ग़ज़ल

चलीं जी आजु में एक बे फेर से जिअल जाव। मिलल बा जवने जिनिगी मज़ा खुब लिहल जाव। मिली का दोसरा से आपन दुख दरद बता के, दरद के जाम बना के आईं घट घट पिअल जाव। बेयार ओरिये बहि के लय में लय मिला लीं जा, उल्टा चलि के सभका से मत दुशमनी लिहल जाव। दोसरा के फाटला फुटला से हमनीं के का मतबल जुगाड़ क के आपन फाटल कसहुँ सिअल जाव। मुड़ी ममोरि के चाहे शरम के खोरि के धरीं, दान पुन क के हँसी खुशी लोग से…

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हमहूं लूटीं तेहू लूट

हमहूं लूटीं तेहू लूट। दूनो पहिने मंहग सूट। उपर वाले के भी खियाव। अपने पीअ आ उनके पियाव। अईसे जो कईले जईब त रिश्ता हरदम रही अटूट। हमहूं लूटीं तेहू लूट। अंगरेजन के हवे सिखावल। आ हमनी के ई अपनावल। शासन अगर करे के बा त जनता मे डरले जा फूट। हमहूं लूटीं तेहू लूट। अगर करे केहू कंप्लेन। साहब के द तू सैम्पेन। उनसे मिल-जुल मौज उड़ाव साथे उनके ल दूई घूंट। हमहूं लूटीं तेहू लूट। आदिकाल से चली आईल बा। केहू न येसे बच पाईल बा। केहू के…

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साँवरी गधबेर

उखम थोरिक, हवा गुमसुम, साँवरी गधबेर। ओरमाइल घन बदरवा, गइल हऽ मुँहफेर। अबहिएँ कुछ देर। पलक पर पानी न छलकल, ना सिराइल ह अगन। देहि के तिसना अतिरपित, का कहीं कतिना तपन? चारि फूही के उमेदे, नयन तरई हेर। साध रहि गइलसि अपूरन, सघन भइल अन्हेर। नीनि रहलसि घेर। साँस में चम्पा कटेरी, गंध के गहिरी चुभन। मन-मिरिग तिरते रहल हऽ आँखि में अनगिन सपन। ओठ तरुआ हलक सूखल, जीभ अधरनि फेर। अकसगंगा धार पातर, निरभ राति उबेर- खेल रहलि अहेर। डाढ़ि में अँखुवा न फूटल, पात पर ना फुरफुरी।…

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अउर तिवारी का हाल हौ ?

बहुत दिना के बाद देखअइलअ , एकदम से दूबराय गयअ , अब का करअ धरअ अइलअ तू  धरम-करम जब खाय गयअ जब बीमार रहलीन माई तब कउनो खबर न लेवै अइलअ गुजर गएन जब माई-बाउ , तब के के का देवै अइलअ गाँव देखकर के का करबअ उहै ऊँच हौ ,उहै खाल हौ || होतअ बँटवारा भग गइलअ सब कुछ बेच-बाच के आपन तीउराइन क सपना टूटल टूटल माई-बाउ क मन बेटवा जब पलने में रहल , तब आवारागर्दी सुझलेस , बाबू कइसे घर चलईलेन केहु नाही गरीबी बुझलेस कइसे…

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बिछावे जाल मछेरा रे

बिछावे जाल मछेरा रे सभके छीने बसेरा रे कहे हम भाग्य विधाता ह ईं सभ के जीवन दाता ह ईं सरग में सभका के पहुँचाइब हमहीं भारत माता ह ईं बढ़ावे रोज अंधेरा रे चकमक चकमक सगरो करे जोति नयन के चुपके हरे देखावे सपना रोज नया ई पेट सँघतियन के ई भरे भगावे दूर सबेरा रे कैद में सुरुज अउरी चान करे के बा ओकर अभियान बजावे ढोल ढमाका खूब नाप देलस धरती असमान उगावे खूब लमेरा रे करीं का कांटक सोचे रोज करेलन हथियारन के खोज बाँची मीन…

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कल्लू क रिजल्ट

इम्तिहान हो गईल ख़तम त कल्लू बँधलेन आस हे भगवान चढ़इबे लड्डू बस करवा द पास रहल परीक्षा इंटर वाला टेंशन बहुत दिहेस गुलछर्रा के संगे कल्लुआ मेहनत बहुत किहेस नक़ल करावे खातिर चच्चा पूरा जोर लगइलेन पर कल्लू क बुद्धि अइसेन नक़ल मारि ना पइलेन चच्चा अउर मास्टर दूनो कइलेन बहुत प्रयास | पढ़ै-लिखै के नाही कुच्छो दिन भर खेले गोली खाली कापी भरअ लिखावत बाटै ओकर टोली सब पेपर बा राम भरोसे रामअ पार लगइहन जल्दी पता चली की केतना नंबर लेके अइहन नंबर के बारे में सोचतअ…

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मोबाइल

अब केसे हव अनजान मोबाइल, सब कर हउए ई जान मोबाइल। सुत्तत, उठत, बइठत जागत , छेड़े हरदम तान मोबाइल। सुनी ला की कुल कहन , ज्ञान विज्ञान क खान मोबाइल। एकौ छन न फुरसत देला, कई देला परेशान मोबाइल। मासूका क फ़ोटो जैसे तकिया के नीचे रक्खें लोग, आज उहाँ क देखा भइया हउए ससुरा शान मोबाइल। तकते मोबाइल में सूत्तें, अ उठते खोजे, जैसे हव भगवान मोबाइल। रिश्ता नाता दूर भइल सब, अ छीन लेलस ईमान मोबाइल। रंग बिरंगे वीडियो देखैं बुढ़वा, नौजवान अउर बच्चा। कठपुतली बनउले हव…

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हारब त हूरब,जीतब त थूरब

जादू टोना, दख्खिन कोना बाति-बाति पर रोना-धोना जाइब पश्चिम आ बोलब पूरब हारब त हूरब,जीतब त थूरब॥   करब बहाना मारब ताना ठेंगे ऊपर रखब जमाना बेगर बात के टंगरी तूरब हारब त हूरब,जीतब त थूरब॥   उपरल सोर डेहुंगी सूखल भंडारी रहलें कुल्हि भूखल अनकहले सुरुजो के घूरब हारब त हूरब,जीतब त थूरब॥   इहाँ उहाँ बस उगिलब आग अनियासे छेड़ब खट राग धरम जाति के पेंगला पूरब हारब त हूरब,जीतब त थूरब॥   जयशंकर प्रसाद द्विवेदी

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नेता जी के भाषण

शुरू बाटे एलेक्शन के एक्शन, चारु ओर गुलजार हो गइल बा । केहू के नेता जी लगतानि जीजा, केहू नेता जी के सार हो गईल बा शुरू बाटे एलेक्शन के एक्शन, चारु ओर गुलजार हो गइल बा । नेता जी दे तानी ई भाषण – हमार होखे दी एक बार शाषण, हरदम चलत रही लात- जूता सुनब की सदन में मार हो गइल बा शुरू बाटे एलेक्शन के एक्शन, चारु ओर गुलजार हो गइल बा । हम जितब गरीबी मिटाएब हमहू लुटेब ,रउरो से लुटवाएब जिअत बच गइनी तब रउवा…

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जिन्दगी के सहेली- पहेली भइल

जिन्दगी के सहेली- पहेली भइल , नीब से भी कसोतर करेली भइल l जे बुराई में बूड़ल उहे सांच बा , उनके जिम्मा सियासत हवेली भइल l जे बा जाहिल ऊहे आज सरदार बा , बोली उनकर त चम्पा चमेली भइलl अब कहाँ जाके ईमान जोखबि सभे, जोखे वाली ही चम्पत झरेली भईल l खोजअ् ‘सोनी’ झुमक तू नयन मुंदि केे , सब इंहें बा ना कुछुओ बरेली गइल l @सोनी सुगंधा

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