कुररे काग भदेस

अब के सगुन कही मोरी सखिया, कुररे काग भदेस। ना अँगनइया गाछि चनन की, सास-ननद परबीना। कबके मरल आँखि के पानी लोक लाज कतहीं ना, ईरिखे गोतिन जरि न बुताली, उलटा सब परिवेस। बनटेसू की छाँहि कटीली असबस जिया बुझाला। भुतहा पीपर छाँहि चुरावे, बरगद उमटा जाला, बिरिछ-बिरिछ पर बदुरी झूले उलटपंथ दरवेस। बिसर रहल गनगौर महादे’ मनता कवन पुजावे। सबहीं ढेल-ढुकुर महँकारे, परले पीठ खुजावे, नदियन के अमरित पानी में, माहुर केरि अनेस। खर-खरिहानी दंड मुसरिया परल बढ़ावन ताने। बिसुनचुटकिया केहु न बूझे पवनी-जन के जाने? भूखे पेटे आल्हा…

Read More

माई

कि जग में माई बिना केहुए सहाई ना होई केहु केतनो दुलारी बाकि माई ना होई॥   कि सुख दुःख रत्तिया दिनवा सहली कबहीं मुह से कुछ ना कहली कि उनका अंचरा से बढ़ी के रजाई ना होई केहु केतनो दुलारी बाकि माई ना होई॥   कि अपने सुखल पाकल खाके रखली सभ के भरम बचा के कि उनकर रोवाँ जे दुखाई त भलाई ना होई केहु कतनो दुलारी बाकि माई ना होई॥   कि देवता देवी रोज मनावे हमरे खातिर रोवे गावे उनका नेहिया से बढ़ी के दवाई ना…

Read More

अइहें नू चान

कब अइहें अटरिया प चान कि मनवाँ झवान हो गइल। अँगना में आस के बिरवा लगवलीं। कतिने ना लोभ-मोह जुगत जुगवलीं। पसरल हजारन बितान, त छतियो उतान हो गइल। पारि रेघारी रचेलीं असमनवाँ, खँचियन जोन्ही आँकीं, सीतल पवनवाँ, अगनित सपन उड़ान, सभनि के जुटान हो गइल। घरियो भ चुरुआ में सुख का समाला? जतिने समेटीं तले गरि-गरि जाला। भइल ह मन हलकान, सँचलको जिआन हो गइल। कारी अन्हियरिया के अनगुढ़ बतिया। रहता अजानल ह पगे-पगे घतिया। साँसत में परल परान, जिनिगिया धसान हो गइल। कब अइहें अटरिया प चान कि…

Read More

सरस्वती बंदना

जय हो मइया शारदा, होसवा बिसारी द। हम निरगुनिया अधम अभिमानी तोहरी किरितिया के कइसे बखानी मोह अगियान सब जरी से उजारी द। जय —   अरगवों के गोदी मे उठवलू नाही जानी हमरा के काहे बिसरवलु कि हमरो के खोली के पलकिया निहारी द। जय —   केहु ना सहायी माई तोहके पुकारी राति दिन तोहरे डगरिया निहारी कि हमरो दुआर कबों हंस के उतारि द। जय —   चारु ओर छवले गहन अंधिअरिया जाईं कहा सूझे नाही कवनों डगरिया कि हिया बीचे दिया तनि ज्ञान के तू बारि…

Read More

कन्हइया हो! तनी माखन तS खा लS।

भुखिया बिसारि रोज जमुना नहा लS। कन्हइया हो! तनी माखन तS खा लS। लरिका गुवालन के रोज- रोज तोहे भरमा लिआ जालें, हम लागीं जोहे देखेलS हमके त कुंजन लुका लS। रधिकी ह अधिकी ऊ अधिका बनाई छाछ देई चिरूआ भरि तहके पोल्हाई ओकरा बोलवला पर कोस- कोस जालS। सँझिया- बिहान नाहीं होला पढ़ाई गलियन में घूमि- घूमि ठानS लड़ाई मनसुख बदे काहें रोजे पिटालS? घर के ना खालS, करे जालS चोरी ओरहन सुनावेली घर- घर के गोरी मइया क, बाबा के इज्जति बचा लS। संगीत सुभाष, मुसहरी, गोपालगंज।

Read More

मेघा ! रे मेघा !!

मेघा ! रे मेघा !! बदरवा, उमड़-घुमड़ के बरिसS मेघा। उमड़-घुमड़ के बरिसS। घूम-घूम चहुं झूम-झूम भुंइ, लरकि लरकि के बरिसS मेघा। उमड़-घुमड़ के बरिसS।   चोंच खोल नभ चिरई ताके, हाँफे-काँपे मन भुंइया के, छुधा ताप अन्हियार नयन तर, चमकि-चमकि के बरिसS, मेघा। उमड़-घुमड़ के बरिसS।   दीपक राग सधल के गवले, निज अंतर, धरती धनकवले, मेघ मल्हार सधल गाई हम, झमकि-झमकि के बरिसS, मेघा। उमड़-घुमड़ के बरिसS।   जो तोहरा घर पानी नइखे, लोर पसेना ले जा सबके, आस लगल बा प्यास बुता दs, छमकि- छमकि के बरिसS,…

Read More

कजरी

बदरी आवऽ हमरी नगरी, नजरी डगरी ताकति बा। सूखल पनघट, पोखर, कुइयाँ असरा गिरल चिताने भुइयाँ छलके नाहीं जल से गगरी, नजरी डगरी ताकति बा। बूढ़ लगे सब बिरिछ पात बिन ठठरी सेवे दिनवाँ गिन-गिन अइतू फिनु बन्हि जाइत पगरी, नजरी डगरी ताकति बा। धरती के कोरा अँचरा में डालि खोंइछ बइठा पँजरा में भरितू मांग पिन्हइतू मुनरी, नजरी डगरी ताकति बा। छमछम छागल आजु बजावत पुरुआ के संग नाचत गावत आवऽ, तनि जा हरिअर चदरी, नजरी डगरी ताकति बा। संगीत सुभाष, मुसहरी, गोपालगंज।

Read More

गीत

कर जोरि बिनवे दुलारी बेटी, बाबू जनि काटीं हरिअर गाछि पलंगिया का कारन जी। आम, महुआ, पाकर, गुलर, बर जी, बाबा निमिया, निबुइया, जमुनिया धरतिया के छाजन जी। मथवा क अँचरा सरकत खने जी, डलिहें सुरुजमल कुदीठि त माई सकुचाई जइहें जी। सजना अँगनवाँ दुरूह काज हो, धिया, दिनभर खटि-मरि थकबू त रयनि का नींनि लेबू हो? कहवाँ सुतइबू गोदिलवा नू हो, धिया, कहवाँ सुतइबू सजन केरि चरन दबइबू नू हो। कीनि दीं बाबू हँसुअवा नू जी, बाबू, घने-बने खरई कटाइबि, तरई बनाइबि जी। लीपि-पोति घरवा अँगनवाँ क जी, बाबू,…

Read More

एहि मटिये के नगद-उधार सखिया

बाटे माटी मुर्दार-जियतार सखिया एहि मटिये के नगद-उधार सखिया। मटिये में जमलीं आ मटिये में मिललीं मटिये के माल-असबाब हम रहलीं फेंके मटिये के चार गो कँहार सखिया । सँचि-सँचि सीत-घाम बरखा देखाइ के के राखे हमके गलाइ के सुखाइ के जइसे डाले कोहड़उरी- अचार सखिया । कहे भर अनुमति गाइ-गूइ चल दीं गीत गीतमलवा में एकठे पिरोइ दीं अउर कुछ नाही बस-अख्तियार सखिया । कइसे कहीं कहहूँ न देत बाटे जिनगी मउअतो से ढेर ई कड़ेर काटे जिनगी नाहीं जिनगी के कवनो एतबार सखिया । आनन्द संधिदूत

Read More

चेतावनी पाकिस्तान के

अइसन पड़ोसी मिलल,निपटे अनाड़ी धीकल। सीजफायर तुड़ के,बढ़ावत हमार खीस बा।। खइला- छइला बिनु टुटल,चीन के हांथे बा बिकल। भाड़ा के गोहार प, बनत चार-सौ-बीस बा।। बने ला अमीर चंद,घर में करे मुसरी दंड। भोजुआ तेली बनत, भोज महाराज बा।। करजा में डुबल आकंठ, तबहुं अतना घमंड। एटम बम के धमकी से,लोग के डेरावत बा।। लुकी-छीपी करे घात,लात के देवता ना माने ना बात। आईके सीमा पररोज, रेड़ ई बेसाहता।। पंच के सुनेना बात, करे राड़ दिन रात। असहीं बिनास आपन,अपने बोलावता।। धरती के स्वर्ग पर,पपियन के भेजी कर। नरको…

Read More