गीत

राजा हमरा  से नेहिया लगवले रही करी  कतनो  खता  पर बनवले रही राजा हमरा से नेहिया……….. प्यार ही प्यार से ,प्यार ही प्यार में जीवन रंग फइले ई सगरो संसार में रउआ प्यार के अलख ई जगवले रही राजा हमरा से नेहिया……….. कोई कुछ भी कहे,जन ध्यान रउआ दींही चाहे कुछ भी हो जाये, आनंद रउआ लिंही रोज-रोज अइसन जीनगी ई खिलवले रही राजा हमरा से नेहिया……….. सोनू के रउआ राजा ,मान लिही  बतिया जुग-जुग जीही लाल बिहारी लाल संघतिया सालों भर वेलेटाइन डे के मौसम बनवले रही राजा हमरा से नेहिया……….. गीतकार…

Read More

बिदाई गीत

सीकिया कै डड़िया फनाइदा मोरे बिरनू भिनही चलब आपन घाट हो मियना के परदा उठाई के जो निरेखब लऊकी आपन छुटल बाट हो आमवा तरे अब न कुहुँकि कोयलिया सूखि जाई महुआ कै पाग हो चिरई के जियरा में अगिया लगाई कै छोड़ि जाइब गँऊआ जवार हो । – श्लेष अलंकार

Read More

गीत

दिन धोइ साफ करे नभ इसलेटिया तारा गीत लिखि चान करे दसखतिया। तारा के पढ़ी तरई हो करुन कहानियाँ लिपि अनजान मुँहे नाही बा जबनियाँ देखे के बा खाली ओरि अन्त हीन गीतिया ।तारा लोग कहे लोक यह आँख का सिवान में छोट बड़ निगिचा आ दूर आसमान में हम कहीं नाहीं ई करेजवा के बतिया।तारा जिन ताकअ तरई आ चान ई बेमारी ह हम कहीं देखे द सुकून के इयारी ह उठत बनत नाहीं लागे असकतिया। तारा आनन्द संधिदूत ।

Read More

माई जइसन होली माई

सारी, झुमका, टिकुली खातिर मेहरि करे लड़ाई। बाइक खातिर रूसल लरिका, हिस्सा खातिर भाई। स्वारथ साधत हीत-मीत सभ जे के आपन बुझनीं, बबुआ काहें मुँहवाँ सूखल पुछलसि खाली माई। माई जइसन होली माई। चढ़ल उधारी घरखरची के, करजा लेइ दवाई। कबहूँ सूखा, कबो बाढ़ि से खेती गइल बिलाई। सबहिन जाने हूक हिया के, पलटि हाल ना पूछे, उरिन काहि बिधि बबुआ होइहें ? गहिर सोच में माई। माई जइसन होली माई। धइ माथे पर हाथ असीसे आँखिन लोर बहाई। अँचरा से पोंछे लिलार के देव-पितर गोहराई। बबुआ हो दुबराइल बाड़S,…

Read More

पुतरी में बसेला परान

सोने के हिड़ोलवा पे काठ के ललनवा झुलना झूलेला सारी रात हो… निरहू गइल बाड़े पूरबी बनिजिया छोड़ि के गँऊआ जवार हो… माई बेचारी लुगरिया के तरसेली रोई रोई करेली बिहान हो… गुहवा में लोटेली टुटही खटियवा पर.. भिनही से हो गइलै साँझ हो… चिठिया न पाती न कऊनो खबरिया पुतरी में बसेला परान हो…। – श्लेष अलंकार

Read More

कुररे काग भदेस

अब के सगुन कही मोरी सखिया, कुररे काग भदेस। ना अँगनइया गाछि चनन की, सास-ननद परबीना। कबके मरल आँखि के पानी लोक लाज कतहीं ना, ईरिखे गोतिन जरि न बुताली, उलटा सब परिवेस। बनटेसू की छाँहि कटीली असबस जिया बुझाला। भुतहा पीपर छाँहि चुरावे, बरगद उमटा जाला, बिरिछ-बिरिछ पर बदुरी झूले उलटपंथ दरवेस। बिसर रहल गनगौर महादे’ मनता कवन पुजावे। सबहीं ढेल-ढुकुर महँकारे, परले पीठ खुजावे, नदियन के अमरित पानी में, माहुर केरि अनेस। खर-खरिहानी दंड मुसरिया परल बढ़ावन ताने। बिसुनचुटकिया केहु न बूझे पवनी-जन के जाने? भूखे पेटे आल्हा…

Read More

माई

कि जग में माई बिना केहुए सहाई ना होई केहु केतनो दुलारी बाकि माई ना होई॥   कि सुख दुःख रत्तिया दिनवा सहली कबहीं मुह से कुछ ना कहली कि उनका अंचरा से बढ़ी के रजाई ना होई केहु केतनो दुलारी बाकि माई ना होई॥   कि अपने सुखल पाकल खाके रखली सभ के भरम बचा के कि उनकर रोवाँ जे दुखाई त भलाई ना होई केहु कतनो दुलारी बाकि माई ना होई॥   कि देवता देवी रोज मनावे हमरे खातिर रोवे गावे उनका नेहिया से बढ़ी के दवाई ना…

Read More

अइहें नू चान

कब अइहें अटरिया प चान कि मनवाँ झवान हो गइल। अँगना में आस के बिरवा लगवलीं। कतिने ना लोभ-मोह जुगत जुगवलीं। पसरल हजारन बितान, त छतियो उतान हो गइल। पारि रेघारी रचेलीं असमनवाँ, खँचियन जोन्ही आँकीं, सीतल पवनवाँ, अगनित सपन उड़ान, सभनि के जुटान हो गइल। घरियो भ चुरुआ में सुख का समाला? जतिने समेटीं तले गरि-गरि जाला। भइल ह मन हलकान, सँचलको जिआन हो गइल। कारी अन्हियरिया के अनगुढ़ बतिया। रहता अजानल ह पगे-पगे घतिया। साँसत में परल परान, जिनिगिया धसान हो गइल। कब अइहें अटरिया प चान कि…

Read More

सरस्वती बंदना

जय हो मइया शारदा, होसवा बिसारी द। हम निरगुनिया अधम अभिमानी तोहरी किरितिया के कइसे बखानी मोह अगियान सब जरी से उजारी द। जय —   अरगवों के गोदी मे उठवलू नाही जानी हमरा के काहे बिसरवलु कि हमरो के खोली के पलकिया निहारी द। जय —   केहु ना सहायी माई तोहके पुकारी राति दिन तोहरे डगरिया निहारी कि हमरो दुआर कबों हंस के उतारि द। जय —   चारु ओर छवले गहन अंधिअरिया जाईं कहा सूझे नाही कवनों डगरिया कि हिया बीचे दिया तनि ज्ञान के तू बारि…

Read More

कन्हइया हो! तनी माखन तS खा लS।

भुखिया बिसारि रोज जमुना नहा लS। कन्हइया हो! तनी माखन तS खा लS। लरिका गुवालन के रोज- रोज तोहे भरमा लिआ जालें, हम लागीं जोहे देखेलS हमके त कुंजन लुका लS। रधिकी ह अधिकी ऊ अधिका बनाई छाछ देई चिरूआ भरि तहके पोल्हाई ओकरा बोलवला पर कोस- कोस जालS। सँझिया- बिहान नाहीं होला पढ़ाई गलियन में घूमि- घूमि ठानS लड़ाई मनसुख बदे काहें रोजे पिटालS? घर के ना खालS, करे जालS चोरी ओरहन सुनावेली घर- घर के गोरी मइया क, बाबा के इज्जति बचा लS। संगीत सुभाष, मुसहरी, गोपालगंज।

Read More