भोजपुरी साहित्य,कला आ संस्कृति के प्रमुख विभूतियन से अवगत करावत अनुपम ग्रंथ- ‘ भोजपुरी प्रतिभाएँ ‘

भोजपुरी क्षेत्र के इतिहास के व्यापक आ गहिराह अध्ययन के खातिर इहवाँ के  सामाजिक, सांस्कृतिक आ साहित्यिक प्रतिभा के धनी व्यक्तित्वन के कृतित्व से अवगत होखल बहुते जरूरी बा।एह सारस्वत अभियान में बिहार आ उत्तर प्रदेश से इतर मध्यप्रदेश राज्य से अगर कवनों सांस्थानिक प्रयत्न होता त ई स्वागत योग्य त बड़ले बा, प्रेरणास्पदो बा। भोजपुरी साहित्य अकादमी ,मध्यप्रदेश संस्कृति परिषद् ,भोपाल से प्रकाशित भाषा-साहित्य, कला-संस्कृति आ राजनीतिक आ सामाजिक पुरोधा लोगन पर केन्द्रित ग्रंथ-‘भोजपुरी प्रतिभाएँ ‘- भोजपुरी साहित्य के खातिर एह बरीस के सभेले महत्वपूर्ण आ ऐतिहासिक उपलब्धि बा।…

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गंवईं माटी से गमकत कविता

समीक्षित पुस्तक: पीपर के पतई( भोजपुरी कविता संग्रह) कवि के नाम – जयशंकर प्रसाद द्विवेदी प्रकाशक – नवजागरण प्रकाशन, नई दिल्ली प्रकाशन वर्ष: 2017 पृष्ठों की संख्या -104 समीक्षक- डॉ राजेश कुमार ‘माँझी’   ई बात सबका मालूम बावे कि कविता मूल रूप से पाठक के भावना के उद्दात बनावेले, ओकरा सौंदर्य-बोध में सुधार ले आवेले आउर ओकरा के अपना परिवेश से जोड़ेले। कविता द्वारा पाठक में संवेदनशीलता आउर सुरूचि के भी विकास होखेला। कविता के भाव, विचार आउर शिल्प-सौंदर्य के उद्घाटन सही लय आउर प्रवाहपूर्ण ढंग से पढ़ला से…

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कुंडी क रहस्य

” देखा , ले त चलत हईं सिवसंकर भइया के इंहा बाकिर कुछ एने -ओने हो जाई त हमके दोस मत दिहा।समझ गइला ना ! अपने कपार क अलाय-बलाय हमरे पर मत पटकीहा।” परताप एह अंदाज़ में बतिया कढ़वलन कि मनोज क पहिलहीं से संकित जीव में थरहरी दउड़ गइल।घबरा के पुछलन – ” काहें डेरवावत हउवा भाय।सिवसंकर सर क एतना बड़ाई सुनले हईं कि बिना मिलले रह ना जात ह।बनारस आके बिना उनकर चरन स्पर्श कइले लवट जाइब त हमार आत्मा के कल ना पड़ी।” मनोज क बेकली देखके…

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बिहार चुनाव में वोट के कोरनीस

वोट के हाला महिनवन से चालू बा । राजधानी से ले के हाटे – बाजारे , चउके – चउराहे , गाँवे गिराँवे , घरे – घरे वोटे के बात होत बा । जवन काम पाँच बरिस असरे टंगाइल रहल , अब चल – चलंती के बेरा ओकर नींव दिआए लागल , उद्घाटन होखे लागल । नेता लोग के धावा – धूपी , दउड़ा – दउड़ी चालू हो गइल । जे सत्ता में बा , ओकरा सत्ता बचावे के बेचैनी बा आ जे सत्ता से दूर बा , ऊ तरह –…

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बुझीं जनि ठिठोली

कउवो से करकस कोइलिया के बोली बुझीं जनि ठिठोली,इहे हियरा टटोली।   बकुला भगत संगे हुंडरो बा आइल देखीं भला आजे बिलरो धधाइल बघवो त मनवाँ के राज आज खोली। बुझीं जनि ठिठोली,इहे हियरा—   रात दिन होत बात बाS अझुरउवा उपरा त अउर भीतर बाउर भउवा भरलको पुरलको फइलउले बा झोली । बुझीं जनि ठिठोली,इहे हियरा—   बुझलें न अबले, जोड़त हाथ दुअरे लागत बा आइल चुनउवा ह नियरे भरमावे भर दिन चार चार गो टोली । बुझीं जनि ठिठोली,इहे हियरा—   जयशंकर प्रसाद द्विवेदी 09-10-2025

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टूटल क्रम के जोड़े के कवायद : स्मृति कवि सम्मेलन सम्पन्न भइल

विश्व भोजपुरी सम्मेलन गाजियाबाद इकाई के द्वारा आयोजित ‘ स्मृति कवि सम्मेलन आ सम्मान समारोह’ अध्यक्ष मनोज तिवारी आ संयोजक महासचिव जे पी द्विवेदी क परयास सफलता का संगे धरती पर उतरल। कार्यक्रम कई गणमान्य लोगन के सम्मानित काइल गइल। स्मृति कवि सम्मेलन  में कुल 11 गो कवि लोग शिरकत कइलें। कार्यक्रम के अध्यक्ष विश्व भोजपुरी सम्मेलन के राष्ट्रीय अध्यक्ष अजीत दुबे जी आ मुख्य अतिथि  श्रीमती मनु लक्ष्मी मिश्रा  रहलें । कार्यक्रम दू सत्र में रहे । पहिलका सत्र के संचालन इकाई अध्यक्ष मनोज तिवारी जी आ दोसरका सत्र…

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भोजपुरी के लाल – लाल बिहारी लाल

सोनू गुप्ता। नई दिल्ली। भोजपुरी के माटी बिहार के सारण(छपरा)जिला के गांव आ पोस्ट भाथा सोनहो में 10  अक्टूबर,1974 के एगो साधारण शिक्षक परिवार में लाल बिहारी गुप्ता “लाल” के जन्म भइल। श्री  लाल की सुरुआती शिक्षा-दीक्षा गांव के लगही प्राथमिक आ माध्यमिक विद्यालय में भइल। शिक्षा के बाद श्री लाल नौकरी  के तलाश में दिल्ली अइले आ 1995 में भारत सरकार के पर्यावरण आ वन मंत्रालय में नौकरी लाग गईल। श्री लाल नोकरी में पद्दोन्नति के बाद साल 2007 से वाणिज्य आ उद्योग मंत्रालय,नई दिल्ली के औद्योगिक  नीति आ संवर्धन विभाग में कार्यरत बानी। श्री लाल  के शुरु से ही साहित्य में…

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गीतकार डाॅ.गोरख प्रसाद मस्ताना आ उनकर गीत-कविता संग्रह-‘आस- अँजोर’

पटना दूरदर्शन में एही साल 26 जनवरी के बिहान भइला एगो भोजपुरी कवि-गोष्ठी के रिकार्डिंग रहे। हम तनिका लेट पहुँचल रहनीं ।पहिले से पता ना रहे कि आउर संगी कवि सभे में के-के बा बाकिर मिजाजे हरिअरा गइल जब देखनीं कि स्टेज पर चढ़े के बेरा दू गो नामी भोजपुरी गीतकार अग्रज -डाॅ.गोरख प्रसाद मस्ताना आ कुमार विरल जी साथे बानीं।ओह गोष्ठी के संचालक रहनीं वरिष्ठ कवि भगवती प्रसाद द्विवेदी जी।भोजपुरी में जादेतर मुक्त छंद के समकालीन भाव-बोध से जुड़ल कविते लिखल हम चाहीले बाकिर दू गो गीतकारन के साथे हमहूँ…

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‘हो ना हो ‘ के कविता

जहाँ जीवन में चारू ओर अझुरहट आ तनावे होखे,मनई-मन में अकुलहट आ उबियाहटे भरल होखे ,उतावलापन, उबाल आ बेचैनिये समाइल होखे तब अइसनका समय में कविता में संघर्ष आ प्रतिरोध के स्वर स्वाभाविक बा।कविता मानव-मन के भावन के उच्छ्वास आ ओकरा माथा में उमड़त-घुमड़त सोच आ विचारने के कलात्मक अभिव्यक्ति होले।इहे कारन बा कि आज हर भाषा के कवितन में मौजूदा समय आ समाज के विसंगतियन, विद्रूपता आ चुनौतियन के बहुत मुखर वर्णन देखे के मिलत बा।लोकभाषा भोजपुरियो एकर अपवाद नइखे।देश,समय आ समाज के साथे डेग में डेग मिलावत चलेवाला…

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राजधानी दिल्ली में “रंग रसिया महोत्सव 2025” के आयोजन भइल

देश के राजधानी दिल्ली में स्वर कोकिला पद्मविभूषण शारदा सिन्हा जी के श्रद्धांजलि स्वरूप एक मनमोहक कार्यक्रम “रंग रसिया महोत्सव 2025” के आयोजन भइल। एह कार्यक्रम के संचालन माँ सरस्वती नृत्य भारती कलापीठ क संचालिका आ लोक गायिका विजय लक्ष्मी उपाध्याय कइनी। कार्यक्रम के भोजपुरी समाज दिल्ली के अध्यक्ष आ मैथिली भोजपुरी अकादमी के पूर्व उपाध्यक्ष श्री अजीत दुबे जी संबोधित कइलें। उहाँ भइल सगरे प्रदर्शन अद्भुत रूप से मनोरम रहल, बाक़िर कुछ विशेष प्रदर्शन अइसन रहल जवन दर्शक लोगन के  ‘वाह’ कहे पर मजबूर कर दीहलस, अपने माई के…

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