वासकसज्जा

हुलस अंगना नूतन नेह, पसरल गेह खनक कंगना।   गदगद गात सुहावन सिहरन उमगल चाल अपार पुलक मन आपन आन, एक समान हरख नयना।   चान लुटावत जोती निरमल निरखत नखत गगन से अविकल मुखड़ा गोर, नित चितचोर रटत रटना।   दीप जरा चितवे अपलक पथ मिलन आस पिय के सुधि में रत आहट जानि, घूंघट तानि निरख सजना।   संगीत सुभाष, प्रधान सम्पादक- “सिरिजन”, भोजपुरी पत्रिका।

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बरहुआँ के श्री ब्रह्मेश्वरनाथ मंदिर

संसार मे अइसन कमे लोग होले, जेकरा हाथे नीमन काम होला, जवना से कीर्ति बढ़ेले। ईनार ,पोखरा, मंदिर, ईस्कूलन के बनवावल सभे के कल्यान खातिर होला।भगवान जेकरा हाथे ई सब करावल चाहेलन, उहे अइसन कुल्हि काम करे खाति अगराला। ओकरा जिनगी में ख्याति त  मिलबे करेले, ओकर लोक आउर परलोको  संवर जाला। धन- दउलत  त  ढेर लोगन के लग्गे होला, बाकिर  अइसन कुल्हि कामन खातिर  भुलाइयो के ना सोंच पावेला। उत्तर प्रदेश के चंदौली जिला मे एगो चकिया तहसील बा। सुरम्य वनस्थली जहाँ प्रकृतिं मनोरम छटा बिखेर रहल बा,अइसने सुघर…

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भोजपुरी भासा का मानकीकरन के बेवहारिक आधार

संसार का हर ग्यात भासा के दू खाना में राखल गइल। पहिला – एक केन्द्रीय भासा आ दोसर – बहु केन्द्रीय भासा। एक केन्द्रीय भासा के माने एक मानक रूप के भासा ; जइसे – रूसी, इतालवी, जापानी वगैरह। एह एक मानक रूप वाला भासा के अंगरेजी में मोनोसेंट्रिक लैंग्वेज ( Monocentric Language ) कहल जाला। बहु केन्द्रीय भासा के माने एक से अधिक मानक रूप वाला भासा ; जइसे – अरबी , फारसी , जर्मन , अंगरेजी वगैरह। एह बहु केन्द्रीय भासा के अंगरेजी में प्लूरिसेंट्रिक लैंग्वेज ( Pluricentric…

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नदिया भेदवा खोलत बिया

करिआ चितउरि बोलत बिया।   कर्फू लागल बहरा  बा सांसन ऊपर पहरा बा खाली खतरे खतरा बा   नइया डगमग डोलत बिया।   घरवो के भीतरा डर बा गांवन से बुरा खबर बा बांचल ना कौनो दर बा   नदिया भेदवा खोलत बिया।   – डाॅ. हरेश्वर, सतना

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मजबूरी

कल्लूआ के उमर जब तीन साल के रहे तबे ओकरा बाबूजी के देहांत हो गईल। कल्लू के पूरा जिम्मेवारी अब ओकरा माई पर आ गईल। ओकर माई मेहनत-मजूरी क के पाले लगली, समय बीते लागल। कल्लूआ के एके गो काम रहे, खाईल-पीअल आ कसरत कईल। वक्त के साथे कल्लू एगो गबरू जवान के रूप में उभरल। अब ऊ इलाका के दबंग साधू के सीधे-सीधे टक्कर देबे लागल, जूर्म के बिरोथ करे लागल। साधू के दसो आदमी पर कल्लूआ अकेले भारी परे । साधू के आपन रूतबा खतम होखे के डर…

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गीत

आफत बनके आइल कोरोना, अजी हम सुकवार नइहर की।   आटा सानत मोरी मुरूके कलाई, मुरूके कलाई अजी जीउ जर जाई, ओह पे ताना मारे सास! कहें काम इ तिहारी, अजी हम सुकवार नइहर की।   आफत बनके आइल कोरोना …   बरतन माजत मोरी हाथ करिआई, हाथ करिआई सगरी देह मरूआई, ओह पे लेबे चुटकी देवरा ! कहें काम इ तिहारी, अजी हम सुकवार नइहर की…     आफत बनके आइल कोरोना ….   मचकल कमर तबो झाड़ू लगाई, झाड़ू लगाई अजी पोछा लगाई, ओह पे मटक मटक के…

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बरगद गाछ

बरगद गाछ के तरे बइठल शिवशंकर  के आपन बाबूजी इयाद पड़ गइनी। बाबूजियो तऽ बरगदवे अइसन रहनी।केतना लोग के ऊपर आपन हाथ रखनीं। सगरी गाँव उनहीं जमीन पर राज करत बा। बाकिर हमरा पता ना रहे कि उ  खोख बरगद रहन। जेकरा  में दीमक नियन भीतरे भीतरे गोतिया दायाद आ बेटवन लोग बाँटत काटत छाँटत उनकर अंत करा देहलन। आदमी आ ई गाछ बिरिछ में इहे त फरक देखल जाला कि  गाछ बिरिछ में आदमी लोगन से जादा धीरज आ सहनशक्ति होला। आदमी तऽ मायाजाल के फाँसल मनई।इचिको  बात से…

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गजल

जलल बा  हिया  में  अगन  धीरे धीरे मिलल जब  नयन से नयन  धीरे धीरे   जुड़ल  प्रीत  के  डोर जबसे  ह उनसे सजावे  लगल  मन  सपन  धीरे  धीरे   नशा प्रीत के  लग गइल बाटे अइसन रहत मन  ह  खुद  में  मगन धीरे धीरे   बहक जाला तन मन न धीरज धराला बुलावेलु   चुपके   सजन   धीरे   धीरे   अधर पे पड़ल जब  अधर बाटे तहरा बढ़ल तब  बदन  के  तपन  धीरे  धीरे   घटा बन के जिनगी पे अइसन बरसलू खिलल दिल के सउँसे  चमन धीरे धीरे   ग़ज़ल ‘राज‘…

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केकरे ख़ातिर

दिनवा दिनवा भागत हउवअ केकरे खातिर रतिया रतिया जागत हउवअ केकरे खातिर   बीवी-बच्चा ख़ातिर भी ना  समय बचत बा ऑफिस में ही सारा-सारा समय कटत बा पइसा त आवत बा लेकिन जीवन बा फीका पइसा खर्च करअ क टाइम कहाँ मिळत बा   बहरअ रहअ चाहत हउवअ केकरे खातिर झूठअ मन बहलावत हउवअ केकरे खातिर   करअ नौकरी के रोकत बा खूब करअ खिंचअ रुपिया के टोकत बा खूब धरअ लेकिन अपने देहियों क तनी करअ फिकिर के कहले बा नया जमाना देख मरअ   बेटाइम क चाभत हउवअ केकरे खातिर छुप के चूरन फांकत  हउवअ केकरे खातिर   दूसरे क बस देख -देख क होड़ मचल…

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का मरदे का हाल बा

पहिला बार जोगेश्वर भाई के केहूँ मुम्बई बोलाइले रहे ई कह के आवऽ बहुत बढ़िया कम्पनी बा, फ्रेशर्स लइकन खातिर सिखे के बहुत बढिया जगह बाटे। जोगेश्वर भाई किशोरावस्था से आगे निकल चुकल रहलन अब उनका आपन जिम्मेदारी के आभार हो चुकल रहें जेंगन हम के भी आभार हो चुकल रहे आउर आखिर जिम्मेदारी के आभास होई काहे ना उनका। घर के बड़ बेटा जे ऊ रहले हमरे नियन उहो। माई के आंसू आ बाबूजी के परेशानी आ दर देयाद पर पटिदार के वर्ताव आ रिश्तादार लोगन के ताना बाना…

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