ग़ज़ल

चलीं जी आजु में एक बे फेर से जिअल जाव।
मिलल बा जवने जिनिगी मज़ा खुब लिहल जाव।

मिली का दोसरा से आपन दुख दरद बता के,
दरद के जाम बना के आईं घट घट पिअल जाव।

बेयार ओरिये बहि के लय में लय मिला लीं जा,
उल्टा चलि के सभका से मत दुशमनी लिहल जाव।

दोसरा के फाटला फुटला से हमनीं के का मतबल
जुगाड़ क के आपन फाटल कसहुँ सिअल जाव।

मुड़ी ममोरि के चाहे शरम के खोरि के धरीं,
दान पुन क के हँसी खुशी लोग से फेरु मिलल जाव।

  • विमल कुमार
    जमुआँव भोजपुर बिहार

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