आपन बात

भोजपुरी साहित्य सरिता क इ अंक आप लोगन के सौंपत के बहुत हर्ष होत बा। सबसे बड़ी खुशी क इ बात ह कि ई अवसर कार्तिक महिना के बा । कउनो राष्ट्र देश के सांस्कृतिक वैभव क परिचायक उहवां के लोक साहित्य होखेला। जवने से उहवां के संस्कार परंपरा जीवन आदर्श उत्सव विषाद नायक नायिका रितु गीत विवाह गीत भजन राजनीतिक सामाजिक धार्मिक गीतन के बोल में समाहित रहेला। वइसे तो हर देश के आपन एक परम्परा होखेला लेकिन हमरे देश के बात निराला बा। इहवा “कोस -कोस पर बदलें पानी, चार कोस पर बदले बानी” क परंपरा बा। जेमें लोक साहित्य के अलबेला रंग रूप देखें के मिलेला। जवने में भोजपुरी के अक्षय भंडार बा।

कार्तिक महीना क बातै निराली रहेंलें। ई महिना में प्रकृति क हर रंग अनूठा रहेला। जइसे लगेला कि धरती पूरी तरह से तृप्त रहेले। जइसे मालूम पडेला की गरमी के कुल ताप ,बरसात क मनमानी सब सह के कार्तिक सबके झोली में खुशी भरेले।ए महिना बड़ पून्य वाला महिना कहल जाला।

भारतीय संस्कृत में त्यौहार केवल औपचारिक ना रहेला। बल्कि जीवन क एक अभिन्न अंग रहेला। कार्तिक महीना शुक्ल पक्ष के खष्टी तिथि के छठ पूजा बड़ हर्षोल्लास से मनावल जाला। सूर्य खष्ठी या डाला छठ के नाम से विख्यात है इ पूजा सूर्य की उपासना का पर्व बा। ब्रती कमर भर जल में खड़ा होके सूर्य के अर्ध्य देवे के प्रथा बा ।अउर सबसे बड़ी बात इ बा कि कउनो धर्म संप्रदाय में अस्त होते सूर्य के अर्ध्य देवे के प्रथा ना बा । हमरे इहवाँ ही सूर्य के उदय अउर अस्त होये पर अर्ध्य देवें जाये क बिधान बा। सूर्य देवता ऊर्जा क प्रतिक हउए। इ पूजा अर्चना रोगन से मुक्ति वही घर परिवार के सुख समृद्धि बदे कयल जाला। छठ पूजा क बिहार में खास महत्त्व बा ।अब देश के कोने -कोने में मनावल जाला, जवने में गहरी श्रद्धा भक्ति जूडल रहेला । ए पर्व के प्रकृति से गहरा रिस्ता ह ।ये महिना में जेतना फल-फूल उपलब्ध होखेला कुल सूरुज भगवान के चढ़ेला। काहे के इ कुल फल-फूल ओनही के प्रभाव से उगेला। छठ महापर्व के गीतन में दुख सुख हारि बेमारी सपने रिस्ता  नाता  सब सच्चे रूप में दिखाई देला एही से छठ माई के गीत अन्तर्मन के छू जाला।

काँचहि बाँस के बहँगिया,बहँगी लचकँत जाय।

एह छठ पूजा के विधि – विधान से पूरा कS के भोजपुरिया समाज फेर से अपने रोजमर्रा के कामन मे जुट गइल बा । भोजपुरिया समाज हरमेसा से अपने मेहनत खाति जानल जाला , इहे उ समाज ह जवन माटी के सोना बनावे के कूबत रखेला । गिरमिटिया से गौरमेंट बने के गुर जानेला, धरती के सरग बनावे के लूर एही समाज मे बा आउर कवनों मे ना । धान के लवनी, कटनी, दवनी आ ओसवनी कS के फेर रवि के फसल के तइयारी मे लाग जाई । जिनगी के चकरी अपने रसते निकल पड़ी,इहे भोजपुरिया समाज के जिनगी के गति बा ।

दुर्गा पूजा से लेके छठ माई के कउनो ना कउनो रूप में देवी क पूजा होखेला। बनारस के सांस्कृतिक राजधानी कहल जाला। इ बनारस धर्म संस्कृति परंपरा अपने कुल के सहेजत चलेला । अयीसने में में काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के एक घटना जिक्र करब जरूरी हो जाला। बी एच यू  के इतिहास में लइकिन लोगन क आंदोलन धरना एक ऐतिहासिक घटना बन गइल काहे से कि लइकिन लोग के अनुसार इहवां पहली बार भयल ह। एकरे पीछे एके सब लोग अलग-अलग रंग देत हउए। बाकि कुल मिला जुला के एह बात के  स्वागत करें के चाही कि अब नारी अबला का चोला धीरे-धीरे उतार के फेंक चुकल बाड़ी । लइकिन लोग आपन बात राखे  बदे आगे अइनी। उनके एह  जज्बा  के सबके सलाम करें के चाही ।अब आपन रक्षा, अपने स्वाभिमान के रक्षा करैं बदें इ आगे अइनी। एकरे बदे

बीएचयू के छात्रा लोगन  बधाई..क पात्र हयी। कोमल हई कमजोर नाही, शक्ति क नाम ही नारी ह।

 

  • डॉ ऋचा सिंह

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