी क्षेत्र के प्रकृति का अनुसार नामकरण आ विभाजन कइले बानी । इहाँ के इतिहास के वृहत इतिहास मानल जाला ।

शुरुवात : पहिला डेग   ( बोआइल    (700-1100ई0 तक )

दूसरा डेग     (रोपाइल (1100 – 1400ई0 तक )

 

बिचिला : पहिला डेग       (निरावल            (1400 -1757 ई 0 तक )

दूसरा डेग     (गदराइल           (1758 – 1974ई 0 तक )

आजु काल्ह :                                          ( 1975 ई0 से ——–)

एकरे के परिमार्जित करत उहाँ के कहले बानी –

प्रवर्तन काल (सिद्ध तथा नाथ काल )           (700-1100ई0 तक )

लोक गाथा काल                                                 (1100 – 1400ई0 तक )

प्रबोधन काल (संत समागम काल )             (1400 -1757 ई 0 तक )

नवजागरण काल                                                  (1758 – 1974ई 0 तक )

प्रसार काल                                                                     ( 1975 ई0 से ——–)

डॉ ब्रज भूषण मिश्र जी अपने पुस्तक ‘भोजपुरी कविता के इतिहास’ प्रकाशन वर्ष -2024 में काल विभाजन आ नामकरण एह रूप में देले बानी-

1 सिद्ध आ नाथ काल                   : 700 ई0 से 1100 ई0 तक

2 लोक गाथा-लोक गीत काल       : 1100 ई0 से 1400 ई0 तक

3 आध्यात्मिक काल                    : 1401 ई0  से 1900 ई0 तक

4 देशभक्ति काल                         : 1901 ई0 से 1947 ई0 तक

5 रचनात्मक आंदोलन काल भा भाषायी जागरण काल – 1948ई0 से 1977 ई0 तक

6  विकास काल – 1978 ई0 से 2000 ई0 तक

7 समकालीन काल भा विस्तार काल : 2001 ई0 से अब तक

 

आचार्य शुभनारायन सिंह ‘शुभ’ जी के पुस्तक ‘आधुनिक भोजपुरी साहित्य के इतिहास’ प्रकाशन वर्ष -2026 में काल विभाजन आ नामकरण डॉ जौहर शाफियाबादी आ राजेश्वरी शांडिल्य जी के नामकरण आ विभाजन के आधार मानत काल विभाजन आ नामकरण कइले बानी।

आदिकाल                      :           (600 ई0 से 1800 ई0 तक)

मध्यकाल                       :           (1800 ई0 से 1946 ई0 तक )

आधुनिक काल   :           (1947 ई0 से आद्यावधि )

 

  • जयशंकर प्रसाद द्विवेदी

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