एह लोकतंत्र में सब बा जायज

हिंसा-नफरत के बोली जायज बम-बारूद अ गोली जायज बे मौसम के होली जायज एह लोकतंत्र में सब बा जायज!   आक्सीजन के चोरी जायज बेईमानी-घुसखोरी जायज बयपारिन के जमाखोरी जायज एह लोकतंत्र में सब बा जायज!   बिन अपराध के जेल जायज मीडिया के घिन खेल जायज चोर अ पुलिस के मेल जायज एह लोकतंत्र में सब बा जायज!   राजा एकदम बहरा जायज चेहरे पे कई चेहरा जायज बिन दुलहा के सेहरा जायज एह लोकतंत्र में सब बा जायज!   महंग छिच्छा-पढ़ाई जायज महंगी भइल दवाई जायज साहेब के…

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मुखिया जी

छाया हव चमचन क,राउर कपार पर बस देत रहा पईसा नरेगा दबाय के, लूटा पंचईती,न चूका,सुराज हव फिर मुखिया जी,साधा निशाना लहाय के।   खद्दर पर दाग,कउनो चिंता क बात नाही पोखरी नीलाम करा,चुपके चुपाय के, गंवई खड़ंजा हो,भलहीं से उंच खाल अपने दुआरी क,रखिहा बनाय के।   लूटा पंचईती,न चुका,सूरज हव फिर मुखिया जी,साधा निशाना लहाय के।   चिन्ह चिन्ह दिहा,अवास खास खास के मिली कमीशन,हो भीतरैं नदाय के, चाटुकार ओहु में,खोज लिहा मन जोग भोग जे दुआरे,लगावत होइ आय के।   लूटा पंचईती,न चूका,सुराज हव फिर मुखिया जी,साधा…

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ओरचन

दुआरी पर किनारे देवाल से सटा के खड़ा कइल बा एगो खटिया, ओकर हालत बड़ा डाँवाडोल बा ओकरा बिचवा में बड़ा झोल बा केहू के तरे सुतत होई बुझाते नइखे बाकिर ओरचन कसाइल बा ओरचन में दस गो गाँठ बा आ दोसरा ओर अइसन बिछवना बा जइसे राजा के ठाट बा। सबके माई-बाप इहे चाहेला कि आपन जामल दूध के कुल्ला करे अमृत के धार पिये भले माई-बाप जिनगी भर लुगरिये सीए। ओही दुआरी पर ना अनगिनत दुआरी पर खटिया खाड़ बा ओह संतानन खातिर माई-बाप के ढोवल पहाड़ बा।…

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आजकल बिआह में…

शादी बिआह में देखऽ  आजकल बस होखऽता  शोबाजी । आशीष देबे माई बाबू ,चाहें होखे न राज़ी ।   दुल्हा दुल्हिन गुण ना दिल मिलऽल पतरा के देखाई ? दूर आँख से पानी लाज बस देबे के बा बधाई ।   पूछा पाछी आ निमन्त्रण सभे वाटसैप से जाता। बिआह के नेग चार ,रसम सगरो अब  बिलाइल  जाता।   किसिम किसिम के खाना अउर सजावट के  देखावा बा। पात के भोज ,पुड़ी  , बुनिया, खाजा ,कसार , हेरात बा।   घर फ्लैट में समाईल टीना में माढ़ो तइयार बा। भुलाइल…

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हे चच्चा चुपचाप रहा

हे चच्चा  चुपचाप रहा बहुत किहा मनमानी में, अबकी बेरिया तोहार भतीजा, खड़ा होई परधानी में।   चौराहे पे कम जाल करा, दोहरा गुटखा कम खाल करा, भरि -भरि गाल फुलैले बाट्या पहिले ऐके साफ करा। हम्मै हरदम हुरपेटै ला चाची से कहब दलानी में, हे चच्चा चुपचाप रहा बहुत किहा  मनमानी में।   गांव कै छोटका बड़का सब, सबके सब भैवद्दी बा, नहरी पे सब हमरे संगे खेलले झाबर कबड्डी बा, गांव कै नैकी दुलहिन के भौजी कहिके गोहराईला, आशीष मिली खुब गहबर हमके झुकि _झुकि अंगुरी सोहराईला, गाल…

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जतिए पहिचान बा

जात में जात इहां जतिए प्रधान बा इ ह भारत इहां जतिए पहिचान बा।   जात में जात जइसे केला के पतिया छिलका पियाज के जस मोथा के घसिया जात के मान इहां जतिए अभिमान बा इ ह भारत इहां जतिए पहिचान बा।   पानी के जात इहां मटका के जतिया भात के जात इहां रोटियो के जतिया जात से बड़ा-छोट जतिए भगवान बा इ ह भारत इहां जतिए पहिचान बा।   पीड़ित भयल इहां जतिए से मानव जतिए से मानव कहाइल दनुज-दानव चरित-गुनहीन देखा तबो सम्मान बा इ ह…

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प्रकृति किहाँ बा मेला भारी

प्रकृति कहाँ बा मेला भारी, सभे करे मिलि-जुलि तइयारी। बादर-बदरी खुश हो अइलें, ढोल बजावत गीत सुनइलें, मस्ती में बूनी बरिसइलें, बिजुरी के सँग नाच देखइलें, धरती के हिरदया जुड़ाइल, घर-आँगन होखल फुलवारी। प्रकृति किहाँ बा मेला भारी।। सगरो लउके हरियर-हरियर, रसगर भइलें आहर-पोखर, नदी-नहर नाला उमंग में, गागर-गागर लागे सागर, बीज बोआइल हँसी-खुशी के, हँसल भविष्य के मनगर क्यारी। प्रकृति कहाँ बा मेला भारी।। पर्वत पत्थरदिल ना कहलस, तनिको कम ना ओमें बा रस, प्रेम बढ़ावत भू के छुअलस, हरखित होके सुध-बुध तेजलस, देखसु सूरज-चाँद चिहाके, कहसु हव सचमुच…

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मुखिया के पटीदार

तेल पिला के राखीं लाठी सभ देखी तेल के धार । हम मुखिया के पटीदार।   जीत क पगरी हमरा माथे रक्षक बनि डोलीं हम साथे हूँ-टू होखे कतौ कबों जे सुधरि के उपरे हमरा पाथे। हम बड़का हईं जुझार। हम मुखिया के पटीदार।   बरिस पाँच जे गुन गन गावै बदले मोट मलाई पावै सोझा रखि आपन अपनापा आँखि मुनी के मान बढ़ावै। बस उहवें दिखे बहार। हम मुखिया के पटीदार।   कलेक्टर के पी ए लेखा बनल भौकाल जहाँ क देखा गली मोहल्ले जय-जयकार माथ दिखे ना कउनों…

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पार्टी विथ डिफरेंस

पार्टी विथ डिफरेंस हईं हम होखे जय-जयकार। हो बाबू !हाउस टैक्स उपहार।   तहरे माला हमै बनवलस पार्षद, मेयर आ विधायक । हमही लायक सांसद बानी टैक्स के चलाइब सायक।   चैन से रहि ना पइबा घरे नगर निगम के मार। हो बाबू !हाउस टैक्स उपहार।   पानी बिजुरी कूड़ा पूरा घर-घर हेरवाइब सर्वे कर । टैक्स क सोंटा चली दबा के कंहरे भा जीयें मर मर कर ।   जनता के राहत ना कउनों देखत अँखिया फार। हो बाबू !हाउस टैक्स उपहार।   चमचा फोरें घर-घर के आ बेलचा…

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सवाल आ सपना

सवाल अपना जगे खड़ा रहेला खड़ा रही जे भागेला सवाल से सवाल ओकर पीछा परछाईं जस करेला काहे कि सवाल आपने उपराजन होला सामने बस ठाढ़ करेला कबो केहू त कबो केहू। [2] सवाल से भागे वाला के ना बुझाला कि ऊ जिनिगी से भाग रहल बा आ ढो रहल बा लाश बस अपने जिनिगी के। [3] सवाल दोसरा के पूछे के मौके ना मिले जब कवनों आदिमी अपना बारे में अपने से पूछ लेला सवाल । [4] सवाल कबो ना मरे ऊ पीछा करत जीयल मुहाल कर देला सवाल…

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