कबले होइहं गवनवा हमार

कबले होइहं गवनवा हमार भउजी। बाटे मौसम मे आइल खुमार भउजी।   बसंती हवा चले देहीयां दुखाता। कोइलर के बोलियो माहुर बुझाता। नीक लागे ना पायल झंकार भउजी। कबले होइहं गवनवा हमार भउजी।   सरसो के खेतवा मता के पिअराइल। आमन के बगिया बा खूबे मउराइल। सून्न लाग$ता सगरो जवार भउजी। कबले होइहं गवनवा हमार भउजी।   अपने बहिन से  बियाह रचवइलू। ओकरे बाद आजू ले ना बोलवलू। भइल फागुन मे हमके बुखार भउजी। कबले होइहें गवनवा हमार भउजी।   अब गवना करा द तोहार गुन गाइब। लइकन के तोहरे…

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जेब कट गइल थाने में

एक दिन गइली रपट लिखावे , घबड़ाइल कुछ माने में । का बतलाईं ये भइया मोर जेब कट गइल थाने में । मुंशी अउर दीवान भी रहलन , थाना के परधान भी रहलन । दु एक लोग महान भी रहलन,कुछ मुजलिम मेहमान भी रहलन आँख मुदाइल भागल अइलीं , गइलीं चाय दुकाने में । का बतलाईं ये भइया मोर जेब कट गइल थाने में । रह गइलीं बुड़त उतिरात , कहीं त कहले बिगड़े बात । देखते देखत अस उत्पात , ओरी क पानी बड़ेरी प जात । चाय पियइलीं…

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बबुआ बोलता ना

कहवाँ से आवैला कवन ठाँउ जइबा,बबुआ बोलता ना, के हो दिहलें तोहके बनवास, बबुआ बोलता ना!   कवने करनवाँ बतावा अइला बनवाँ? कोने कोने घूमला भंवरवा जइसे मनवाँ कउनी हो नगरिया में अंजोरिया नाही भावै, बबुआ बोलता ना, कहवाँ रात भावै बरहो मास, बबुआ बोलता ना!   रूठि गइलीं रिधि-सिधि चललीं रिसियाइ के कउनी हो नगरिया मे अगिया लगाइ के कहवाँ के लोगवा के भोगवा नाही भावे, बबुआ बोलता ना, दिहलै तोहके घरवा से निकास, बबुआ बोलता ना!   बिधना जरठ मति अटपट कइलै रे किया कवनों भूल तीनों मूरति…

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कजरी

पवन झकझोरे बालम मोरे। नन्ही नन्ही पनिया के बुनिया पलकिया पर ढोय ढोय बदरी बदन प‘ गिरावेले कोंवर अंग टोय टोय हँसले रहउँ ना बरेला गुदरउँना सरब अंग बोरे बालम मोरे। नासा भँहु तानेला अकसवा में बोरो लागे जरत बुतात बा धुआँ धुआँ सोरहो सिंगारवा कि बूँन बूँन अँसुआ झुरात बा लोर झरे अँखिया बरवनी के पँखिया हिलेले कोरे कोरे बालम मोरे। सभ्यता समर काटे चिउटी देखत तोर लाजहीन दुनिया कहीं उड़े पल्ला कहीं अँचरा बदरिया के नीक ना रहनिया चम चम बिजुरी कमलदल अँगुरी फोरेले पोरे पोरे बालम मोरे।…

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गीत

हम गइलीं चउकठि के लवट अइलीं गांव । काली आ कमइछा बाबा बरम्ह के ठांव। हम—— केकरा से बोलतीं आ केके देख हँसतीं कवना बिधि जियरा के गम-दुख अंकतीं सकदम अरथ सबद फइलांव। हम—- धनि हो नहर तूं बांगर धनखरलू जहाँ उड़े धूर तहाँ कमल उगवलू बाकी खोजले न मिले बाग बड़की के छांव। हम— थनि भूमि भूखले न हमरा के रखलू मन के पसन्द तवन कवर खियवलू मन्दिरो से ढेर तोर खँड़हर नांव। हम—- कलम खबरदार झूठ जदी बोललू माँगि के कितबिया उधार तुहूं पढ़लू अइसना सहिरदयी के हम…

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हमार बिरना

जेई पर भइलन शहीद हज़ार बिरना छोड़िहैं वनके ना तनिको हमार बिरना॥   आगे बढ़ी जब चीन पाकिस्तान बिरना मरिहें छीन लिहें सबके परान बिरना । छोड़िहैं वनके ना तनिको हमार बिरना॥   जम्मू से लेके हमार कन्या कुमारी सिन्ध से लेके बंग्ला हमरी दुआरी एक भारत एक धरती हमार बिरना। छोड़िहैं वनके ना तनिको हमार बिरना॥   अलगै बा भाषा अलगै हमरी बा बोली प्यार से पगल हम सबही के टोली आँख लिहैं दुश्मन कै निकार बिरना। छोड़िहैं वनके ना तनिको हमार बिरना॥   गीता कुरान हमरै बसल परान…

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लोरी गीत

जाईं हम लोभाय हो, बबुअवा के मुसुकी पर। केई पुचकारे, केई अंगे लगावेले अंगे लगावेले, अंगे लगावेले 2 केकरा अँचरवा नीचे,2 जालें लुकाय हो बबुअवा के मुसुकी पर। जाईं हम लोभाय हो, बबुअवा के मुसुकी पर।   माई पुचकारे, बाबू अंगे लगावेले अंगे लगावेले, अंगे लगावेले 2 दादी के अँचरवा नीचे,2 जालें लुकाय हो बबुअवा के मुसुकी पर। जाईं हम लोभाय हो, बबुअवा के मुसुकी पर।   केई किलकावे, केई लहकि बोलावेले लहकि बोलावेले, लहकि बोलावेले 2 केकरा सुरतिया देखि,2 जालें अघाय हो बबुअवा के मुसुकी पर। जाईं हम लोभाय…

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वोट माँगे अइले हो

अयोध्या मे गोली चलववले जरिको न सरमइले हो एकरा के लाजो ना लागे वोट माँगे अइले हो। महजिद पर भोंपू लगववलें मंदिर के बंद करवलें हो एकरा के लाजो ना लागे वोट माँगे अइले हो। चाचा बाबू हिल मिल के खूबै लूट मचवलें हो एकरा के लाजो ना लागे वोट माँगे अइले हो। मंचो पर बाबू धकिअवले हिंदुन के गरिअवलें हो एकरा के लाजो ना लागे वोट माँगे अइले हो। सैफई में नाच करवले पइसा खूब बहवले हो एकरा के लाजो ना लागे वोट माँगे अइले हो। बदमासन के टिकस…

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गीत

दिन धोइ साफ करे नभ इसलेटिया तारा गीत लिखि चान करे दसखतिया। तारा के पढ़ी तरई हो करुन कहानियाँ लिपि अनजान मुँहे नाही बा जबनियाँ देखे के बा खाली ओरि अन्त हीन गीतिया ।तारा लोग कहे लोक यह आँख का सिवान में छोट बड़ निगिचा आ दूर आसमान में हम कहीं नाहीं ई करेजवा के बतिया।तारा जिन ताकअ तरई आ चान ई बेमारी ह हम कहीं देखे द सुकून के इयारी ह उठत बनत नाहीं लागे असकतिया। तारा आनन्द संधिदूत 

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गीत

लाले ओठवा ए नन्हकु सूरूज देव ,लाले  तोहरे गालवा .. खेलत कूदत तुहो रहल बाबू सगरी अकासवा .. नील रंग आकासवा  से झांके ल  अजगुत बाड़े तोहर रुपवा .. कबहुँ  झांकेल केरवा के पतवा ,कबहूँ झाकेल नरियरवा . कबहुँ खेलल बबुआ सरोवरवा  कूदि -कूदि देखावेल रूपवा .. जब हम पकरिना तोहरा ए बचवा  भागल  हमरा से दूरवा .. तोहरे रूपवा से भइनी अभिभूतवा ठानेनी छठ वरतिया .. आपन बाल रूप के दिह दरसनवा खोलेनी मन के केवरिया .. खेलल पनिया में दौरेनी हम नाही तू आवेले पकड़वा बरष भर से…

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