टीस

“महतारी की कोखि से का जाने का भागि ले के जनमल रहनीं। नइहर में नाहीं ढेर त कुच्छु कम्मों त ना रहे। हमार बाबूजी कवनों चीज के कमी ना होखे देत रहलें। बड़ी देखि सुनि के भरल-पुरल घर में बिअहले रहलें कि हमार बबुनिया सुख से रही, बाकिर भागि के लेखा कि छौ भाइन में बर-बँटवारा के बाद जवन खेती-पाती मिलल ओसे गुजर-बसर भर हो जाउ, ऊहे ढेर!” बुधिया खेते की मेंड़े पर बइठि के घास छोलत मनेमन अपनी भागि के कोसत रहे। “अरी बुधिया!” सुनि के हाथ रुकि गइल…

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कुल्हि हमरे चाही

हमही त बानी असली राही कुल्हि हमरे चाही।   हमही से उद्गम हमरे में संगम धमकी से करब हम उगाही कुल्हि हमरे चाही।   हमरे से भाषा हमरे से आशा छपि के देखाइब खरखाही कुल्हि हमरे चाही।   हमही चउमासा बुझीं न तमासा खम खम गिरिहें गवाही कुल्हि हमरे चाही।     जयशंकर प्रसाद द्विवेदी

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बाबूजी

घरवा के मुखिया लइकन के मुस्कान बाबूजी के पाकिट में रहेला सब के जान। सब के ख़ुशहाली बजा के ताली सब दुख दूर होला चुटकी में खाली। बाबूजी जइसन छाता हमनी के विधाता। दुनिया जहान में नइखे आइसन सुंदर नाता। माई के सिंदूर चमके। खेत बधार गमके। बाबूजी के पसीना से अंगना अँजोर दमके। बहाके पसीना जगाके आस। रोटी में आवेला मिठास। कर देलन चुटकी में दूर परेशानी, उनका जइसन केहू नइखे ख़ास। सविता गुप्ता राँची झारखंड

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रामनाथ पांडेय शिखर सम्मान से डॉ. मयंक मुरारी अउर डॉ.जौहर शफियाबादी सम्मानित

पटना। भोजपुरी के पहिला उपनन्यासकार रामनाथ पांडेय के पुण्यतिथि पर 16 जून के पटना में एगो कार्यक्रम के आयोजन भइल। एह अवसर पर डॉ.मयंक मुरारी और डॉ.जौहर शफियाबादी के पहिला रामनाथ पांडेय शिखर सम्मान देहल गइल। दूनों विद्वानों के स्मृति चिह्न, प्रशस्ति पत्र आ शॉल से सम्मानित कइल गइल। सारण भोजपुरिया समाज आ जागृत प्रकाशन के तत्वावधान में मैत्री शांति भवन, अशोक राजपथ पर भइल यह कार्यक्रम में रामनाथ पांडेय के कालजयी रचना “महेन्दर मिसिर” के लोकार्पण भी भईल। कार्यक्रम के अध्यक्षता चंद्रकेतु नारायण सिंह जी कइनी। डॉ.सुनील पाठक, पूनम आनंद, तैय्यब हुसैन पीड़ित, भगवती प्रसाद द्विवेदी जइसन विद्वान मंच के शोभा बढ़इनीं। लोकार्पण के बाद रामनाथ पांडेय जी के व्यक्तित्व और कृतित्व पर उपस्थित विद्वान लोग आपन विचार व्यक्त कइलख। व्याख्यान के बाद काव्य पाठ भी भइल। एह में डॉ. मीना पांडेय, दिवाकर उपाध्याय, मधुरानी लाल, सुजीत सिंह सौरभ, श्याम श्रवण, सुधांशु कुमार सिंह  आपन रचना के पाठ कइलीं। एह अवसर पर भोजपुरी साहित्य जगत से जुड़ल कई गो हस्ती उपस्थित रहल। एहमें शुभ नारायण सिंह शुभ, राजेंद्र गुप्त, प्रेमलता, यशवंत मिश्रा, प्रणव पराग, रवि प्रकाश सूरज आदि प्रमुख रहनीं। धन्यवाद ज्ञापन रामनाथ पांडेय के बड़हन लइका बिमलेंदु भूषण पांडेय कइलन तथा मंच संचालन दिवाकर उपाध्याय जी संभलनीं। 8 जून से चलत रहे कार्यक्रम हर साल के तरह एह बार भी कार्यक्रम के सिलसिला रामनाथ पांडेय के जयंती 8 जून से शुरु भइल। 8 जून के चंपारण में 100 से ज्यादा कलाकार लोगन के सम्मानित कइल गइल। एकरा अलावा सारण भोजपुरिया समाज के पेज से हर दिन लाइव कार्यक्रम के आयोजन भइल। एहमें एक दर्जन से ज्यादा विद्वान लोग भोजपुरी साहित्य व रामनाथ पांडेय के कृति पर अपने विचार व्यक्त कइलख। रिपोर्ट – अर्धेंदु भूषण पांडेय

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हमार रामभंजन बाबा

बात हमहन से छ पीढ़ी पहिले के ह। बरहुआं के कश्यप गोत्रीय दुबे लोगन के परिवार में दुर्गानन्द दुबे के तीन गो सुपुत्र भइल रहलें। जवना में सभेले बड़ रामभंजन बाबा रहलें। उहाँ से दूनों छोट भाई राम सहाय दुबे आ हंसराज दुबे रहल लोग। तीनों भाई एकदम सोझबग, मयगर आ साधु लेखा सोभाव के रहल। तीनों भाई लोग के लइकई बहुत नीमन से बीतल। तीनों भाई लोग बड़ भइलन। रामभंजन बाबा आ उनुके एगो छोट भाई हंसराज बाबा के बियाहो-दान समय से हो गइल। तीसरका भाई के बियाह ना…

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गीत

सुखि गइलें पोखरा आ जर गइलें टपरी , ए बदरी । कउना बात पे कोहाइ गइलू ए बदरी । देखा पेड़वा झुराई गइलें ए बदरी । बनरा के पेट पीठ एक भइलें घानी । कहा काहें होत बाटे राम मनमानी । गोरुअन के बेटवा क पेटवा ह खपरी , ए बदरी । कउना बात पे कोहाइ गइलू ए बदरी । देखा पेड़वा झुराई गइलें ए बदरी । संझवा बिहनवा में कमवा न सपरी । होते दुपहरिया भुजाई जालीं मछरी । नदिया में अगिया लगाई देलु जबरी , ए बदरी ।…

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मध दुपहरिया

सप सप चले ले लुअरिया हो सखि ! मध दुपहरिया। कइसे बचाईं जवरिया हो सखि ! मध दुपहरिया॥   एकहू बाग बगइचो ना बाचल नदी नार पोखर नइखे सवाचल बन्हओ क टुटल कमरिया हो। सखि ! मध दुपहरिया॥   हरियर बनवा सपन होई गइलें सहर आ गउवाँ प्रदूषित भइलें गरमी के बढ़ल कहरिया हो। सखि ! मध दुपहरिया॥   चिरई चुरमुन के असरा बिलाइल बिरवा के  सँगे कियरियो सुखाइल घरवो में डाहे लवरिया हो । सखि ! मध दुपहरिया॥     जयशंकर प्रसाद द्विवेदी 5/6/2022

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‘बावला’ के सौवीं जयंती पर ‘गीत मंजरी’ के विमोचन

विश्व भोजपुरी सम्मेलन, गाजियाबाद इकाई आ सर्वभाषा ट्रस्ट के सम्हिलात संयोजन में गाजियाबाद में जनकवि राम जियावान दास ‘बावला’ जी के सौवीं जयंती मनावल गइल। दिल्ली-एन सी आर में ‘बावला’ जी केन्द्रित ई पहिल कार्यक्रम के परयास रहल ह। कार्यक्रम में बावला जी के नवीनतम काव्य संकलन ‘गीत मंजरी’ के विमोचन भइल। ‘गीत मंजरी’ के सम्पादन गीतपुरुष आदरणीय श्री हरिराम द्विवेदी जी आ जयशंकर प्रसाद द्विवेदी कइले बाड़न आ ई किताब सर्वभाषा ट्रस्ट का ओर से प्रकाशन भइल बा। किताब लोकार्पण-परिचर्चा सह कवि-गोष्ठी के कार्यक्रम के शुरुआत मुख्य अतिथि श्री…

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सतुआ

पहिले सतुए रहे ग़रीबवन के आहार केहू जब जात रहे लमहर जात्रा प त झट बान्हि लेत रहे गमछा में सतुआ,नून, हरियर मरीचा आ पियाजु के एकाध गो फाँक केवनो चापाकल भा ईनार से पानी भरि के लोटा भर सुरूक जात रहे केहुओ बेखटके ऊ बिस्लरी बोतल के ज़माना ना रहे सतुआ सानि के गमछिए प खा लिहल जात रहे ओह घरी गरमी में केवनो पीपर,बर आम भा महुआ के छाँह में पहिले लोग क लेत रहे गुज़र-बसर सतुओ खाके ओह घरी बजार में बेंचात ना रहे केवनो फास्टफूड अब…

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धुआंला ना जेकर चुहानी ए बाबू

आसिफ रोहतासवी के नांव भोजपुरी गजल लिखे वाला ओह लोग में शामिल बा, जे गजल के व्याकरण के भी खूब जानकार बा। उनकर रचनाशीलता के पूरा निचोड़ गजल ह, खास क के भोजपुरी गजल। खाली भाषा से ही ना, पूरा मन मिजाज से ऊ भोजपुरी के गजलकार हवें। भोजपुरी के लोकधर्मी गजलकार कहे में हमरा कवनो उलझन नइखे। काहे कि उनकर गजल जवना चीज से बनल बा, जवना दरब से (ई शब्द हम अपना बाबा से सुनले रहीं। ऊ पइसा- कउड़ी के अर्थ में प्रयोग करत रहलें। इहां द्रव्य के…

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