नकाबपोश

“गोड़ लागतानी …… बाबा  !”  पंडी जी के दसई,  फरके से गोड़ लगलें ।

“जय हो ……!  का आइल बाड़े दसई, कवनो काम का बा रे हमरा से ?”

” हं … बाबा ! तनी गृह प्रवेश के दिन पूछे के रहे रउवा से ”

सुन  … दसई अब हम छोट जात में पूजा- पाठ, विवाह – शादी,कथा- वर्ता करावे खातिर अलगा – अलगा रेट बान्ह देले बानी। काम कके कीच कीच कइल ठीक ना लागे। हतना लेलीं, त होतना लेलीं । हं बाकिर चमरन के छोड़ के तोहनी  के सई पचास कमो देब स त कवनो बात ना । चमरन खातिर एगो अधेली ना कम होई । जानते बाड़े कि अब, ऊ सब हमनी के पहिले लेखा ओतना मान सम्मान, इज्जत नइखन स करत। जवन पढ़ लिख गइल आ नोकरी ध लेलस त हमनी के सोझा परलो पर राम सलाम, पायलगी एकदम नइखन स करत। ओहनिए के देखा देखी जवन चमरा अनपढ़ों बा , उहो पायलगी नइखन सं करत। ढेर चमरा अब त विवाह शादी में हमनी के पूछते नइखन स । ना जाने कहां कहां से भंते बोला के काम करवा लेत बाड़े से। कुछ चमरा जवन बड़ अफसर बनल बाड़े सं । जइसे डांक्टर, इंजीनियर,बी०.डी ० ओ ० सी०ओ० उहे आजो आपन परम्परा आ संस्कृति नइखन स भूलल। ऊ आजो विवाह शादी आ कथा वर्ता में बुलावत बाड़े स। निकहा दानो दक्षिणा अनघा देत बाड़े सं बाकिर बड़ी तेजी से आंबेडकरवादी भइल जात बाड़े सं। अब मुसलमान से ना एहनिये से हिन्दू धर्म के खतरा बा। हं… बाकिर दलित में अउरी जतिया आजो ठीक बाड़े सं । ऊ हमनी के आजो पूछत बाड़े सं ।, आ मानो सम्मान देत बाड़े सं । पिछड़ा आ अतिपिछड़ा वर्ग आजो हमनी संगे लामबंद बाड़े सं। हिन्दू धर्म बचावे खातिर एकदम टाइट होके सड़क पर उतर जालें सं। मिंया लोग के मार पीट के सोझ कइले रहे लन सं। मस्जिद में जाके हनुमान चालीसा पढ़ें में एहनी के आहस ना लागे। एकदम मरद बाड़े सं । आरे… हं… रे दसई रेटवा त बतइबे ना कइनी । सुन… हमार रेट गृह प्रवेश के दिन बतावे खातिर एगारह सौ, आ गृह प्रवेश के पूजा करावे खातिर एगारह हजार । विवाह के दिन धरे खातिर एकइस सौ आ विवाह करावे खतिर तनी रेट कडेर बा, एकईस हजार बा, कारण कि रात भर जागे के परेला। कथा वर्ता खातिर पांच हजार में फरिया  जाई ।  हं बाकिर जवन एकदमे गरीब बा ओकरो त निबाहे के बा नू। जवन ओकरा जुरी ओही पर ओकर काम निबाह देवे के बा । बाकिर नोकरिहन के तनिको मरउत ना। सुखदेव पांडे आपन रेट खोललें।”

रेट सुन के दसई तनी हिचकिचइले। बाकिर दोसर कवनो उपाय लउकत ना रहे, कारण कि गांव में पांच छव घर पंडी जी हलहीं बाड़े। ई पंडी जी, सब जने से विद्वान मानल जालें। जब ई रेट बन्हले बाड़े त सब जना मिल के राय सलाह करिए के बन्हले होई लोग। भले ऊ लोग चार पांच सौ कम लिही लोग। इनिका आगा केहू के पूछ नइखे । ई खाली ना रहेलन तबे ओह लोग के, लोग पूछे ला। आखिर चार पांच सौ खातिर काहे दब पंडी जी से काम करावल जाई।  गृह प्रवेश कवनो बार बार थोरे करावे के बा। तनी महंगा परी बाकिर इनिके से करावल ठीक रही।

का सोचत बाड़े दसई……?

कुछ ना बाबा, दिन बताई गृह प्रवेश के हम देहब एगारह सौ रोपया।

आरे…… पइसवा देबे तब नू पतरा खुली।

का कह तानी बाबा…  ? ऊपर आसमान नीचे पासवान कबो पीछे हटे वाला जात ह ? लीं हई एगारह सौ रोपया।

आ एगो सिकवा ?

लीं एगो सिकवा लेलीं ।  आ … गृह प्रवेश के पूजा रउवे करावे के बा।

(  2.  )

काहे ना करा देब ? बाकिर रोपया चार दिन पहिले पहुंचा जइहे ।

जरूर बाबा ! हम पहिलही पूरा एगारह हजार रोपया पहुंचा देब। ”

एगो बात जानल चाहत बानी  दसई । बइठ जो नीचे पकवा पर। ”

जी… बाबा,  बइठ जा तानी। कहीं बाबा का कहल चाह तानी ?

तू त जय भीम वाला हवे नू  दसई ? हम तोरा के देखले बानी आ दोसरो के मुहें सुनले बानी, तोरा के जय भीम कहत। एही से ई बात पूछनी हां। ”

ना बाबा, अइसन बात नइखे। जब चमरन मिले लन सं त जय भीम कहे परेला। बाकिर जब हमार आपन जात भा दोसर जात से मुलाकात होला तब जय श्री राम कहिला बाबा। ”

अइसे काहे…… ?  केनहूं एके ओर रह। चमरन से डर का लागे ला तोरा ?  दूनो ओर काहे बाड़े ?  कहाउत सुनले बाड़े नू … दू नाव पर चढ़ना, का फाट के मरना। ”

डेराय के बात नइखे  बाबा ! दुसाध…, चमार से डेराई  ?  हमनी के एगो संगठन बा बाबा ! ओकर नाम अनुसूचित जाति/ जन जाति कर्मचारी संघ भोजपुर ह । ओकर सदस्य हमहूं बानी। कवनो किसिम के दिक्कत होला त कर्मचारी संघ मदद करे खातिर खाड हो जाला। बदली सदली में  कबो कबो मदद मिल जाला। कर्मचारी संघ के जब सदस्य मिले लें त एकदूसरा से अभिवादन जय भीम बोलिए के कइल जाला। जब ओह संगठन में रहे के बा त जय भीम बोलल मजबूरी बा। ना त बाहर नू क दिहे स। असहू हमार जतीय के लोग जय भीम के फेरा में ना रहेला। मीटिंग भा कतहूं राह में कर्मचारी संघ के आदमी मिल जाला तब जय भीम कहे परेला। चमरे जादा जय भीम के फेरा में रहे लन सं। बाकिर चमरनो में सब ना। ढेरे देखावटियों बाड़े सं। तबो कुछ अधिके संख्या बा जवन डां आंबेडकर के प्रति समर्पित बाड़े।  हमरा घरे आईब त डां आंबेडकर के एको फोटो ना मिली देखे के। देवी देवता दुर्गा, लक्ष्मी, गणेश के फोटो आ मूर्ति बा हमरा घर में। एगो लकड़ी के बने बनाई मंदिर पटना नाला रोड से किन के ले आईल बानी। ओही में लक्ष्मी गणेश जी के मूर्ति के पइसइले  बानी। एक लेखा ऊ हमार पूजा घर ह। हमनी के दूनो बेकत बिना पूजा कईले मुंह में कुछो ना डाली ला जा। ”

बहुत बढ़िया दसई…। अच्छा त हिन्दू राष्ट्र के बारे में तोर का ख्याल बा ? ”

एह में का कहे के बा, बाबा ! हिन्दू राष्ट्र बनही के चाही। इहां हिन्दू के संख्या जादे बा त हिन्दू राष्ट्र बनल एकदम जरूरी बा। आ  हम कवनो हिन्दू ना हई ? हमार पूरा समर्थन बा बाबा। ”

बड़ी नीक सोच बा तोर दसई । तोरा लेखा सब दलित समर्थन करे लगिहें त हिन्दू राष्ट्र बनत देरी ना लागी। बाकिर चमरे ढेर रोड़ा अटकावत बाड़े स।  तोहनी के जात में भा अउरी दलितन में कवनो दिक्कत नइखे । सभन के समर्थन बा। देखते बाड स तोहनी के नेता  हिन्दू राष्ट्र के समर्थन में संगे बा लोग। जब तोहनी के नेता के समर्थन बा त तोहनी के पिछे हटे के सवाल कहां बा। कोशिश कर स चमरनों के एह पक्ष में लावे के। ”

ठीक बा बाबा ! हम त अइसे कोशिश करबे करी ला। अब राउर आदेश हो गइल त अब जोर शोर से एह काम में लाग जाईब। ”

वाह ! दसई …… माने के परी तू बडी होशियार बाड़े।  बाकिर एगो काम अउरी कर। तोर छोटका बेटा बेरोजगार बा ।  अभी ले नोकरी ना लागल ओकरा। काहे ना राष्ट्रीय लोक सेवक संघ के शाखा में भेजस ? एह घरी  त संघ के शाखा गांवे -गांव चलत बा। शहर में त का कहे के बा छोट बड सब शहर में पहिले से चलत बा। उहां एक से एक लोग आवे ला। जिला कार्यवाहक, नगर कार्यवाह कबो कबो प्रांतीय कार्यवाहक आवे लें। शाखा से जुड़ गइला पर कवनो नोकरी चाकरी खाति पैरवी

(  3  )

के जरूरत लागी त ऊ लोग पीछे थोरे हटी।

ठीक बा बाबा ! अभी त ऊ आरे रहत बा । गांव पर आई त ई बात ओकरा से कहब। ”

दसई के गांव नवरंग पुर, भोजपुर जिला के देहात क्षेत्र में। दसई,  प्रखंड कार्यालय में एगो किरानी के पद पर कार्यरत। बड बेटा रेलवे में ग्रुप डी में दू साल पहिले योगदान कइले रहे। दुसरका बेटा पढ लिख के बेरोजगार। ऊ अभी आरा शहर में नोकरी के तैयारी में लागल बा। बेटी सरिता एही साल बी ए पास कइलस । बडका बेटा के विवाह खातिर अगुआ दुआर के माटी कोडले बाड़े । बढ़िया दहेज आ सुनर लइकी के तलाश बा। साथे नयका घर में गइला के बाद विवाह फाइनल कइल जाई । शहरो में जमीन लेके छोडले रहन दसई। ओने अभी घर बने  के शुरू ना भइल रहे । एह से दसई घर बनावे के काम ना लगावत रहन।असही छोडले रहन। गांव पर के घर में बांट बखरा के बाद जवन इनिका हिस्सा में परल।ओह में सकेसती होत रहे। एगो घर आ बरांडा इनिका हिस्सा में मिलल रहे। घर के बगले में खाली जमीन इनिके हिस्सा में मिलल रहे।ओही में नया घर बनवलें।ओही घर के गृह प्रवेश के पूजा रहे। घर तैयार हो गइल रहे। गृह प्रवेश के पूजा के बिना ओह घर के उपयोग ना होत रहे।

गृह प्रवेश के दिन निअराइल त दसई पंडी जी लगे जाके एगारह हजार रोपया दे अइले।

पंडी जी कहलें,  ” आसन खातिर शुद्ध कमर लागे ला दसई। ओढल बिछावल कमर ना होखे के चाही। एह काम खातिर एगो नया कमर किन लिहे।

अच्छा बाबा  !  कमर किना जाई। कवन ढेर महंग बा। “।

एगो अउरी बात बा ।  घर में पूजा के पहिले बाछी ढुकावल जाला। तब पाछा से सब केहू ढूकी घर में। एगो बाछी आधा घंटा खातिर जोगाड कर लिहे। टोला में केहू लगे होई। ”

बाबा ! मोहल्ला में त केहू लगे बाछी न्इखे लउकत। कइसे होई।  ?

हंअ…   ? आधा घंटा खातिर बाछी किनल ठीक नइखे । हमरा लगे एगो बाछी बिया। ओह दिन आ के ले चलीहे। एकरा खतिर अलगे से एगारह सौ रोपया दे दीहे । ”

ओह दिन दसई दूनो बेकत भूखल। पंडी जी आगे बाछी के पगहा ध के पिछे से हांकत घर में ढुकलें। पाछा से दूनो बेकत। तब सब लोग पाछा से ढूकल। सब घर में बाछी घुमवा के पंडी जी बाछी के अपना दुआर पर भेजवा देवें।एकरा बाद ठाकुराई से बेदी आ हवन कुंड बनवलें। कलश रखाइल। गोबर के गणेश बनवलें आ अपना ठाकुर जी के मूर्ति कलश के सटा के रखलें। निकहा दू घंटा पूजा भइल। गोबर गणेश पर अलगे आ ठाकुर जी पर अलगे चढ़ावा चढल। सब बटोर के चेटिया लेले पंडी जी।

दसई कहलें,” बाबा !  जवन बनल बा खा के जाईब।”

सुन दसई, तोहनी लगे पूजा करा देत बानी जा त कम बा? अब तोरा लगे खाय लागी जा? हमनी के धर्म नासही के का चाहत बाड़े ? हमनी के पुरनिया तोहनी के घर में ढुकत ना रहन।  अब तोहनी के तनी ढंग के रहन सहन हो गइल।तब हमनी के आवे लगनी जा। एकर मतलब का तोहनी लगे खाय लागी जा ? जानते बाड़े कि हमनी के सीधा होला ,चाउर दाल आंटा आलू सब्जी, ई सब दे दे हम अब लेके चली।”

बढ़िया बा बाबा सब दिअवा देत बानी।  थोरही देरी में सब मिलल। पंडी जी लेके पूरा गदगद हो के अपना घरे गइले ।  एक दिन बादे प्रखंड इकाई अनुसूचित जाति/जन जाति कर्मचारी संघ के बैठक, प्रखंड कार्यालय के नियरे प्रखंडअध्यक्ष के आवास पर रहे। ओह बैठक में जिला अध्यक्ष आ सचिव भाग लेले रहन । दसई के गांव से प्रखंड कार्यालय से

(  4  )

नियरे रहे। दसई बैठक में भाग लेवे खातिर गइले। दसई के पांव रंगल देख, जिला अध्यक्ष चिहइले आ पूछ लें,” आरे… का भाई दसई  ससुरारी का गइल रह ? साली सरहज का पांव भर देले बा लोग ?  बुढारियों में बड़ा मान जान होता तोहरा भाई। ”

ना अध्यक्ष जी अइसन बात नइखे । एगो छोट मोट कार्यक्रम रहे। ”

अइसन कवन कार्यक्रम रहे भाई कि पांव रंगे के परल ?

गांव पर गृह प्रवेश रहे अध्यक्ष जी।”

आरे… वाह…भाई घर के गृह प्रवेश क लेल आ हमनी के पूछबो ना कईल हो? ई काहे ?  खीसिआइल का बाड़ भाई ?  गृह प्रवेश कवनो छोट कार्यक्रम थोरे ह ? ”

अइसन बात नइखे अध्यक्ष जी सोचनी कि अतना दूर से कमेटी के लोग के आवे जाय में दिक्कत होई। एही से केहू के ना पूछनी । ”

अच्छा कवनो बात ना ।  तोहार घर बनल खुशी के बात बा। गृह प्रवेश के पूजा के करावल ?

का कहीं अध्यक्ष जी… ! पंडी जी से करावे परल। बड़ी महंग परल। पंडी जी के कुल्ह पंद्रह हजार रोपया देवे परल।

इहे कहल गइल बा कि जहां बुरबक रहिहें उहां चलाक भूखे ना मरी। बताव भाई साल में एक बेर बाबा साहेब डॉ आंबेडकर जयंती होला । एक हजार के रसीद काट दिआला त देवे खातिर तू कतना ना नूकुर करे ल। दसहन बहाना बनइब। आज ले पांच सौ से कबो जादा चंदा ना देल। एगो पंडित के खट से पंद्रह हजार दे देल। तुही लोग नू ब्राह्मणवाद आ मनुवाद के बढावा देत बाड़ ? ओहनी के आर्थिक मजबूती तुही लोग नू मजबूत करत बाड़ ?  तोहार हक अधिकार के उहे विरोध करsता। आरक्षण के खिलाफ आग उगुलत बा उहे। आर्थिक आधार पर आरक्षण के बात उहे करsता। उहे हिन्दू राष्ट्र बनावे के बात करsता। तुही ना …तोहरा लेखा अभी ढेर जना बाड़े जय भीम बोलत बा। पंडित के गोडो लागत बा। तोहरे लेखा आदमी ओहनी के दान दक्षिणा देके के आपन विरोधी के अउरी मजबूत करsता। ई अंधविश्वास, पाखंड से कब बाहर निकलब भाई ? हमनी के सोझा जय भीम बोले से कुछ ना होई। जहिया दिल से जय भीम बोले लगब ओह दिन से अंधविश्वास, पाखंड से बाहर निकले के राह सूझे लागी। हमरा मालूम बा कि तू जय श्री राम बोले ल। ई हमनी से छिपल नइखे । तू खुल के एने चाहे ओने रह। नकाबपोश मत बन। इहे हमार आग्रह बा।”

का कहीं अध्यक्ष जी हम  त चहबे करी ला… कि पंडित के ना पूछी। हम त पकिया आंबेडकरवादी हई। बाकिर मेहरारू माने तब नू अध्यक्ष जी ? हम मेहरारू से लाचार बानी। हमरा त मनवा रहबे करेला कि कवनो भंते के बुला के पूजा पाठ करवाई । बाकिर जानते बानी कि मेहरारू के आगे केहू के ना चले ला। ”

अइसन बात कहत बाड़ कि जइसे हमनी के बिना मेहरारू वाला बानी जा। तोहरे एगो मेहरारूए बिया। हमार मेहरारू भा अउरी लोग के मेहरारू कइसे आपन मरद के बात मानत बाड़ी सं ? कइसे ई लोग के भा हमार मेहरारू अंधविश्वास, पाखंड से बाहर निकल गइली सं। हमार मेहरारू कवनो जादे पढल लिखल ना। ओकरा से बतिया के देख, आंबेडकरवाद का ह तोहरा के समझा दी बढ़िया से। ओकर सोच के स्तर तोहरा से ऊंचा बा। नइखे विश्वास त बतिया के देख ल। हमार मेहरारू के कबो पूजा पाठ करत ना देखब,भा राह में मंदिर लउक गइल त हाथ जोड़ के गोड ना लागे। तीज, जीउतिया तक छोड़ देलस। तबो हमार लइका भा हम तोहरा सोझा खंभा लेखा खाड बानी। तू कहताड कि मेहरारू के आगे केहू के चले ला? तू आपन कमजोरी अपना मुंहे कह के, भरल सभा में हंसी के पात्र बन गइल । पहिले अपना दिमाग  से भरम आ डर हटाव तब आपन मेहरारू के दोष द। ई दिमाग में जवन डर भरल बा , ई बाबा साहेब, गुरु रैदास,कबीर के पढे से दूर होई।                           अतना जल्दी कइसे बदलाव होई अध्यक्ष जी ? गते – गते सब बदली। मेहरारू जोरे बरियारी ना नू कइल जाई । ओकरो त

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धार्मिक आजादी बा नू ? ई त संविधाने दे ता। ”

भाई संविधान के लागू भइला पचहत्तर साल भइल । एकर मतलब ई बदलाव देखे खातिर तू , दू सौ का जीअब भाई ? तोहरा नोकरी करत तीस साल हो गइल। अब दू चार साल में तू रिटायर हो जइब । तोहरा कतना समय चाही बदलाव खातिर। हमार भा तोहार बाबूजी के समय बदलाव संभव ना रहे कारण कि अभी हाले मे संविधान लागू भइल। शिक्षा के माहौल ना रहे।  बाकिर बाबूजी के त मन में आकांक्षा रहे कि लइकन के समय बदलाव जरूर हो जाई। अब हमनी के बदलाव के जिम्मेवारी आईल त आपन जिम्मेवारी से भाग  के अपना लइकन के माथे थोपल चाहतानी जा । संविधान के जब दोहाई दे रहल बाड़ कि धार्मिक आजादी मिलल बा त, ओही में वैज्ञानिक सोच के बढावा देवे आ अपनावे के भी लिखल बा।  हमनी के विकास खातिर वैज्ञानिक सोच अपनावल जरूरी बा ना कि धार्मिक अंधविश्वास। । जब पढल लिखल आदमी ब्राह्मणवाद के पोसी पाली त कइसे  समाज बदली। बदलाव खातिर हमनिए के लीक बनावे के परी। तब लोग पाछा से ओह लीक पर चली। तोहरे लोग जइसन आदमी के कान्हा पर चढ़ के हिन्दू राष्ट्र आई। भले एकर लाभ हानी अभी ना बुझाई। जब बुझाई तब बड़ी देर हो चुकल रही। सब कुछ खतम हो गइल रही । एकरा बाद केहू कुछ ना कर सकी। ई सरकार अब संविधाने के अप्रासंगिक गते- गते कर रहल बिया। ढेर दिन ना लागी हिन्दू राष्ट्र बने में। ई हमनिये के देखे के मिल जाई। सब संस्थान पर संघ के कब्जा हो गइल कोर्ट कचहरी होखे थाना होखे, विश्वविद्यालय, चुनाव आयोग होखे चाहे सुप्रीम कोर्ट होखे। नोकरी खत्म आरक्षण खतम। सब सरकारी संस्थान बेचा रहल बा। प्राइवेट सेक्टर में आरक्षण बा ना।देश भर  में हजारों इस्कूल बंद हो गइल।  आ बंद हो रहल बा। दलितन पर उत्पीड़न रोज बढ़ रहल बा। उत्पीड़न करे वाला के  साथ पूरा पुलिस प्रशासन खाड बिया। दलित नेता मंत्री के जबान बंद बा। देह पर मूत दिआता तबो आहनी के कुछ नइखे होत। ई सब बात तोहरा पता बा कि ना,  कहल मुश्किल बा ? पता होई त एकर कारण के जड़ तक तू कबो ना पहुंच सक। ई हमरा मालूम बा। ”

ई समुझवला से दसई के कवनो फरक ना। उनुका अंधविश्वास, पाखंड से परहेज कबो ना। हिन्दू राष्ट्र के समर्थक असहीं थोरे बाड़े ?

दसई के छोटका लइका गोरख बेरोजगार। ऊ शहर में रह के नोकरी के तैयारी खातिर कोचिंग में नाम लिखा के पढ़त रहे । एक दिन राष्ट्रीय लोक सेवक संघ के एगो कार्यकर्ता से परिचय हो गइल  । गते – गते घनिष्ठता ओकरा से बढ़े लागल। गोरख अब ओकरा जोरे संघ के शाखा आ कार्यालय में जाय लागल। ओकरा उहां निम्मन लागे लागल। उहां किसिम किसिम खेल के माध्यम से भाषण आ प्रबचन के माध्यम से प्रशिक्षित होखे लागल गोरख। राष्ट्रीय लोक सेवक संघ के संस्थापक सदस्य के देश भक्त बतावल जाय। ई लोग ना रहते  त  देश आजाद ना होइत। गांधी जी देश खातिर खतरा बन गइल रहन । देश के सबसे बड़ खतरा मुसलमान आ वामपंथी के बतावल जात रहे। कांग्रेसी नेता के गद्दार बतावल जाय। नगर कार्यवाहक आ जिला कार्यवाहक  प्रशिक्षण देवे के काम करत रहे लोग। कबो प्रांतीय कार्यवाहक आ के करत रहन । राष्ट्रीय लोक सेवक संघ के मूल मकसद रहे दिमाग में नफरत  भरे के। संघ के घोषित दुश्मन रहे मुसलमान, इसाई आ वामपंथी। दलित अघोषित दुश्मन रहे। मुसलमान के प्रति अतना नफरत भर दिआइल कि गोरख अब मुसलमान के कट्टर विरोधी हो गइल। गोरख के सहयोग से कुछ अउरी दलित के लइकन संघ के शाखा में आवे लगलें। संघ के उद्देश्य रहे जादे से जादे दलित पिछड़ा वर्ग के लइकन के शाखा में ले आवल जाए। गऊ रक्षा के आंदोलन तेज कके मुसलमानन के निशाना बनावल जाए। मुसलमान के आर्थिक कमर टूटी आ दोयम दर्जा के नागरिक बनला के बादे मुक्कमल हिन्दू राष्ट्र बनी। कुछ गुप्त उद्देश्यो पर काम जारी बा कि कइसे दलित के आरक्षण खतम होई? आ संविधान कइसे बदली ?

अब गोरख के सोच पूरा बदल गइल रहे । जब जब गांव जाय त अपना घर के परिवार के अलावे मुहल्ला में घूम घूम के राष्ट्रीय लोक सेवक संघ के गुण के बखान करे। बतावे कि असली देश भक्त राष्ट्रीय लोक सेवक संघ  के लोग बा। पहिले के इतिहास वामपंथी के लिखल ह ,जवन सब फर्जी बा। संघ के शाखा में सही इतिहास बतावल जाला । आपन बहिन सरिता के संघ से जुडे के कहलस ।  आ बतवलस कि लइकी खातिर अलगे महिला संघ नाम से शाखा चलेला। संघ के जतना शाखा बा कवनो किसिम के जात पात, भेदभाव नइखे। उहां के कवन जात बा पता ना चले। गोरख अपना बहिन सरिता के महिला संघ से जुड़वा देलस । सरितो अब महिला संघ से जुड़ के प्रशिक्षण लेवे लागल । अब तक सावन के महीना आ गइल रहे । नगर कार्यवाहक आ जिला कार्यवाहक के नेतृत्व में एगो बैठक भइल

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अबकी तय भइल कि गोरख के नेतृत्व में जल ढारे खातिर कांवड़िया जत्था भेजल जाई। कांवड़िया जत्था के जाय खातिर राह ओह बैठक में तय भइल कि कवन राह से जत्था जाई । इहो तय भइल कि ओह राह में मस्जिद जरूर होखे के चाही। गोरख के कहाइल कि शहर के दलित मुहल्ला से जादे से जादे लइकन के कांवड़िया के जत्था लके जाय के बा । राह के पूरा खर्चा दिआई। गोरख के साथे पहिले से संघ से जुड़ल दलित लइकन मिला के कुल्ह डेढ़ दर्जन लइकन जल ढारे जाय खातिर तैयार। जिला कार्यवाहक सभन के गंजी पैंट , गमछा आ कावंड कीन के देलें ।  मस्जिद के पास जाके का करे के बा सब जिला कार्यवाहक गोरख के समझा देलें । आ राह के खर्चा देलें। हरी झंडी देखा के कांवड़िया के जत्था के रवाना  कइले  जिला कार्यवाहक। ।

गोरख के जत्था बड़ी उत्साह में रहे। जत्था के राह में मस्जिद मिलल। ओह समय नमाज़ शुरू रहे। गोरख  कांवड़िया के जत्था लेके मस्जिद में ढुक गइल आ जय श्रीराम, बोल बम के नारा लगावे लागल । आ पूरा उत्पात मचा के नमाज़ में बाधा डाल देलस। अफरा तफरी के माहौल हो गइल। पुलिस प्रशासन सब आ गइल। तब जाके ममिला शांत भइल । टी भी चैनल पर समाचार चले लागल कि मुसलमाने कांवड़िया के जत्था पर पथल फेकलें तब कांवड़िया के जत्था उग्र भइल । जिला कार्यवाहक आ नगर कार्यवाहक गोरख के उत्पात करत टी भी चैनल पर देख के खूब खुश। गोरख के जत्था जल ढार के लवटल त शहर में फूल माला से स्वागत कइल गइल ।

मस्जिद में गोरख के उत्पात मचावत टी भी पर देख दसई  बड़ी खुश । पंडी जी के ऊ बतावे खातिर उनुका दुआर पर गइलें ।

गोड़ लागत बानी बाबा  ! ”

जय हो  ! का ह रे दसई … फेर का कुछो काम बा  ?

टी भी  देखनी हा बाबा …?

हं रे… देखनी कि कांवड़िया के जत्था मस्जिद में घूस के बड़ी उत्पात मचवले सं । बड़ी वीर वाला काम कइले सं ।

जान तानी बाबा ओह में अगहरिया हमरे नू लइकवा  रहे । ”

हंअ…… लइका   त तोर बड़ा वीर बा रे। खूब बढ़िया दसई ।

एगो अउर बात जान ली बाबा !, हमार ऊ लइकवा राष्ट्रीय लोक सेवक संघ में नू शामिल हो गइल बा। ”

कब से रे………?

हो गइल साल भर से अधिके ।”

वाह दसई  ! खूब नीक काम कइले  तू ।

अब गोरख के हुडदंग दल में भेज दिआइल। उहां  गोरख हुड़दंग दल के साथे मुख्य सड़क पर रात में जाके मवेशी ले जाय वाला गाड़ी के रोक  के रोपया उगाहे के काम करें। गाड़ी वाला जब कम रोपया द स त, ई मारपीट पर उतारू हो जात रहन स। जतना रोपया मिले त ओह मे ओकरा के कमे हिस्सा मिले। कुछ महीना बाद गोरख दलिते के लइकन संगे हाईवे पर जाय लागल । गाड़ी रोक के उगाही करे लागल ।  एक बेर एगो आदमी दुधारू गाय किन के गाड़ी में अपना घरे ले जात रहे। ओकरा कमे रोपया रहे। ई मांगत रहन स जादे। एह खातिर ओकरा के बड़ी मार ,मार देले स। ऊ अस्पताल में दू दिन इलाज भइल बाकिर ना बाचल । संयोग से ऊ ब्राह्मण रहे। केस हो गइल । गोरख के साथ जवन रहन स सब धरा गइले । आजीवन सजाय हो गइल । राष्ट्रीय लोक सेवक संघ आ हुडदंग दल पाला झार देलस आ कह देलस कि ऊ हमनी के सदस्य ना रहे।

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गोरख के जेल से छोडावे खातिर खूब कोशिश कइले आ रोपया खूब खर्चा कइलें दसई ।बाकिर कुछ ना भइल। संघ के लोग केहू सहयोग करे खातिर खाड ना भइले ।

एने बेटी सरिता बरियार भंवर में फंस चुकल रहे। प्रशिक्षण के बेरा प्रांतीय कार्यवाहक रंगेश चौबे के नजरी में चढ़ गइल रहे। अय्यास किसिम के आदमी रहे। महीना में दू दिन कार्यक्रम लागत रहे। प्रशिक्षण देला के बाद शहर के बढ़िया होटल में ठहरत रहे ।  महिला संघ के नगर सेविका शांति, रंगेश चौबे के सेवा में लागल रहत रहे । रात में रंगेश चौबे के सेवा कके देर रात में लवटे। दारू से परहेज ना रहे शांति के। बहुत दिन से सरिता पर गिद्ध दृष्टि गडल रहे रंगेश चौबे के  । शांति से बोल देले रहे कि कसहू ओकरा  के पटा के होटल लेके आव। शांति एह मुहिम में लाग गइल रहे। महिला संघ के प्रमुख होखे से शांति के बात मानत रहे सरिता। एक बेर सरिता के होटल तक ले जाय में सफल हो गइल शांति। रंगेश चौबे एक बोतल दारु आ तीन गो गिलास लेके रखले रहे। सरिता के बइठा के कुछ बात समझइलस ।  तीनो गिलास में दारू ढार  देलस आ पहिले शांति के देलस फेर एगो गिलास सरिता ओरे बढ़इलस तो सरिता माना कइलस आ कहलस कि हम दारू ना पी। बाकिर शांति कमान सम्हरलस आ कहलस दारू त हमहूं ना पी। बाकिर साहेब के बात के उल्लंघन ना नू कर सकी। महिला संघ के प्रमुख बने के नम्बर तोरे बा। साहब के कृपा से हम प्रांतीय महिला संघ के प्रमुख बनब। तोरा के इहां जिला के प्रमुख बनावल जाई। ई सब पावर साहब के हाथ में बा। राष्ट्रीय लोक सेवक संघ , महिला संघ चाहे , हुड़दंग दल में ऊपर के केहू पदाधिकारी के आदेश नइखे ठुकरावे के। अनुशासन के पालन बड़ी कड़ाई से होला संघ में। एक पैग पी के त देख । शांति अपने हाथ से पिआ देलस सरिता के। हलुका फुलका नशा हो गइल सरिता के। फेर दुसरा पैग, तीसरा पैग पिआ  देलस शांति। सरिता बिछावन पर सूत गइल। नशा में बेहोश हो गईल। शांति ओकर शरीर के कपड़ा उतार देलस।ओकर खुबसूरत देह  देख के बेकाबू हो गइल रंगेश चौबे। आपन हवस मेटा लेलस।

जब नशा टूटल त ओकर शरीर में टूटन महसूस होखे। ऊ शांति से पूछलस, ” अइसे काहे होत बा? ”

शांति कहलस,” पहिला बेरा पिअला से अइसन होला। ”

दू महीना बितल त ओकरा उल्टी होखे लागल।  उल्टी के दवाई खइलस । कुछो फायदा ना। ओकरा कुछुओ बढ़िया ना लागे। शरीर सुस्त आ आंख पर नींद छोपले रहत रहे। शांति ओकरा के अपना घरे भेज देलस। गोरख के जेल जाय से दसई बड़ी तनाव में।  सरिता के तबीयत गड़बड़ाय से घर में सभे चिंता में।  दसई एक दिन सरिता के डांक्टर से देखावे खातिर रेफरल अस्पताल में ले गइले । लेडी डाक्टर से सरिता के देखवलें। पेशाब जांच वाला कीट से पता चल गइल कि सरिता के पेट में बच्चा पल रहल बा। दसई  ई बात सुनलन कि पेट में बच्चा बा। डाक्टर के क्लिनिक से ह ह … हंसत  , आ हिन्दू राष्ट्र आ गइल,  हिन्दू राष्ट्र आ गइल । बोलत कहां गइलें? आज तक पता ना चलल।

 

  • राम यश “अविकल “

पकडी गैस एजेंसी के दक्षिण

पोस्ट  –  पकड़ी आरा । जिला – भोजपुर बिहार ।

पिन 802301    मोo  7903405469

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