राउर महिमा रउरे जानी हम ना जानी मरम बाबा का का गाईं बरम बाबा॥ रउरे किरपा सोनरा के घर पसरल मजगर उजियारी पूजन अरचन करि करिके दीहलस कुलवा तारी। जियत जिनगी करम करत मानि आपन धरम बाबा। का का गाईं बरम बाबा॥ पहिले दिनवाँ कटत रहे जइसे तइसे,बाँची पतरा तहरे दीठि से पूरन भइल मुंसी से मालिक के जतरा आँखि खुलल सनमान बढ़ल नइखे कवनों भरम बाबा। का का गाईं बरम बाबा॥ सरधा जेकर बा तहरा में किरपा ओपर बरसावेला ओकरे किरती के अँगना अँजोरिया…
Read MoreTag: जयशंकर प्रसाद द्विवेदी
कुल्हि हमरे चाही
हमही त बानी असली राही कुल्हि हमरे चाही। हमही से उद्गम हमरे में संगम धमकी से करब हम उगाही कुल्हि हमरे चाही। हमरे से भाषा हमरे से आशा छपि के देखाइब खरखाही कुल्हि हमरे चाही। हमही चउमासा बुझीं न तमासा खम खम गिरिहें गवाही कुल्हि हमरे चाही। जयशंकर प्रसाद द्विवेदी
Read Moreमध दुपहरिया
सप सप चले ले लुअरिया हो सखि ! मध दुपहरिया। कइसे बचाईं जवरिया हो सखि ! मध दुपहरिया॥ एकहू बाग बगइचो ना बाचल नदी नार पोखर नइखे सवाचल बन्हओ क टुटल कमरिया हो। सखि ! मध दुपहरिया॥ हरियर बनवा सपन होई गइलें सहर आ गउवाँ प्रदूषित भइलें गरमी के बढ़ल कहरिया हो। सखि ! मध दुपहरिया॥ चिरई चुरमुन के असरा बिलाइल बिरवा के सँगे कियरियो सुखाइल घरवो में डाहे लवरिया हो । सखि ! मध दुपहरिया॥ जयशंकर प्रसाद द्विवेदी 5/6/2022
Read Moreउतार गइल मुँहवा क पानी
करिया करम बीखि बानी उतार गइल मुँहवा क पानी॥ कतनों नचवला आपन पुतरिया लाजो न बाचल अपने दुअरिया नसला इजत खानदानी । उतार गइल मुँहवा क पानी॥ झुठिया भौकाल कतनों बनवला बदले में लाते मुक्का पवला मेटी न टाँका निसानी उतार गइल मुँहवा क पानी॥ साँच के बचवा साँचे जाना नीक आ नेवर अबो पहिचाना फेरु न लवटी जवानी उतार गइल मुँहवा क पानी॥ अब जे केहुके आँख देखइबा ओकरा सोझा खुदे सरमइबा कइसे के कटबा चानी उतार गइल मुँहवा क पानी॥ जयशंकर प्रसाद द्विवेदी 31/03/2022…
Read Moreबाउर बातिन का बिरोध से बेसी जरूरत बा नीमन बाति के लमहर परम्परा बनावे के !
हम विषय पर आपन बात राखे का पहिले रउवा सभे के सोझा 3-4 बरिस पहिले के कुछ बात राखल चाहत बानी। 20-22 करोड़ कथित भोजपुरी भाषा भाषियन का बीच 3-4 गो पत्रिका उहो त्रमासिक भा छमाही निकलत रहनी स। ओह समय भोजपुरी के नेही-छोही रचनाकार लोगन का सोझा भा भोजपुरी के नवहा रचनाकार लोगन के सोझा ढेर सकेता रहे। ओह घरी 3-4 गो जुनूनी लोगन का चलते भोजपुरी साहित्य सरिता के जनम भइल। एकरा पाछे एगो विचार रहे कि भोजपुरी के नवहा लिखनिहार लोगन के जगह दीहल जाव, पुरान लोगन…
Read Moreतमासा घुस के देखै
लख लतखोर कहाय, तमासा घुस के देखै॥ सौ सौ जुत्ते खाय, तमासा घुस के देखै॥ इनका उनुका बहकावे में नाटो क खिचड़ी पकावे में जेलस्की इतराय, तमासा घुस के देखै॥ गावत फिरत देस के गीत संहत छोड़ि परइलें मीत बइडेनवा मुसकाय, तमासा घुस के देखै॥ बरसे लगल रसियन मिसाइल खड़हर सहर मनई बा घाहिल खूनम खून नहाय, तमासा घुस के देखै॥ मानवता के नारा कइसन नैतिकता क पहाड़ा जइसन कबौं बदल ऊ जाय, तमासा घुस के देखै॥ के बा नीक, नेवर के बा फयदा केकरा…
Read Moreबबुनवाँ बड़ नीक लागे हो
ठुनुक़त घरवाँ अंगनवाँ, बबुनवाँ बड़ नीक लागे हो। अरे हो बिहँसत माई के परनवाँ, बबुनवाँ बड़ नीक लागे हो। मुँहवा लपेटले मखनवाँ बबुनवाँ बड़ नीक लागे हो। अरे हो उचकि उतारत अयनवाँ, बबुनवाँ बड़ नीक लागे हो। हुलसत गरवा लगावेली अरे हो भरले लोरवा नयनवाँ , बबुनवाँ बड़ नीक लागे हो। रोआँ पुलकि जिया हरसेला अरे हो कुंहुकेला मन अस मयनवाँ, बबुनवाँ बड़ नीक लागे हो।। जयशंकर प्रसाद द्विवेदी
Read Moreआपन बात
साहित्य अपना में समाज का संगे सभे के हित समाहित राखेला आ हरमेसा बढ़न्ति का ओर गति बनवले राखे के उपक्रम विद्वान साहित्यकार लोग करत रहेलें। अइसने कुछ साहित्य जगत के मान्यतो ह। बाकि हर बेर ई सही ना होखे। कई बेर एकरा से उलट होत लउकेला। जान-बूझ के भा इरखा बस कवनो नीमन चीजु के अनदेखी कइल, उहो अइसन लोगन द्वारा जेकरा के हद तक मानक मानल जात होखे, ढेर बाउर लागेला। अइसन भइलका मन के गहिराह टीस दे जाला। कई बेर उ टीस मन के उचाट क देवेले।…
Read Moreअहम् के आन्हर सोवारथ में सउनाइल
का जमाना आ गयो भाया, आन्हरन के जनसंख्या में बढ़न्ति त सुरसा लेखा हो रहल बा। लइकइयाँ में सुनले रहनी कि सावन के आन्हर होलें आ आन्हर होते ओहन के कुल्हि हरियरे हरियर लउके लागेला। मने वर्णांधता के सिकार हो जालें सन। बुझता कुछ-कुछ ओइसने अहम् के आन्हरनो के होला।सावन के आन्हर अउर अहम् के आन्हरन में एगो लमहर अंतर होला। अहम् के आन्हरन के खाली अपने सूझेला, आपन छोड़ि कुछ अउर ना सूझेला। ई बूझीं कि अहम् के आन्हर अगर सोवारथ में सउनाइल होखे त ओकर हाल ढेर बाउर…
Read Moreनयनवा से लोर झरे
हिया बेंधेले संवरिया के बाति नयनवाँ से लोर झरे ॥ जागल जबसे बा पहिली पिरितिया रहि – रहि उभरेले सँवरी सुरतिया मोहें निदिया न आई भर राति नयनवाँ से लोर झरे ॥ रहिया निरेखी बीतल दुपहरिया मन मुरुझाई जाय लखते दुवरिया बुला आई जाँय रतिओ – बिराती नयनवाँ से लोर झरे ॥ हुन टुन ननदी के गभिया सुनाला मुसुकी से ओकरा बोखार चढ़ि जाला उहो डाहेले सवतिया के भाँति नयनवाँ से लोर झरे ॥ हिया बेंधेले संवरिया के बाति नयनवाँ से लोर झरे ॥ जयशंकर…
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