नेता जी के भाषण

शुरू बाटे एलेक्शन के एक्शन, चारु ओर गुलजार हो गइल बा । केहू के नेता जी लगतानि जीजा, केहू नेता जी के सार हो गईल बा शुरू बाटे एलेक्शन के एक्शन, चारु ओर गुलजार हो गइल बा । नेता जी दे तानी ई भाषण – हमार होखे दी एक बार शाषण, हरदम चलत रही लात- जूता सुनब की सदन में मार हो गइल बा शुरू बाटे एलेक्शन के एक्शन, चारु ओर गुलजार हो गइल बा । हम जितब गरीबी मिटाएब हमहू लुटेब ,रउरो से लुटवाएब जिअत बच गइनी तब रउवा…

Read More

जिन्दगी के सहेली- पहेली भइल

जिन्दगी के सहेली- पहेली भइल , नीब से भी कसोतर करेली भइल l जे बुराई में बूड़ल उहे सांच बा , उनके जिम्मा सियासत हवेली भइल l जे बा जाहिल ऊहे आज सरदार बा , बोली उनकर त चम्पा चमेली भइलl अब कहाँ जाके ईमान जोखबि सभे, जोखे वाली ही चम्पत झरेली भईल l खोजअ् ‘सोनी’ झुमक तू नयन मुंदि केे , सब इंहें बा ना कुछुओ बरेली गइल l @सोनी सुगंधा

Read More

शहरी मॉडल

नयी नवेली आइल बानी , सगरो साध पुरइबे करब, ना होई फरमाइस पूरा डंडा रोज गीरइबे करब। पढ़ल-लिखल हम त बानी अँग्रेजी बतीयइबे करब, हप्ता भर में तीन सीनेमा ना देखब कोहनइबे करब ।। साड़ी-सूट कबो ना पहीनब जीन्स पाइंट पहीनब करब अँग्रेजी के सी०डी० कैसेट घर में रोज बजइबे करब ।। गाल पे पाउडर, होठ में लाली, रोज-रोज लगइबे करब, शहर के ब्यूटी पार्लर में बॉब हेयर कटवइबे करब।। सास के कुछउ बुझब ना ससुर से खाना बनवइबे करब जहीया ऊँ कुछु कहीहे  त?? उठाइ बेलना हम पीटबे करब।।…

Read More

शक्ति स्वरूपा

घर के मान मर्यादा के, ख्याल राखेली नारी। शक्ति स्वरूपा हई जेके, जग अबला कहे नारी।   उनुका चलते हम सभ बानी, उ हमनीन से नइखी। जइसन समझत बानी जा, शायद उ ओइसन नइखी।   माँ के फरज निभावस, ममता लुटावस नारी। कदर करs तू ओकर, ओके कबो ना दिहs गारी।   दुर्गा चंडी काली के, एगो रूप हई हो नारी। बिगड़ जइहें त प्रलय होई, असहाय ना हई नारी।   बहिन बनके बाँहेलि राखि, स्त्री बन के करेली सेवा। निःस्वार्थ भाव से करेली सभ कुछ, कबो माँगेली ना खेवा।…

Read More

संत रविदास जयंती

माघ महीना रहे ,पूर्णिमा के दिन अइले रैदास एतवरवे के दिन चौदह सौ तैंतींस रहे शुभ उ दिन धन –धन धऱती भइली पाके नामचीन  माघ महीना रहे….. जात–पात ,भेद-भाव से रहले उ दूर  कल्याण करे से उ भइले मशहूर  समय से करस काम ,खातिर होखे खूब कबीर के गुरू बना के,कइले अजब खूब कठौती में गंगा ,ले अइले  एक दिन माघ  महीना रहे………. मीरा बाई देत रहली , गुरू के जइसन मान धीरे-धीरे बढल उनकर, दुनिया मेम सम्मान लाल बिहारी लाल केतना करस अब  बखान दिलीप कुशवाहा नीत-नीत  आवेले उ गान माघ महीना रहे……. -लाल बिहारी लाल,…

Read More

खुल के अब रणभेरी बजाईं

झूठिया के जनि दुखड़ा गाईं खुल के अब रणभेरी बजाईं॥ ढेर भइल मान-मनउवल बेबात के गला मिलउवल बेहया के औकात बताईं। खुल के अब रणभेरी बजाईं॥ विषधरवन के घर में सेवता बात न मानी लात क देवता काट के सिर सौगात पठाईं। खुल के अब रणभेरी बजाईं॥ आहुति मे चढ़ गइल जवानी दबा के मारीं पिया के पानी अब जरिको मति समय गवाईं। खुल के अब रणभेरी बजाईं॥ बाउर बोले, ओके ठोकीं सेना के जनि रसता रोकीं दुसमन के बस चिता सजाईं। खुल के अब रणभेरी बजाईं॥ जयशंकर प्रसाद द्विवेदी

Read More

केहू आइल बा

अपना गाँव में कतहीं आवाज फेरु आइल बा, लागे तिरंगा में लपेटाइल खास केहू आइल बा। हलफा उठल बा राहि में सभे धावल काहे ओने, कहल अचके में ई केहू देख ना वीर आइल बा। केहू के राखी केहू के आस काहे रोज अइसे आवता, केहू के मांगि के सेनुर लागता फेरु पोंछाइल बा। लड़त देश के खातीर लगवले जान के बाजी, भरि ताबुत सेना साथ में केहू के लाल आइल बा। लगवले दाव प जीनिगी चल चलिके त देंखीं, सिसकत अंखियां के लोर से राय बिदाई दिआइल बा।  देवेंद्र…

Read More

दूध के करजा

भारत माई के हम बेटा हईं हम आपन संगीन पजाइब, दुश्मन के छाती प चढि़के हम लाहौर तक चढि़ जाइब। अहो भाग्य होई उ दिन जहिया तिरंगा में लपेटाइब, एक एक बूंद करज दूध के माई रे हम चुकाइब। देखिह माई रोइह मत बेटा तोहार अमर बा, माथा चुमिके तिलक लगा द अबकी बे भीषण समर बा। आर पार अबकी बे होइ बाकी तिरंगा झुकि ना पाइ, दीह आशीष अइसन कि कवनों दुश्मन बचि ना पाइ। लाहौर करांची रावलपिंडी बनिके रही अब रेगिस्तान, दिल्ली से सेना चलल बा सावधान हो…

Read More

उपवन में भौरा

गीत गजल तोहै देखी मन हमार गावता, पीछे पीछे तहरी ई खिंचल चली आवता।   कइसन जादू कइलस लेले बाटे घेर, रहि रहि भीतरी ले टेसे उदबेगे बेर बेर माने ना करि मनउती कुछो ना भावता… पीछे पीछे तहरी ई खिंचल चली आवता।   होखे वाला का बा नियति के मंजूर, आपन पराया सभे होई जाला दूर आकर्षण बा एतना की नियरे बोलावता… पीछे पीछे तहरी ई खिंचल चली आवता।   उपवन में भौरा बिचरे फूलन के रस लेबेला, केहू वंचित नइखे जेके शिक्षा ई ना देबेला ताल धुन देई…

Read More

काँहे ना केहू के सुनेल

काँहे ना केहू के सुनेल खाली अपने बतियाँ धुनेल, निमनो केहूँ कुछ कहे त आपन कान तू मुनेल मनमानी कहिया ले चली तू बुझत नइख बाति के, कहना एको सुनेल नाही बाड़ देवता तू लाती के खुरचाली करेल निशदिन रहेल ना चैन से, हरवाई में बैल प गिरे लागे ओसही सुधरब पएन से धीर धर तनि धीर धर रह कायदा कानून में, बुझतानी जवान तू बाड़ तोहरा गरमी बाटे खून में तनिको तोहरा शरम ना बाटे लज्जियाँ घोर के पियल हो, आज ले जवन ना भइल रहे ऊ सगरो उठा…

Read More