जादू बा सरकार , रउरी ऑखिन में, डूबल बा संसार , रउरी ऑखिन में, निरमल ताले कमल फुलाइल लागता, लाल- लाल चटकार , रउरी ऑखिन में। अमिय, हलाहल, मदिरा के प्याली हउवे, जिअल, मुअल, मॅझधार , रउरी ऑखिन में। उषा के लाली कि बारल दुइ दियरा, जगमग जोति पथार , रउरी ऑखिन में। सूरज, चंदा जोति जुगावे रउरे से, अइसन बा उजियार , रउरी ऑखिन में। छुरी, कटारी, तोप, मिसाइल, एटम बम, गजबे बा हथियार , रउरी ऑखिन में। बहत रहेला ऑसू अक्सर सुख दु:ख में, काहे पानी खार ,…
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चमकत चनरमा के जोती
आज हम बड़ा खूस बानी।पूछ काहे ???? हमरा गऊंआ में एगो बियाह बा।मलिकाइन कीहां…क दिन निमन से खईला भईल बा।अजुए राति ओही जा जाएम। पहिले से ना जाएम त ओहू जा बड़ा मारामारी बा।अधेसरा,नौलखिया,बटुलिया,सिकनरा..पहिलही से बोरा-झोरि ले के बईठल रहेले सन।सुने में आईल ह कि मछरी के भोज-भात बा।केतना मूड़ा पछिला बेर बिगाईल रहे।दू दिन मतारी बेटा खईनी सन।सरधवा त खईबे ना करेले।लागेले चिघरे-आई हो दादा!!कांट गड़ता। काल दोकाने कार करे ना जाएम।तनिको कुछू गबडा़एला बड़ा मारेलन सेठऊ।बाकिर उपाए का बा।हमार बाबू त कहियने ओरा गईले।दारू-ताड़ी पीयत पीयत टीबी उपटा…
Read Moreबनउवा रूप तहरा
दहके पलास फूल जिया डहकावे हो। बनउवा रूप तहरा हमरा ना भावे हो॥ सोरहो सिंगार ओढ़ि ललखर चुनरिया गाँव नगर होत आइल सइयाँ दुअरिया गोरिया के नखरा जिया ललचावे हो। बनउवा रूप—– घर अँगनइया में धप-धप अँजोरिया टटके सजल बाटे ललकी सेजरिया गजरा गुलाबी गोरी जिया बहकावे हो॥ बनउवा रूप—– रूसियो के फूलल नाहके कोहनाइल पजरा पहुँचि गोरी नियरा ना आइल उपरल हिया में सूल जिया दहकावे हो॥ बनउवा रूप—– जयशंकर प्रसाद द्विवेदी
Read Moreबरम बाबा
राउर महिमा रउरे जानी हम ना जानी मरम बाबा का का गाईं बरम बाबा॥ रउरे किरपा सोनरा के घर पसरल मजगर उजियारी पूजन अरचन करि करिके दीहलस कुलवा तारी। जियत जिनगी करम करत मानि आपन धरम बाबा। का का गाईं बरम बाबा॥ पहिले दिनवाँ कटत रहे जइसे तइसे,बाँची पतरा तहरे दीठि से पूरन भइल मुंसी से मालिक के जतरा आँखि खुलल सनमान बढ़ल नइखे कवनों भरम बाबा। का का गाईं बरम बाबा॥ सरधा जेकर बा तहरा में किरपा ओपर बरसावेला ओकरे किरती के अँगना अँजोरिया…
Read Moreअपनइत के गठन आ पहिल काव्य गोष्ठी सम्पन्न भइल
एक संकल्प,एक उद्देश्य, एक समर्पण अ एक सुखद प्रयास बा अपने माई भाषा भोजपुरी के मान मर्यादा, समृध्दि अ विकास बदे समर्पित संस्था बा । काल क दिन भोजपुरी अ भोजपुरियन बदे एक ऐतिहासिक दिन रहै काहे से कि काल्ह गाजियाबाद में भोजपुरी बदे समर्पित अ संकल्पित एक संस्था “अपनइत” क गठन गइल गयल जवने के पहिली बइठकी,अ गोष्ठी क मेज़बानी करैक सौभाग्य हमरा के अ हमरे परिवार के मिलल लेकिन एकर सूत्रधार अ रूपरेखा तइयार करै वाला जे बा ऊ भोजपुरियन बदे अ गाजियाबाद एन सी आर में रहै…
Read Moreभउजी देह अंइठली अउरी फागुन आय गइल
फगुआ! आहा! चांद-तारा से सजल बिसुध रात छुई-मुई लेखां सिहरता. सोनहुला भोर मुसुकाता. प्रकृति चिरइन के बोली बोलऽतिया. कोयल कुहुक के विरहिनी के जिया में आग लगावऽतिया. खेत में लदरल जौ-गेहूं के बाल बनिहारिन के गाल चूमऽता. ठूंठो में कली फूटऽता. पेड़ पीयर पतई छोड़ हरियर चोली पहिर लेले बा. आम के मोजर भंवरन के पास बोलावऽता. कटहर टहनी प लटक गइल बा. मन महुआ के पेड़ आ तन पलाश के फूल बन गइल बा. हमरा साथे-साथ भउजी के छोटकी सिस्टर भी बउरा गइल बाड़ी. माधो काका भांग पीके अल्ल-बल्ल…
Read Moreगीत
मुदित मगन मन देखे बलजोरी , खेलतारे राम राजा सिया संग होरी। नगर अयोध्या झूमे झूमे त्रिभुवन हो , झूमे कैलाश शिव शक्ति के गन हो । राधा मगन कान्हा गोकुला के गोरी , खेलतारे राम राजा सिया संग होरी । ब्रह्मा जी झुमे लेके नारद के संग हो , विणा बजावे माई शारदा मगन हो । विष्णु मगन बनी लचकत छोरी , खेलतारे राम राजा सिया संग होरी ॥ उडे गुलाल बा रगांईल अंगे अंग हो , धरती रंगाईल बा रंगाईल गगन हो । साधु संयासी…
Read Moreचिरईं फेर से चहकी
पुरवा फेर से बहकी। हर पत्ता पियराइल बा कतहूं गंध हेराइल बा टेढ़ परीक्षा आइल बा फूलवा फेर से महकी। अबहीं रात के डेरा बा सब समय के फेरा बा धीरज धरे के बेरा बा चिरईं फेर से चहकी। डॉ हरेश्वर राय सतना, मध्य प्रदेश
Read Moreमहेंदर मिसिर : गीत- संगीत के ढाल का संगे राज धरम निबाहे वाला मनई
पूरबी के कालजयी गीतन के लिखनिहार मने पूरबी के जनक, भोजपुरी के पहिलका महाकाव्य ‘अपूर्व रामायन’, प्रेम , विरह आ निरगुन गीतन के सिरजना करे वाला एगो अइसन मनई जे समाज आ देस के खातिर आपन सागरी जिनगी दाँव पर लगा देलस। जेकरा के आज भोजपुरी अस्मिता के प्रतीक का रूप में जानल- मानल जाला। बाकि ओकरा के ऊ अथान ना देहल जाला। बंगाल के सन्यासी विद्रोह के सहचर आ अंग्रेजन के राज क आर्थिक रूप से करिहाँय तूरे खातिर नोट छाप के सगरे सरकारी तंत्र के चूल्ह हिलावे वाले…
Read Moreखेला
नदी पर ढेर दिन ले पूल ना रहे केहु कहे कि नदी के पूल पसन ना ह केहु कहे कि पूल के इ नदी पसन नइखे बूढ़वा बिधायक दूनू जाना के बात गाँठ बान्ह लेले रहनी कहीं कि, जवन नदी के पसन जवन पूल के पसन, उ पब्लिक के पसन जवन पब्लिक के पसन उ बिधायक के करतब्ब बिधायक जी छव गो चुनाव पार क गईनी बिना पूल के . . . . बाकि एकरा के खेला मत बुझीं खेला त इ रहे कि तीस साल में पूल छव…
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