भउजी के पुजारी

भइया बनी गइले भउजी के पुजारी भाई जी घर में रही के कइसे जिनगी गुजारी भाई जी, उनके खाता में भइया के आवे कुल्ही कमाई, बिन दावा के बिलखत बाड़ी घर में बुढ़िया माई, दीहली स्वर्ग जइसन घर के उजारी भाई जी, भइया बनी गइले भउजी के पुजारी भाई जी, दाना दवाई कइले बाड़ी रूचत नइखे खाना, तोर-मोर करी लडत बाड़ी माई से रोजाना, दुखवा मिलत बाटे कतना हम उचारी भाई जी, भइया बनी गइले भउजी के पुजारी भाई जी, बाबूजी के हुक से उनके जान गइल अखडेरे, सोंच के…

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लॉक डाउन के कर समर्थन

लॉक डाउन के कर समर्थन घर में रह बंद ना त काल आई हो , तत्काल आई हो   सोशल डिस्टेंसिंग के भैया, मान अब त बात हो छोड़ कईल नादानी ना त, हो जाई घर में घात हो मान बात सरकार के , घर में रह बंद ना काल आई हो, तत्काल आई हो. . . . .   काम होखे बहुत जरूरी, तबहीं जा बाजार हो हित-नाता से दूर रह, तब ना होइब बीमार हो नियम कानून पर ध्यान द, हो जा अब पाबंद ना काल आई हो…

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ए… बालम!

फूल झरै तोहरे बोलियाँ ए…बालम । तब तौ कहेय हम कुंईयाँ न खोदबैय अब काँहे पनिया भरायेव… ए…बालम । तब तौ कहेय हम खेती न करबैय अब काँहे कटनी कटवायेव… ए…बालम । तब तौ कहेव हम सेजिया न सोईबैय अब काँहे कुण्डी लगायेव… ए…बालम । – श्लेष अलंकार

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कोरोना

अइसन फइलल कोरोना हो रामा, जीएल भइल मुश्किल। चीन से आइल इ दुनियाँ मे छाईल, बंद भइल बा कतहुँ आइल जाईल, कइसन रूप डरौंना हो रामा . जीएल0- कहीं लाकडाउन,कहीं कर्फ्यू लगवलस, घर घर मे सबके ई बंदी बनवलस, देखत लगत घिनौंना हो रामा जीएल0 सुनिला कि छुअला से इ बढ़ी जाला, अँगुरी पकड़ि मुँहवा में समाला, बनि जाला गले क फसौंना हो रामा जीएल0 दिन दूना रात चौगुना बढ़त बा, जहाँ देखा उहाँ एकर पारा चढ़त बा, मरतो नइखीं मर्किनौंना हो रामा जीएल0 एकरा से बचे बदे एकै उपइया, एक…

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सखि मोरे दुअरे अइलें बसंत दुलहा

मन के तार से छुवइलें, बसंत दुलहा सखि मोरे दुअरे अइलें, बसंत दुलहा।   खोरिया बहारी गलइचा बिछाइले ऊँचे-ऊँच पिढ़ना उनुके बइठाइले लाले फुलवा फुलइलें, बसंत दुलहा।   मेंहदी महावर हम उनुका चढ़ाइले फूल के सेजरिया हँसि के सजाइले मन के बगिया महकइलें, बसंत दुलहा।   भँवरा भँवरिया गीतिया कढ़ावेलें हुलसि-हुलसि के बजनवा बजावेलें अचके मन बेल्हमइलें, बसंत दुलहा।   आव तू हो सखिया आव तू सहेलिया मंगल गीतिया के कढ़वतु महलिया रूप-सिंधु में नहइलें, बसंत दुलहा।   जयशंकर प्रसाद द्विवेदी

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गीत

राजा हमरा  से नेहिया लगवले रही करी  कतनो  खता  पर बनवले रही राजा हमरा से नेहिया……….. प्यार ही प्यार से ,प्यार ही प्यार में जीवन रंग फइले ई सगरो संसार में रउआ प्यार के अलख ई जगवले रही राजा हमरा से नेहिया……….. कोई कुछ भी कहे,जन ध्यान रउआ दींही चाहे कुछ भी हो जाये, आनंद रउआ लिंही रोज-रोज अइसन जीनगी ई खिलवले रही राजा हमरा से नेहिया……….. सोनू के रउआ राजा ,मान लिही  बतिया जुग-जुग जीही लाल बिहारी लाल संघतिया सालों भर वेलेटाइन डे के मौसम बनवले रही राजा हमरा से नेहिया……….. गीतकार…

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बिदाई गीत

सीकिया कै डड़िया फनाइदा मोरे बिरनू भिनही चलब आपन घाट हो मियना के परदा उठाई के जो निरेखब लऊकी आपन छुटल बाट हो आमवा तरे अब न कुहुँकि कोयलिया सूखि जाई महुआ कै पाग हो चिरई के जियरा में अगिया लगाई कै छोड़ि जाइब गँऊआ जवार हो । – श्लेष अलंकार

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गीत

दिन धोइ साफ करे नभ इसलेटिया तारा गीत लिखि चान करे दसखतिया। तारा के पढ़ी तरई हो करुन कहानियाँ लिपि अनजान मुँहे नाही बा जबनियाँ देखे के बा खाली ओरि अन्त हीन गीतिया ।तारा लोग कहे लोक यह आँख का सिवान में छोट बड़ निगिचा आ दूर आसमान में हम कहीं नाहीं ई करेजवा के बतिया।तारा जिन ताकअ तरई आ चान ई बेमारी ह हम कहीं देखे द सुकून के इयारी ह उठत बनत नाहीं लागे असकतिया। तारा आनन्द संधिदूत ।

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माई जइसन होली माई

सारी, झुमका, टिकुली खातिर मेहरि करे लड़ाई। बाइक खातिर रूसल लरिका, हिस्सा खातिर भाई। स्वारथ साधत हीत-मीत सभ जे के आपन बुझनीं, बबुआ काहें मुँहवाँ सूखल पुछलसि खाली माई। माई जइसन होली माई। चढ़ल उधारी घरखरची के, करजा लेइ दवाई। कबहूँ सूखा, कबो बाढ़ि से खेती गइल बिलाई। सबहिन जाने हूक हिया के, पलटि हाल ना पूछे, उरिन काहि बिधि बबुआ होइहें ? गहिर सोच में माई। माई जइसन होली माई। धइ माथे पर हाथ असीसे आँखिन लोर बहाई। अँचरा से पोंछे लिलार के देव-पितर गोहराई। बबुआ हो दुबराइल बाड़S,…

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पुतरी में बसेला परान

सोने के हिड़ोलवा पे काठ के ललनवा झुलना झूलेला सारी रात हो… निरहू गइल बाड़े पूरबी बनिजिया छोड़ि के गँऊआ जवार हो… माई बेचारी लुगरिया के तरसेली रोई रोई करेली बिहान हो… गुहवा में लोटेली टुटही खटियवा पर.. भिनही से हो गइलै साँझ हो… चिठिया न पाती न कऊनो खबरिया पुतरी में बसेला परान हो…। – श्लेष अलंकार

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