बकरिया रे

बकरिया रे तोर महिमा बा भारी गुन गावे खूबे संविधान सरकारी ! दुधवा जे पियेला उ बनेला महातमा दुनिया कहेला महामानव देवातमा आजु होला पठरुन के बलि बरियारी ! तोरे से आ तोरे खातिर तोरे लोकतंतर ज्ञानी जन दिने राति जपे इहे मंतर बाकिर तोरा घरवा के देवेलन उजारी ! तहरे के बेचि कीनि चले दुकनदारी दूहि गारि लेवे नीके देवे दुतकारी काहें टुकुर टुकुर ताकि बनेलू बेचारी ! तहरा के दूहे सभ केहू पारापारी तबहूँ ना जिनगी के सधे देनदारी लोहू पीये मास चाभे बने अवतारी ! सभ अनमोल…

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माई

पेट जारि के जिअवलू आपन बखरा खिअवलू , करनी अइसन कइलू कभों बिसराई ना केहू माई तोर करजा भरि पाई ना केहू । बहुते बेमार परीं हमहूँ नन्हईयाँ जोहलू न केहुके उठवलू कन्हईयाँ कोसनऽ ले जाई जा के लेहलू दवाई गुन गवला से कतनो अघाई ना केहू माई तोर करजा– जड़वे त कोरवे में साटि लुकववलू भेवनी बिछवना ओहू के झुरववलू किरिया धरावे केहू ठोनहक मारे दुख सहलू जवन ऊ भुलाई ना केहू माई तोर करजा– झोंझरी में भूँजा दे के पढ़े के पठवलू रार ना मचाईं कतों किरिया धरवलू…

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ग़ज़ल

प्यार नइखे गर जिया में, जिंदगानी डाँड़ बा । रौब झाड़े चढ़ उतानी, तब जवानी डाँड़ बा ।। लाज अउरी शान बाटे, आदमी में आब ही, बे-हायाई में मिलावल, यार पानी डाँड़ बा ।। दाग इज्ज़त में बिया, जिनके तनिक उनके बदे, लाल पीला या गुलाबी, रंग धानी डाँड़ बा ।। बाप आ भाई क पगिया, बोर दे जे चाल से, घर अँटारी में पलल, बिटिया सयानी डाँड़ बा ।। बाँट अँगना घर दुआरी, दुश्मनी भाई करें, आज बड़की गोतिनी, या देवरानी डाँड़ बा ।। शोर जवना घर मचे ना,…

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ईयाद आवे गउवाँ

शहर सपना अस, ईयाद आवे गउवाँ खेत, खरिहान अउर पीपर के छउवाँ ईयाद आवे गउवाँ॥   संगही ईयाद आवे,  ईया के बतिया लइकन संगे खेललकी होला पतिया अचके मचल जाला जाये के पउवाँ। ईयाद आवे गउवाँ॥ शहर सपना अस, ईयाद आवे गउवाँ॥   संगही ईयाद आवे होरहा भुजलका खेतन के डांड़े भागत बेर गिरलका संझा खानि ओरहन धरि धरि नउवाँ। ईयाद आवे गउवाँ॥ शहर सपना अस, ईयाद आवे गउवाँ॥   संगही ईयाद आवे ऊख के तोड़लका पकड़इला पर उखिए उखिए पिटलका ठेहुना क दरद सरकि के गिरल खउवाँ। ईयाद आवे…

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गीत

बेसुरा कुछ लोग,लय क चासनी लेके खड़ा बा शब्द के फींचे सुखावे अरगनी लेके खड़ा बा/ रेलगाड़ी के सफर में दूर से सीवान देखे आंखि पर ऐना चढ़ा के झिरखिरी से चान देखे दिनकेउजियारे दिया भर चांदनी लेके खड़ा बा/ ककहरा भर पाठ पढ़िके रोज भासा ज्ञान बांटे राह जे चीन्हें न जाने राह क पहिचान बांटे आंखि ना दीदा ,समय क तरजनी लेके खड़ा बा/ पांव के नीचे न माटी माथ पर आकास ढोवे समय के रुख पर चले जे बहत गंगा ‌हाथ धोवे ऊ भगीरथ क कठिन तप…

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हम नगर निगम बोलतानी

रात क मुरगा दिनही दारू लड़ी चुनाव अब मेहरारू काम धाम करिहें ना कल्लू मुँह का देखत हउवा मल्लू। जनता खातिर गंदा पानी हम नगर निगम बोलतानी।   साफ सफाई  हवा हवाई चिक्कन होखब चाप मलाई के के खाई, का का खाई इहो बतिया हम बतलाईं। जनता के भरमाई  घानी हम नगर निगम बोलतानी।   सड़क चलीं झुलुआ झूलीं दरद मानी भीतरें घूलीं गली मोहल्ला अंधा कूप दिन में खूबै सेंकी धूप जनता के सुनाईं  कहानी हम नगर निगम बोलतानी।   अब वादा पर वादा बाटै कुछ दिन जनता के…

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आपन बात

ईश्वर की सृष्टि के साथ मिले, त तनाव दूर होखे के सथहीं रचना में इहे आदमी के मूड के बेहतर करे के रसायन भी बन जाला। ई हमनी के शरीर  के कोशिका  सभन के भी पोषित करेला। । मानसिक स्वास्थ्य खातिर भी  ई एगो   टॉनिक होखेला।  एहसे ऊर्जा, ताजगी, चैतन्यता के साथे  जीवनशक्ति बढ़ जाला। प्रकृति के रचना के संग सुकूं आ शांति भी मिलेला जेह से तनाव आ चिंता भी  दूर  हो जाला आ सोच  सकारात्मक दिशा के साथ कुछ नया करे खातिर प्रेरित करेला।अइसहीं सभ त्योहार के आपन…

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सामाजिक आ राजनीतिक विद्रूपता के खिलाफ के स्वर: गोरख के गीत

गोरख यानी गोरख पाण्डेय।हँ, उहे गोरख पाण्डेय जेकर गीत ‘ समाजवाद बबुआ, धीरे – धीरे आई ‘ आ ‘ नक्सलबाड़ी के तुफनवा जमनवा बदली ‘ गाँव के गली से दिल्ली के गलियारा तक अस्सी के दसक में गूंजत रहे। उहे गोरख पाण्डेय के गीतन पर हम इहाँ बात कइल चाहतानी। गोरख पाण्डेय के जीवन काल में उनुकर रचल गीत संग्रह’ भोजपुरी के नौ गीत ‘ प्रकासित भइल रहे।एकरा अलावा जहाँ – तहाँ उहाँ के भोजपुरी रचना छपल रहे। श्री जीतेन्द्र वर्मा ‘ गोरख पाण्डेय के भोजपुरी गीत ‘ नाम से…

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कलही मेहरिया

दूभर कइलस चलल डहरिया हो रामा कलही मेहरिया ॥   गाँव के रसता अचके भुलाइल जिनगी में उ जहिया से आइल भूल गइल अपनों सहरिया हो रामा कलही मेहरिया ॥   केहुके न छोड़लस एकहु बाकी कोना अंतरा गउंखा झाँकी ननदो पर ढारत कहरिया हो रामा कलही मेहरिया ॥   भाई भतीजन के देखते खीझे देवरो पर ना उ तनिको रीझे तूर दीहलस घर के कमरिया हो रामा कलही मेहरिया ॥   भोरही से उठिके पढ़ेले रमायन सास ससुर के गरिए से गायन जिनगी बनवलस जहरिया हो रामा कलही मेहरिया…

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चइता

चईत महीनवा के सुभ सुदिनवा मंगल बाजेला बधईया हो रामा.. चईत महीनवा.. फुलवा खिलखिल झरले अँचरवा में , सूरुज हँसेले ठठाइके हो रामा.. चईत महीनवा.. कमल खिलाके हँसेले पोखरवा में पुरईन सजेली मोती मालवा होरामा .. चईत महीनवा..! अमवा के डलिया में छोट-छिन टिकोरवा , कोईली बोलेली टहकारवा हो रामा.. चईत महीनवा.. कटहर हुलसेला देखिके बलकवा बिधना हमर भरे गोदिया हो रामा.. चैईत महीनवा सोनवा से लउकेला गेहुँआ के डरिया जड़ल बाटे मोतिया से देहिया होरामा.. चईत महीनवा गीतवा गाई-गाई झूम-झूम नाचेला, आजु हम भईनी लछमिनिया हो रामा.. चईत महीनवा…

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