आगि लागल बा मन में बोताईं कहां, सुतल हियरा के फेरु से जगाईं कहां। कुछ कहला प छन दे छनकि जाले उ, सांच बतिया के लोरी गवाईं कहां। उ पवले का पद भूलि जा तारे हद, अइसन दरद प मल्हम लगाईं कहां। देवे के उपदेश उन्हुका आदत परल, हिम्मत रउवे बताईं कि पाईं कहां। देखीं जेकरा के फफकल उताने भइल, भाव के भरल ई खटिया बिछाईं कहां। करी कतनो हम आस मिले केहु ना खास, दिल में उगल अंजोरिया देखाईं कहां। पवनी जेकरा के…
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नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’ के भोजपुरी उपन्यास ‘विजय पर्व’ के मिलल अभय आंनद पुरस्कार
मोतिहारी : राधा कृष्ण सीकरिया बीएड कालेज में आयोजित अखिल भारतीय भोजपुरी साहित्य सम्मेलन के 26 वां अधिवेशन दू दिवसीय 26-27 फरवरी के सम्पन्न भइल। सम्मेलन के उद्घाटन माननीय श्री मंगल पाण्डेय स्वास्थ्य मंत्री बिहार सरकार कइनी। मुख्य अतिथि गन्ना उद्धोग मंत्री माननीय श्री प्रमोद कुमार, विशिष्ट अतिथि माननीय संजय मयूख बिहार विधान परिषद सदस्य, श्री वीरेंद्र नारायण यादव बिहार विधान परिषद सदस्य आदि उपस्थित रहीं। भोजपुरी भाषा के आठवीं अनुसूची में शामिल करे खातिर पूरा भारत वर्ष से आइल हजारों भोजपुरिया भाई-बहिन एक स्वर में सरकार से मांग उठवले।…
Read Moreफागुन में नाचल
हंसि हंसि क बहार उतान भईल, अगराई के फाग जब फागुन में नाचल । फगुआ के जब आगुआन भईल, अबीर-गुलाल आपना सुघर भाग पे नाचल। बबुआ-बुचिया के जब रंग रंगीन भईल , फिचकारी के संग उछल- कुद के नाचल । बुढा-जवान के भेद सभ भुल गईल , फागुन फगुआ के जब मधुर तान पर नाचल। आपन-आन के सब ध्यान गईल , जब बैर तेज के सब केहु गले मीली नाचल। उमेश कुमार राय ग्रा0+पो0- जमुआँव , जिला- भोजपुर (बिहार )
Read Moreभोजपुरी त पहेली बा
साँचो में रउआ सुन के भक फाट जाई। भोजपुरी एगो पहेली बन गइल बा ।नइहरे में बेआबरू भइल बेटी जइसन हाल एह घरी भोजपुरी साहित्य आ साहित्यकार लोगन के बा ।साहित्यकार कइगो मोटकी-मोटकी किताबन में माथा खापावेलन आ रात-दिन एक करके कलम-कागज के साथ मगजमारी (माथापची )करेलन तब जाके एगो रचना तइयार होला ।रचना एकजुट करेलन आ माल-पताई के जोगाड़ करके भोजपुरी साहित्य बनावेलन। ई भोजपुरी साहित्य के परेमवे नु बा । बाकी हद त तब होला कि सउसे छपल साहित्य भेट दे के सधावे के परेला। सउसे मेहनत फोकटे…
Read Moreविश्व भोजपुरी सम्मेलन के अंतरराष्ट्रीय महासचिव डॉ अरुणेश नीरन सम्मानित भइलें
विश्व भोजपुरी सम्मेलन संस्था खाति हुलास आ गौरव के बाति बाटे कि अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस 2022 के अवसर पर भोजपुरी प्रतिष्ठान,बीरगंज,नेपाल के तत्वावधान में आयोजित सम्मान समारोह में विश्व भोजपुरी सम्मेलन संस्था के अंतरराष्ट्रीय महासचिव आदरणीय डॉक्टर अरुणेश नीरन जी के भोजपुरी के क्षेत्र में विशिष्ट योगदान का चलते अंतरराष्ट्रीय सम्मान प्रदान कइल गइल । सम्मान स्वरूप ₹100000 नगद,स्मृति चिन्ह एवं उत्तरीय प्रदान कइल गइल।
Read Moreबबुनवाँ बड़ नीक लागे हो
ठुनुक़त घरवाँ अंगनवाँ, बबुनवाँ बड़ नीक लागे हो। अरे हो बिहँसत माई के परनवाँ, बबुनवाँ बड़ नीक लागे हो। मुँहवा लपेटले मखनवाँ बबुनवाँ बड़ नीक लागे हो। अरे हो उचकि उतारत अयनवाँ, बबुनवाँ बड़ नीक लागे हो। हुलसत गरवा लगावेली अरे हो भरले लोरवा नयनवाँ , बबुनवाँ बड़ नीक लागे हो। रोआँ पुलकि जिया हरसेला अरे हो कुंहुकेला मन अस मयनवाँ, बबुनवाँ बड़ नीक लागे हो।। जयशंकर प्रसाद द्विवेदी
Read Moreवसंत अइले नियरा
हरसेला हहरत हियरा हो रामा, वसंत अइले नियरा।। मन में मदन, तन ले ला अंगड़ाई, अलसी के फूल देख आलस पराई, पीपर-पात लागल तेज सरसे, अमवा मोजरीया से मकरंद बरसे, पिहू-पिहू गावेला पपीहरा हो रामा, वसंत अइले नियरा।। मटरा के छिमिया के बढ़ल रखवारी, गेहूँआ के पाँव भइल बलीया से भारी, नखरा नजर आवे नजरी के कोर में, मन करे हमहूँ बन्हाई प्रेम-डोर में, जोहेला जोगिनीया जियरा हो रामा, वसंत अइले नियरा।। पिया से पिरितिया के रीतिया निभाएब, कवनो बिपत आयी तबो मुस्कुराएब, पोरे-पोर रंग लेब नेहिया के रंग में,…
Read Moreसारधवा
मरछिया अपने त सात गो लइका के मार कै भइल रहै .. जनमते महतारी घुरा पर फेकवा दिहली ..कौदो दे कै किनली ..बड़ा टोटरम पर .मरछिया जिएल ..मरछिया धीरे-धीरे सेयान होखे लागल ..जवानी उफान मारत रहे ..”इजवानी केकरा कस में बा ..मरछिया एकदम गोर भभुका रहे रहे ..आओठ लाल-लाल ..नकिया सुग्गा के ठोर अइसन चोख ..अँखियांमें बुझाए काजर कईल बा ..केसिया टेढ़ टैढ़ घुंघराला बुझाए करिया घाटा ह..माने छाछाते देवी कै मूरत ..देह के उतार चढ़ाव गजब के .. चाल मस तानी ..चोटिया नागिन खनिया अँखिया बुझाए दारु पियले बिया…
Read Moreमम्मी रे हमहूं इसकूल जाइब
मम्मी रे पापा से कह के ड्रेस एगो बनवा दे। हमहूं रोज इसकूल जाइब भइया के बतला दे। जूता मोजा कलम पेनसिल कापी किताब टाई। जेंटल मएन बनके जाइब जइसे जाला भाई। हरमेस हाथ पकड़ि के चलबि पीठ प लादि के बसता। इयाद पारि के रोजे रखिहे मम्मी ओ में नासता। मम्मी कान पकड़त बानी छोड़ देब सैतानी । सभ केहु के मान राखबि हम बोलबि गुर जस बानी। ना खाइब अब चिप्स कुरकुरा चाट अउरी समोसा। ए ममता के मूरत मम्मी अब त क ले भरोसा। सभ लइकन से…
Read Moreभोर हो गइल
खोल द दुआर, भोर हो गइल। किरिन उतर आइल, आ खिड़की के फाँक से धीरे से झाँक गइल, जइसे कुछ आँक गइल, भीतर से बन्द बा केंवाड़ी त बाहर के साँकल के पुरवाई झुन से बजा गइल, आँगन के हरसिंगार, दुउरा के महुआ जस, चू-चू के माटी पर अलपना सजा गइल, ललमुनियाँ चहक उठल, बंसी के तान थोर हो गइल।। रोज के उठवना जस, ऊठ, अब जाग त किरिन-किरिन जूड़ा में खोंस ल, झुनुक-झुनुक साँकल से पुरवाई बोलल जे, पायल में पोसल ; अँचरा से महुआ के गंध झरल हरसिंगार गंध…
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