कजरी

बदरी आवऽ हमरी नगरी, नजरी डगरी ताकति बा। सूखल पनघट, पोखर, कुइयाँ असरा गिरल चिताने भुइयाँ छलके नाहीं जल से गगरी, नजरी डगरी ताकति बा। बूढ़ लगे सब बिरिछ पात बिन ठठरी सेवे दिनवाँ गिन-गिन अइतू फिनु बन्हि जाइत पगरी, नजरी डगरी ताकति बा। धरती के कोरा अँचरा में डालि खोंइछ बइठा पँजरा में भरितू मांग पिन्हइतू मुनरी, नजरी डगरी ताकति बा। छमछम छागल आजु बजावत पुरुआ के संग नाचत गावत आवऽ, तनि जा हरिअर चदरी, नजरी डगरी ताकति बा। संगीत सुभाष, मुसहरी, गोपालगंज।

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गीत

कर जोरि बिनवे दुलारी बेटी, बाबू जनि काटीं हरिअर गाछि पलंगिया का कारन जी। आम, महुआ, पाकर, गुलर, बर जी, बाबा निमिया, निबुइया, जमुनिया धरतिया के छाजन जी। मथवा क अँचरा सरकत खने जी, डलिहें सुरुजमल कुदीठि त माई सकुचाई जइहें जी। सजना अँगनवाँ दुरूह काज हो, धिया, दिनभर खटि-मरि थकबू त रयनि का नींनि लेबू हो? कहवाँ सुतइबू गोदिलवा नू हो, धिया, कहवाँ सुतइबू सजन केरि चरन दबइबू नू हो। कीनि दीं बाबू हँसुअवा नू जी, बाबू, घने-बने खरई कटाइबि, तरई बनाइबि जी। लीपि-पोति घरवा अँगनवाँ क जी, बाबू,…

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एहि मटिये के नगद-उधार सखिया

बाटे माटी मुर्दार-जियतार सखिया एहि मटिये के नगद-उधार सखिया। मटिये में जमलीं आ मटिये में मिललीं मटिये के माल-असबाब हम रहलीं फेंके मटिये के चार गो कँहार सखिया । सँचि-सँचि सीत-घाम बरखा देखाइ के के राखे हमके गलाइ के सुखाइ के जइसे डाले कोहड़उरी- अचार सखिया । कहे भर अनुमति गाइ-गूइ चल दीं गीत गीतमलवा में एकठे पिरोइ दीं अउर कुछ नाही बस-अख्तियार सखिया । कइसे कहीं कहहूँ न देत बाटे जिनगी मउअतो से ढेर ई कड़ेर काटे जिनगी नाहीं जिनगी के कवनो एतबार सखिया । आनन्द संधिदूत

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चेतावनी पाकिस्तान के

अइसन पड़ोसी मिलल,निपटे अनाड़ी धीकल। सीजफायर तुड़ के,बढ़ावत हमार खीस बा।। खइला- छइला बिनु टुटल,चीन के हांथे बा बिकल। भाड़ा के गोहार प, बनत चार-सौ-बीस बा।। बने ला अमीर चंद,घर में करे मुसरी दंड। भोजुआ तेली बनत, भोज महाराज बा।। करजा में डुबल आकंठ, तबहुं अतना घमंड। एटम बम के धमकी से,लोग के डेरावत बा।। लुकी-छीपी करे घात,लात के देवता ना माने ना बात। आईके सीमा पररोज, रेड़ ई बेसाहता।। पंच के सुनेना बात, करे राड़ दिन रात। असहीं बिनास आपन,अपने बोलावता।। धरती के स्वर्ग पर,पपियन के भेजी कर। नरको…

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काम बोलेला हो भाई काम बोलेला

काम  बोलेला  हो भाई काम बोलेला अब ले जे ना भइल पांच साल में हो गइल काम  बोलेला  हो भाई काम बोलेला भारत के दुनिया में चारो ओर लहराइल परचम आईल निवेश विदेश से तब,बढ़ गइल दमखम चारो ओऱ एह देश में खिल गइल कमल काम  बोलेला  हो भाई काम बोलेला स्वच्छ भारत के अब सपना,देखी भइल सकार हर गांव हर घर-घर में ,शौचालय के भरमार दिन रात खूब काम करे  ,करे नहीं आराम काम  बोलेला  हो भाई काम बोलेला रोड बनल चारो देश में ,चलल बुलेट ट्रेन तीन तलाक पर अब देखी…

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परसुराम सुमिरन

जमदग्नि सुत के सजी दरबार सखिया परसुराम जी के फिरो पुकार सखिया ॥ श्रेष्ठ रिसिन मे बाटे जेकर किरितिया बाबू के खातिर जेकर चर्चित पिरितिया उनका हिया के अँगना मे उतार सखिया ॥ कन्हिया सोहे जेकरे तिरिया धनुहिया हाथे फरुहा पुरहर शास्त्रन के रहिया उनका पउवाँ के लोर से पखार सखिया ॥ मही बिहीन अरि से कइने धरतिया लौटि फेरु आईं बाबा धूमिल थतिया अहो हर बेरी उनही के निहार सखिया ॥ जयशंकर प्रसाद द्विवेदी

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माई रोवत बाड़ी

भोरे भीनसहरे धsके,भर अँकवारी माई रोवत बाड़ी, बबुनी के करत विदाई माई रोवत बाड़ी। सखी आ सहेली सभके अखियाँ लोराइल, छूटे के साथ बेरा जब समय नियराइल। ससुरा में रहिहs नींक से, कानवाँ में माई सिखावत बाड़ी… बबुनी के करत विदाई माई रोवत बाड़ी। देखे सुने वाला लोग के हो फाटेला करेजा, ओही में कहे केहू डोली हाली से ले जा। कुछ देर ठहर जा कहरु, हाथ जोरि माई कहत बाड़ी… बबुनी के करत विदाई माई रोवत बाड़ी। कइसे मनावल जाव दीपक सोचs तरीका, चेहरा के रंग देखs हो पर…

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चुनउवा

सोझवें ओकतिया बतावेला चुनउवा नीमन-बाउर खेल खेलवावेला चुनउवा॥ कटिया करवावे,खेते खेत घुमावेला लहनी सरिआई के बोझ बनवावेला गउवाँ में चकरी पिसवावेला चुनउवा॥   तारु आ तरवा, दूनों पिराये लागल मन के उछाह, घामे थिराये लागल सबही से छिपनी धोवावेला चुनउवा॥   मुंहवाँ सुखाइल बाटे, ओठवा झुराइल कई घरी बीतल, पनियों ना भेंटाइल दिनही में चनरमा देखावेला चुनउवा॥   हाथ ज़ोरवावेला गोड़ धरवावेला टुटही मड़इया आ दुवरा देखावेला तिनगी वाला नाच नचवावेला चुनउवा॥   जयशंकर प्रसाद द्विवेदी

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घुंघुटा से झाँके जइसे चंदा रे बदलिया

कँवल कदलिया जस मुखड़ा के ललिया घुंघुटा से झाँके जइसे चंदा रे बदलिया। झिलमिल तारा से सजल सिलिक सरिया लिलरा प चमके बिंदी जइसे रे बिजुरिया। ओठवा के लाली जइसे पंखुड़ी गुलाब के गोरिया लाजालु काहे दाँतावा से दाब के। गलिया के चुमे तोहार कानवा के बलिया घुंघुटा से झाँके जइसे चंदा रे बदलिया।   कँवल कदलिया जस मुखड़ा के ललिया घुंघुटा से झाँके जइसे चंदा रे बदलिया।   देवलोक के परी तु अइलु आसमान से दिलवा में घुस गइलु कवना विमान से। सावन घटा तोहार लमी काली केश हो…

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फागुन महीनवां

सरसों क कटिया-करत गोरी बतिया घरवां ना बलमू-कटेले सूनी रतिया फागुन महीनवां-बलम कलकतिया अगिया लगल तन-जरे मोरि छतिया चहके चिरईया-बोलेला बन मोरवा कुहूँके कोयलिया-निगोरी पिछवरवाँ आधी-आधी रतिया-उदासल$महोखवा बिहरेले छतिया-फगुनवां क रतिया पतझर पतईया-झरेले-झर अंखिया चढ़ली उमिरिया-झुराले रस देहियां आवें अनवईया-बोलावें मोरि सखियां जोहत डगरिया-बेकल दिन-रतिया बहे फगुनहटा-उड़ावेला अंचरवा फूले फूल फूलवा-बोलावत भँवरवा आवा हे सुगनवां-उदास मोरि खोतवा अमवा बऊर रस-लागे ना टिकोरवा राकेश कुमार पाण्डेय हुरमुजपुर,सादात गाजीपुर, उत्तर प्रदेश

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