बड़ा-बड़ा फेरा बा

बड़ा-बड़ा फेरा बा भारी झमेला बा तिलक त लेबे के मन नइखे समधी जी दहेज के पेंच लगावे के सरधा एकदम नइखे समधी जी बाकी हई ……. नाच ह बाजा ह खजुली ह खाजा ह साज ह समैना ह बीजे ह बैना ह गांव ह जवार ह गोतिया देयाद ह हीत ह हीतारथ ह सभके सवारथ ह हरिस ह कलसा ह गउरी गनेसा ह पुजा ह पतरा ह देवतन के असरा ह गहना ह गुरिया ह पवनी पनहरिया ह सूट ह साड़ी ह डोली ह गाड़ी ह कोकड़वर ह बुकवा…

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हिन्दी कै

सुर-ताल आ चाल बदल के ठाँव बतावें हिन्दी कै॥ सत्तर सांतर बत्तीस बेंवत भाव बतावें हिन्दी कै ॥   जे जे जान लगवलस एहमे सभके मान जगवलस एहमे ओकरै छाती दाल दरै के दाँव बतावें हिन्दी कै ॥   सबके माल मलाई आपन मीटिंग सिटिंग संगे ज्ञापन लोक राग भाषा बोली कै नाँव बतावें हिन्दी कै ॥   बूढ़-पुरनियन के करनी पर चाटन-बाटन सब चरनी पर भूसा संगे खरी सउन के गाँव बतावें हिन्दी कै ॥   पीयत घीव ओढ़िके चदरी बेमौसम हौ फाटल बदरी बनिहें भाफ करम कै पानी…

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मुसवा चालल सगरी भीत

कंकर जोरि घरौना पारल। नीसन धरन छान्ह सहियारल। तुंग अटारी चढ़ि के मनुआँ,  गावे मनसल गीत। मुसवा चालत रहलसि भीत। सघन गिलावा भरक रहल अब। ईंटा के सन्ह दरक रहल सब। भर घर छितरावल मुसकइला, लेंड़ी परल पछीत। मुसवा खोंखड़ कइलसि भीत। ऊपर से गवदी अस लागस तरे निछोही घावे दागस अनकर अन पऽ डीठ गड़ावल इनिके इहई रीत। मुसवा चालत गइलसि भीत। बीअर कइलसि कोने-सानी। कतिना केहू डाली पानी? हूरत-मूनत बुद्धि हिरानी। कइलसि हदे अनीत, मुसवा चालल टटको भीत। मूँड़ सूँढ़ गनगौर अकारथ। थोथवे कुतुर रहल परमारथ। घर-घरवैयो, सुटुक…

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एगो चिरैयाँ

एगो चिरैयाँ कतिना उचैंयाँ उड़ि गैल रे अङ्गना ओसरवा मुँडेरवा सूने बखरी के जोगछेम अब कौनि गूने झिलमिल अँखियाँ सोनल पँखियाँ टूटि गैल रे बदइल दुनिया के गजबे आवाजे फूटति किरिनिया के सुर कौनि साजे निठुर अहेरिया लागलि डिठरिया परा गैल रे #सुखमा-सुराज# दिनेश पाण्डेय

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घोघो रानी , कतना पानी ?

  घोघो रानी , कतना पानी ?बबुआ अब तs डूबत बानी । डूब गइल बाटे धनखेती ।पानी दिहलस गरदन रेती ।गाछ – बिरिछिया डूब गइल बा , चारु ओरिया पानी-पानी । बबुआ अब ….. डूबल अगुवारा – पिछुवारा ।धुसले बा पानी के धारा ।पानी-पानी कर देले बा , छप्पर के छुअले बा पानी । बबुआ अब …. लागत बा जिनिगी ना बॉची ।पानी पर कबले ई नाची ।भुखे-पिआसे कबले जीहीं ,कबले जोहीं दाना-पानी । बबुआ अब …. आसमान उड़त चिल्हगाड़ी ।झॉकत बाड़ें पारा-पारी ।खलिहा मदद मिलल भरोसा ,झॉक-झुँक लवटे रजधानी । बबुआ…

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ग़ज़ल

चलीं जी आजु में एक बे फेर से जिअल जाव। मिलल बा जवने जिनिगी मज़ा खुब लिहल जाव। मिली का दोसरा से आपन दुख दरद बता के, दरद के जाम बना के आईं घट घट पिअल जाव। बेयार ओरिये बहि के लय में लय मिला लीं जा, उल्टा चलि के सभका से मत दुशमनी लिहल जाव। दोसरा के फाटला फुटला से हमनीं के का मतबल जुगाड़ क के आपन फाटल कसहुँ सिअल जाव। मुड़ी ममोरि के चाहे शरम के खोरि के धरीं, दान पुन क के हँसी खुशी लोग से…

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हमहूं लूटीं तेहू लूट

हमहूं लूटीं तेहू लूट। दूनो पहिने मंहग सूट। उपर वाले के भी खियाव। अपने पीअ आ उनके पियाव। अईसे जो कईले जईब त रिश्ता हरदम रही अटूट। हमहूं लूटीं तेहू लूट। अंगरेजन के हवे सिखावल। आ हमनी के ई अपनावल। शासन अगर करे के बा त जनता मे डरले जा फूट। हमहूं लूटीं तेहू लूट। अगर करे केहू कंप्लेन। साहब के द तू सैम्पेन। उनसे मिल-जुल मौज उड़ाव साथे उनके ल दूई घूंट। हमहूं लूटीं तेहू लूट। आदिकाल से चली आईल बा। केहू न येसे बच पाईल बा। केहू के…

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साँवरी गधबेर

उखम थोरिक, हवा गुमसुम, साँवरी गधबेर। ओरमाइल घन बदरवा, गइल हऽ मुँहफेर। अबहिएँ कुछ देर। पलक पर पानी न छलकल, ना सिराइल ह अगन। देहि के तिसना अतिरपित, का कहीं कतिना तपन? चारि फूही के उमेदे, नयन तरई हेर। साध रहि गइलसि अपूरन, सघन भइल अन्हेर। नीनि रहलसि घेर। साँस में चम्पा कटेरी, गंध के गहिरी चुभन। मन-मिरिग तिरते रहल हऽ आँखि में अनगिन सपन। ओठ तरुआ हलक सूखल, जीभ अधरनि फेर। अकसगंगा धार पातर, निरभ राति उबेर- खेल रहलि अहेर। डाढ़ि में अँखुवा न फूटल, पात पर ना फुरफुरी।…

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अउर तिवारी का हाल हौ ?

बहुत दिना के बाद देखअइलअ , एकदम से दूबराय गयअ , अब का करअ धरअ अइलअ तू  धरम-करम जब खाय गयअ जब बीमार रहलीन माई तब कउनो खबर न लेवै अइलअ गुजर गएन जब माई-बाउ , तब के के का देवै अइलअ गाँव देखकर के का करबअ उहै ऊँच हौ ,उहै खाल हौ || होतअ बँटवारा भग गइलअ सब कुछ बेच-बाच के आपन तीउराइन क सपना टूटल टूटल माई-बाउ क मन बेटवा जब पलने में रहल , तब आवारागर्दी सुझलेस , बाबू कइसे घर चलईलेन केहु नाही गरीबी बुझलेस कइसे…

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बिछावे जाल मछेरा रे

बिछावे जाल मछेरा रे सभके छीने बसेरा रे कहे हम भाग्य विधाता ह ईं सभ के जीवन दाता ह ईं सरग में सभका के पहुँचाइब हमहीं भारत माता ह ईं बढ़ावे रोज अंधेरा रे चकमक चकमक सगरो करे जोति नयन के चुपके हरे देखावे सपना रोज नया ई पेट सँघतियन के ई भरे भगावे दूर सबेरा रे कैद में सुरुज अउरी चान करे के बा ओकर अभियान बजावे ढोल ढमाका खूब नाप देलस धरती असमान उगावे खूब लमेरा रे करीं का कांटक सोचे रोज करेलन हथियारन के खोज बाँची मीन…

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