धुन से सुनगुन मिलल बा भँवरन के रंग सातों खिलल तितलियन के लौट आइल चहक, चिरइयन के! फिर बगइचन के मन, मोजरियाइल अउर फसलन के देह गदराइल बन हँसल नदिया के कछार हँसल दिन तनी, अउर तनी उजराइल कुनमुनाइल मिजाज मौसम के दिन फिरल खेत केम खरिहानन के! मन के गुदरा दे, ऊ नजर लउकल या नया साल के असर लउकल जइसे उभरल पियास अँखियन में वइसे मुस्कान ऊ रसगर लउकल ओने आइलबसन्त बन ठन के एने फागुन खनन खनन खनके! उनसे का बइठि के बतियाइबि हम पहिले रूसब आ…
Read MoreCategory: भोजपुरी गीत
लागल लड़िका के बजार
लागल लड़िका के बजार एहि जुगवै में कीनैं लड़की के बाप एहि जुगवै में ! तीन-चार लाख रुपइया पुलिस-प्राइमरी के भैया साथे एगो मोटर कार एहि जुगवै में लागल लड़िका के बजार एहि जुगवै में! जवन जुनियर में पढ़ावै सात से आठ लाख फुरमावै कार दतवा चिआर एहि जुगवै में लागल लड़िका के बजार एहि जुगवै में! दस लाख टीजीटी के पार माई – बाबू मांगैं कार देदा लड़की के डाल एहि जुगवै में लागल लड़िका के बजार एहि जुगवै में! गरम पीजीटी के बाज़ार पनरह…
Read Moreजुठार मोरा कजरा बोला का पउला
बदरा के फेर पिया काहे मोहइला जुठार मोरा कजरा बोला का पउला। बिंदिया देखत रहे तोहरा नदानी झुमका गवाही देही बात मानी चनवो से बलमू ना जेरिको लजइला जुठार मोरा कजरा बोला का पउला। होठवा के लाली सुघर सकुचायल घायल पैजनिया हो सहमल बा पायल चुड़िया के खनखन से अईसन लोभइला जुठार मोरा कजरा बोला का पउला। मेंहदी महावर करैं न ठिठोली मधुरी बचनिया से बोलैं न बोली घुघटा बनी ढीठ कइसे उठइला जुठार मोरा कजरा बोला का पउला। केशिया के खुशबू करी शोर जॉनी केकर…
Read Moreभोरे मोरे अँगना
कि खनकेला जइसे, सुघर हाथे कँगना बिहँसे किरिनिया, किलक उठे ललना पसरि उठे रंग ना। भोरे मोरे अँगना॥ चंहके चिरइया, आई अँगनइया ललना के मइया लेलीं बलइया हुलसि उठे पग ना। भोरे मोरे अँगना॥ भोरहीं बबुआ,माँगे जोन्हइया दुअरा बहारी दुलारेलीं मइया बजाई घरे घुघुना। भोरे मोरे अँगना॥ जयशंकर प्रसाद द्विवेदी
Read Moreनयनवा से लोर झरे
हिया बेंधेले संवरिया के बाति नयनवाँ से लोर झरे ॥ जागल जबसे बा पहिली पिरितिया रहि – रहि उभरेले सँवरी सुरतिया मोहें निदिया न आई भर राति नयनवाँ से लोर झरे ॥ रहिया निरेखी बीतल दुपहरिया मन मुरुझाई जाय लखते दुवरिया बुला आई जाँय रतिओ – बिराती नयनवाँ से लोर झरे ॥ हुन टुन ननदी के गभिया सुनाला मुसुकी से ओकरा बोखार चढ़ि जाला उहो डाहेले सवतिया के भाँति नयनवाँ से लोर झरे ॥ हिया बेंधेले संवरिया के बाति नयनवाँ से लोर झरे ॥ जयशंकर…
Read Moreचुनरिया ए बालम
तिकवेले भरि भरि नजरिया ए बालम रंगब रउरे रंग मे चुनरिया ए बालम ॥ तोपले तोपाई न, लक़दक़ सेहरा करबे निबाह जब लागल इ लहरा निकलब जब तोहरी डहरिया ए बालम ॥ रंगब रउरे रंग मे चुनरिया ए बालम ॥ करके करेज सभ उजरल महलिया सून कई गउवाँ के साँकर गलिया चलि अइली तोहरी दुवरिया ए बालम ॥ रंगब रउरे रंग मे चुनरिया ए बालम ॥ खनका के कँगना उड़ी जाई सुगना अचके पसर जाई , लोर भरि अँगना बिछी जब ललकी सेजरिया ए बालम ॥ रंगब…
Read Moreगीत
जानके केहू आहत कईल जान के तान के तनके तनके नयन बान के केस छितरावत घेरत गगन में घटा फूल अस कोमल अंगन के अजबे छटा फूल उपमण्डल चेहरा लगे चान के नाम ओठन पर आंखिन में सूरत बसल आस तूरत ना पूरत जरूरत असल ओही मूरत के देवी जपी मान के घाव उसुका के मुसुका के मारत रहे प्रान ओही के पल पल पुकारत रहे चैन जारत उजारत जे असमान के लोक रीति के कवन बात संजोग के खुस बा सोमेश लेके कठिन रोग के…
Read Moreबिजुरिया हाय पड़ल बदरा का पाले
विधना का लिखना पर जरि जरि बुताले। बिजुरिया हाय पड़ल बदरा का पाले.. बिचरत चरिवातन पर दूर दूर रोले आवत छावत अन्हार अकड़ि अकड़ि बोले लखि के कुलबोरन के लोरन नहाले बिजुरिया हाय पड़ल बदरा का पाले.. असमय अरियात रहनि समझ में न आवे उमरत बेढंग बान घेरी के चलावे घाव घोर मनवा के तनवा के शाले बिजुरिया हाय पड़ल बदरा का पाले.. करकत दरकत करेज आसमान फाटे छूटत चिनगी जिनगी रहि रहि दिन काटे चमके दमके सोमेश लमके नहाले। बिजुरिया हाय पड़ल बदरा का पाले.. …
Read Moreपहुना भइल जिनगी
कब दरक गइल जियरा उधियाइल भिनुसहरा अब टोवत बेवाई सभे अहमक़ कहाई । साटल पेवना भइल जिनगी ॥ घाव बाटे जियतार टकटोरत बार बार उहाँ उजार खोरिया देखीं जवने ओरिया काँच खेलवना भइल जिनगी ॥ बड़की बिटिया सयान सभे उझिलत गियान दाना ला मोहताज कइसे चली राज काज ओद लगवना भइल जिनगी ॥ माँग बहोरि आंखि नम पायल बाजल छमाछम केहरो मन के खटास टूटि बिखरल बा आस बिसरल चूवना भइल जिनगी ॥ घरे खलिहा सिकउती इचिको नइखे बपउती कहवाँ बाटे चउपाल भर गउवाँ बा बेहाल…
Read Moreमाथे कS सिङार बाबूजी
बाटें भरि भरि के आपन दुलार बाबूजी । तोहीं हमनी के माथे कS सिङार बाबूजी ॥ सभके नियमित जगावें नेह बचवन पर लुटावें करें नेहिया के बारिस हर बार बाबूजी ॥ तोहीं हमनी के….. दरदिया सिरहीं उठावें हँसि बिहँसि के दुलरावें कइने दिन रात आपन निसार बाबूजी ॥ तोहीं हमनी के….. बीपत कइसनो लहरे उनके समने न ठहरे सहलें समय क मार , हर बार बाबूजी ॥ तोहीं हमनी के….. जयशंकर प्रसाद द्विवेदी
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