परसुराम सुमिरन

जमदग्नि सुत के सजी दरबार सखिया परसुराम जी के फिरो पुकार सखिया ॥ श्रेष्ठ रिसिन मे बाटे जेकर किरितिया बाबू के खातिर जेकर चर्चित पिरितिया उनका हिया के अँगना मे उतार सखिया ॥ कन्हिया सोहे जेकरे तिरिया धनुहिया हाथे फरुहा पुरहर शास्त्रन के रहिया उनका पउवाँ के लोर से पखार सखिया ॥ मही बिहीन अरि से कइने धरतिया लौटि फेरु आईं बाबा धूमिल थतिया अहो हर बेरी उनही के निहार सखिया ॥ जयशंकर प्रसाद द्विवेदी

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माई रोवत बाड़ी

भोरे भीनसहरे धsके,भर अँकवारी माई रोवत बाड़ी, बबुनी के करत विदाई माई रोवत बाड़ी। सखी आ सहेली सभके अखियाँ लोराइल, छूटे के साथ बेरा जब समय नियराइल। ससुरा में रहिहs नींक से, कानवाँ में माई सिखावत बाड़ी… बबुनी के करत विदाई माई रोवत बाड़ी। देखे सुने वाला लोग के हो फाटेला करेजा, ओही में कहे केहू डोली हाली से ले जा। कुछ देर ठहर जा कहरु, हाथ जोरि माई कहत बाड़ी… बबुनी के करत विदाई माई रोवत बाड़ी। कइसे मनावल जाव दीपक सोचs तरीका, चेहरा के रंग देखs हो पर…

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चुनउवा

सोझवें ओकतिया बतावेला चुनउवा नीमन-बाउर खेल खेलवावेला चुनउवा॥ कटिया करवावे,खेते खेत घुमावेला लहनी सरिआई के बोझ बनवावेला गउवाँ में चकरी पिसवावेला चुनउवा॥   तारु आ तरवा, दूनों पिराये लागल मन के उछाह, घामे थिराये लागल सबही से छिपनी धोवावेला चुनउवा॥   मुंहवाँ सुखाइल बाटे, ओठवा झुराइल कई घरी बीतल, पनियों ना भेंटाइल दिनही में चनरमा देखावेला चुनउवा॥   हाथ ज़ोरवावेला गोड़ धरवावेला टुटही मड़इया आ दुवरा देखावेला तिनगी वाला नाच नचवावेला चुनउवा॥   जयशंकर प्रसाद द्विवेदी

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घुंघुटा से झाँके जइसे चंदा रे बदलिया

कँवल कदलिया जस मुखड़ा के ललिया घुंघुटा से झाँके जइसे चंदा रे बदलिया। झिलमिल तारा से सजल सिलिक सरिया लिलरा प चमके बिंदी जइसे रे बिजुरिया। ओठवा के लाली जइसे पंखुड़ी गुलाब के गोरिया लाजालु काहे दाँतावा से दाब के। गलिया के चुमे तोहार कानवा के बलिया घुंघुटा से झाँके जइसे चंदा रे बदलिया।   कँवल कदलिया जस मुखड़ा के ललिया घुंघुटा से झाँके जइसे चंदा रे बदलिया।   देवलोक के परी तु अइलु आसमान से दिलवा में घुस गइलु कवना विमान से। सावन घटा तोहार लमी काली केश हो…

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फागुन महीनवां

सरसों क कटिया-करत गोरी बतिया घरवां ना बलमू-कटेले सूनी रतिया फागुन महीनवां-बलम कलकतिया अगिया लगल तन-जरे मोरि छतिया चहके चिरईया-बोलेला बन मोरवा कुहूँके कोयलिया-निगोरी पिछवरवाँ आधी-आधी रतिया-उदासल$महोखवा बिहरेले छतिया-फगुनवां क रतिया पतझर पतईया-झरेले-झर अंखिया चढ़ली उमिरिया-झुराले रस देहियां आवें अनवईया-बोलावें मोरि सखियां जोहत डगरिया-बेकल दिन-रतिया बहे फगुनहटा-उड़ावेला अंचरवा फूले फूल फूलवा-बोलावत भँवरवा आवा हे सुगनवां-उदास मोरि खोतवा अमवा बऊर रस-लागे ना टिकोरवा राकेश कुमार पाण्डेय हुरमुजपुर,सादात गाजीपुर, उत्तर प्रदेश

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तहार सुधिया

आज कँगना खनका गइल,तहार सुधिया। मन के तार झनका गइल,तहार सुधिया॥   बहि रहल लोर संग नेह क खजाना बदरी बनल बा अंजोरिया के बहाना कान करकत झुमका भइल,तहार सुधिया॥ मन के तार झनका—–   एने-ओने हेरत मोहनी सुरतिया मनवाँ बसल बाटे रउरी मुरतिया अबकी बेर तिनका भइल,तहार सुधिया॥ मन के तार झनका—–   सपने में आइल रहल काँच निनियाँ अलसाइल लागल प्रेम के किरिनियाँ गरे लिपटी मनका भइल,तहार सुधिया॥ मन के तार झनका—–     जयशंकर प्रसाद द्विवेदी  

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जय शिव शंकर

बसहा बैलवा के शिव क के सवारी, तिहुँ लोक भ्रमण भोला करेले त्रिपुरारि।   औघड़ दानी हउँए सभका से उ निराला, जटा में गंगा मइया गरवा में सर्प माला। कष्ट मिटावे सभकर हउँए उ पापsहारी… तिहुँ लोक भ्रमण भोला करेले त्रिपुरारी।   क्षण में बना उ देले क्षण में बिगाड़ देले, खुश होले जब भोला सभ कुछ भर देले। धन दौलत सुख शांति देले घरs अटारी… तिहुँ लोक भ्रमण भोला करेले त्रिपुरारी।   कुपित होले जब उ खोलेले तीसरा अखियाँ, काँपे लागेला सभे केहूँ नाही पारे झकियाँ। मातल रहेले खाके…

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साँझवा बिहानवा

तहरे में डुबल रहेला साँझवा बिहानवा, तहरी विषय में बस सोचे हामार मानवा।   हटे के ना चाहेला हो सोझवा से ताहरा, एतना लगाव तोहसे भइल कइसे गाहरा। हामारा प देई दना तनिसा तू धेयानवा… तहरी विषय में बस सोचे हामार मानवा।   व्याकुल रहेला हरदम मिले खाती तोहसे, करेला लड़ाई हरमेश तोहरा खाती हमसे। बदलs इरादा अबो सुन लs वचनवा… तहरी विषय में बस सोचे हामार मानवा।   खुशी बहुते मिलेला हो तोहरा के देखी के, दीपक तिवारी कुछो कह तारे लिखी के। करs विचार ना त ले लs…

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फागुन, आव न हमरे गाँव

फागुन, आव न हमरे गाँव। अनमन हवा अकारथ डोले, पीपर थिर बनमुरुगी बोले, कहईं दूर सियारी लावलि, स्वारथ के कुछ दाँव। कोंच भरल महुवो उझंख तन, फेरल कवन लुकारि सबुज बन, झरकि गाछि पतई बिनु ठाढ़े, गुमसुम गाँव-गिराँव। काँटन के सोरी में पानी डालत रहलन साँझ-बिहानी उहई फूल दिलासा लिहले धउगल खलिहे पाँव। सनकेशी रानी अइली हऽ, कहवाँ कुछ बतिया पइली हऽ, गमी भरल मासूम नजर में छलकत दुख गहिराँव। अब ना बीरन खींचस चोटी, अब ना काटस चिबुक चिकोटी, कौन आँक गइलसि तबूत प बीरन के बड़ नाँव।   दिनेश…

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माटी में मिला देब पाकिस्तान के

काहे रे बामवा फोड़ले नतिया, अब पुलवामा में। छोड़ी ना तोहके भारत के लोगवा,भेजी पैजामा में काहे रे बामवा फोरले……….. घूसे ना देब तोहके, सीमा पे  हम हो कतनो लगइब दम,मानेब ना हम हो दनादन दागब गोली, बंद करब बुतखाना में काहे रे बामवा फोरले……….. मुँह में राम बगल में छुरी, अब नाही चली अब तू सुधर जा ना त मची खलबली करब एटैक हम भेजब बैक सीवानवा से  काहे रे बामवा फोरले……….. लाल बिहारी लाल कहे बतिया तू मान ल संध्या  संगम के तेवर अब तू जान ल  ना जे मनब माटी में…

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