बसंत-फागुन

धुन से सुनगुन मिलल बा भँवरन के रंग सातों खिलल तितलियन के लौट आइल चहक, चिरइयन के! फिर बगइचन के मन, मोजरियाइल अउर फसलन के देह गदराइल बन हँसल नदिया के कछार हँसल दिन तनी, अउर तनी उजराइल कुनमुनाइल मिजाज मौसम के दिन फिरल खेत केम खरिहानन के! मन के गुदरा दे, ऊ नजर लउकल या नया साल के असर लउकल जइसे उभरल पियास अँखियन में वइसे मुस्कान ऊ रसगर लउकल ओने आइलबसन्त बन ठन के एने फागुन खनन खनन खनके! उनसे का बइठि के बतियाइबि हम पहिले रूसब आ…

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बड़हन बानर हिरोइनची

ओह घरी पश्चिमी बिहार में हिरोइनचिअन के आंतक बहुत बेसी हो गइल रहुए, जदि भुला के बल्टी, तसला, रसरी, कुरसी, टेबुल भा सइकिल घर के बहरी भा बिना ओहारे अंगना में छूट जाए त दस पनरह रोपया खातिर मारल मारल फीरत हिरोइनचिअन के लाटरी लगले जइसन खुशी मिलत रहे। कसहूं चोरा के बेच खोच के दस पनरह रोपया में हीरोइन पी के रात भर टुन्न रह$सन।   एगो साहूकार आ बाबाजी पड़ोस में रहत रहुअन जा ,साहूकार के पांच गो छौड़ी आ बाबा जी के दू गौ छौड़ा रहे। साहूकार…

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पान थूक के

पढ़े लिखे में जी ना लागे बनि के घुमत हवा नमुन्ना पिता जी पूछलन पूत से अपने रगड़त खैनी संगे चुन्ना।   तब बबुली झार अदा से अगबै पान थूक के बोलस मुन्ना सुना हे बाऊ नेता बनबै कइ देब दऊलत पल में दुन्ना।   का घबड़ाला झूठमूठ क अँगुरी पर बस दिनवा गीन्ना लड़ब बिधइकी जल्दी हनहुँ फिर बुझबा हम हई नगिन्ना।   जिला जवारी जानी हमके निक निक लोगवा छोड़ि पसिन्ना तोहरो नाम ऊँचाई छुई नाची सब डेहरी पर धिन्ना।   खड़ा सफारी दुअरे होई मनी महोत्सव साथ…

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नून-तेल-लकड़ी मे फंसि गइल जनता

नून-तेल-लकड़ी मे फंसि गइल जनता नाहीं त तखता पलटि देत जनता!   ओके लगेला की होत बा सब अच्छा नइखे मालूम के बा झूठा के बाद सच्चा भेड़ियन के बीच में भइल नंगी जनता नाहीं त तखता पलटि देत जनता!   धरम-करम मेें उ बा गइल अझुराई जात-पात ऊंच-नीच के रोग लगाई भरम मे भागल जाले कांवर लेके जनता नाहीं त तखता पलटि देत जनता!   बरध जइसे रात-दिन बहावे पसीना पेट जिआवे फारि धरती के सीना किसमत पे रोवै बइठ करे कुछ ना जनता नाहीं त तखता पलटि देत…

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दू गो लघुकथा

१.बेटी के बियाह बेटी के बियाह खातिर चिन्तित महतारी अपना पतिदेव से कहली- एजी! रउरा बेटी के बियाह के कवनो चिन्ता बा की ना ? बेटी पढ़ि -लिख के पांच बरीस से नोकरीयो करऽ तिया, पैंतीस बरीस के उमीरो हो गईल। समय से शादी-बियाह कईल हमनीं के जिम्मेवारी बा बाकिर रउरा त कवनो फिकीरे नईखे। मेहरारू के बात सुनि के पतिदेव जी कहनीं- बेवकुफी मत करऽ। बबुआ इंजिनियरी पढऽ ता, दूसरा साल ह। अबहीं बियाह के बात टारऽ, काहां से आई हर महीना पच्चीस हजार रुपीया आ हमनीयों के आपन…

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दुरजन पंथ

(1) अकरुणत्वमकारणविग्रहः,परधने परयोषिति च स्पृहा। सुजनबन्धुजनेष्वसहिष्णुता, प्रकृतिसिद्धमिदं हि दुरात्मनाम्।।                                  – भर्तृहरि गसल निठुरता हद गहिरोर पोरे-पोर। पोंछ उठवले हरदम सगरी, सींघ लड़ावे के तत्पर। सकल उधामत चाहे करि लऽ जीति ना पइब कबो समर। अनकर माल-मवेसी, धनि पऽ निरलज आँखि उठावे, सुजन बंधु सन इरिखा पारे, दुरजन जान सुभावे।   (2) दुर्जनः परिहर्तव्यो विद्ययाऽलङकृतोऽपि सन्। मणिना भूषितः सर्पः किमसौ न भयंकरः।।                            – भर्तृहरि पढ़ल-लिखल भल सुकराचारी, ताने रहे। कतो बिछंछल मनियारा के कवन गहे?   (3) जाड्यं ह्रीमति गण्यते व्रतरुचौ दम्भः शुचौ कैतवं शूरे निर्घृनता मुनौ विमतिता दैन्यं…

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कहानी का सुनायीं

गांव के परिवेश के कहानी का सुनायीं सभे बा मतलबी केकरा के समझायीं घर के पड़ोसिया लगावे दरहीं कूड़ा कहले पे हमके दिखावे लमहर हुरा धमकी त देत बा कईसे समझायीं गांव के परिवेश के……।   संस्कार घर-घर के स्वाहा भईल जाला ईर्ष्या के आग में सबे जरते देखाला सुनि के अनसुनी करे माने नाहीं बतिया अंखिया में धूल झोके संझिये के रतिया अइसने मतलबियन के कईसे समझायीं गांव के परिवेश के……..।   ऐश आ फिजूल में करेला सभे खरचा मुहवा से कब्भो नाहीं धरम के चरचा मतलब परेला त…

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अन्हरिया में अंजोरिया

केतना दिन जमाना के बाद आज ए पेड़ा से सुरसती के जाए के म‌उका मिलल बा।बग‌ईचा के झिहिर-झिहिर बेयार बड़ा सोहावन लागत रहे।बरियारी गडि़वान के रोकवाए के मन रहे।बाकिर अन्हार हो जाइत त बाटे ना बुझाईत।ल‌इकाई के सगरी बात मन परे लागल।अमवारी के झुलुआ..भ‌ईंस के सवारी..पतहर झोंक के मछरी पकावल..डडे़र पर के द‌उराई..गड़ही में गर‌ई मछरी के पकडा़ई..पुअरा के पूंज पर के चढ़ाई..फेन धब-धब गिराई.. लरिकाईं के एकह गो बात मन के छापे लागल।उहो का दिन रहे।मन के राजा रहनी सन। ज‌इसही बैलगाड़ी सतरोहन भ‌ईया के दुआरी पर चहुंपल रोअना-…

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आपन बात

साहित्य अपना में समाज का संगे सभे के हित समाहित राखेला आ हरमेसा बढ़न्ति का ओर गति बनवले राखे के उपक्रम विद्वान साहित्यकार लोग करत रहेलें। अइसने कुछ साहित्य जगत के मान्यतो ह। बाकि हर बेर ई सही ना होखे। कई बेर एकरा से उलट होत लउकेला। जान-बूझ के भा इरखा बस कवनो नीमन चीजु के अनदेखी कइल, उहो अइसन लोगन द्वारा जेकरा के हद तक मानक मानल जात होखे, ढेर बाउर लागेला। अइसन भइलका मन के गहिराह टीस दे जाला। कई बेर उ टीस मन के उचाट क देवेले।…

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लागल लड़िका के बजार

लागल लड़िका के बजार एहि जुगवै में कीनैं लड़की के बाप एहि जुगवै में !   तीन-चार लाख रुपइया पुलिस-प्राइमरी के भैया साथे एगो मोटर कार एहि जुगवै में लागल लड़िका के बजार एहि जुगवै में!   जवन जुनियर में पढ़ावै सात से आठ लाख फुरमावै कार दतवा चिआर एहि जुगवै में लागल लड़िका के बजार एहि जुगवै में!   दस लाख टीजीटी के पार माई – बाबू मांगैं कार देदा लड़की के डाल एहि जुगवै में लागल लड़िका के बजार एहि जुगवै में!   गरम पीजीटी के बाज़ार पनरह…

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