पितर पख आ सराध

पितर पख में पुरबुज लो के अतमा के शांति खातिर पूरे विधि-विधान से अनुष्ठान कइल जाला। पितर पख में तर्पण आ पिंडदान कइला से पुरबुज लो के असीस मिलेला।  घर में सुख-शांति बनल रहेले। वैदिक परम्परा का हिसाब से हिन्दू धरम में ढेर रीति-रेवाज़, बरत, तेवहार मनावल जाला। हिन्दू धरम में जनम से लेके मिरतुक के बादो कई संस्कार मनावल जाला। जवना में अंतेष्टि के अंतिम संस्कार मानल जाला। बाक़िर अंतेष्टि का बादो कुछ कारज अइसन होखेलें जवना के संतान के करे के पड़ेला। पितर पख आ सराध ओकरे में…

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डॉ. ब्रजभूषण मिश्र होखिहें अखिल भारतीय भोजपुरी साहित्य सम्मेलन के सत्ताइसवाँ राष्ट्रीय अध्यक्ष

जमशेदपुर। अखिल भारतीय भोजपुरी साहित्य सम्मेलन, बिहार के राष्ट्रीय प्रवर समिति आ कार्य समिति के 24 सितम्बर, 2023 के ‘ तुलसी भवन ‘ जमशेदपुर ( झारखंड ) में भइल अत्यंत महत्वपूर्ण संयुक्त बैठक में निर्णय लिहल गइल कि भोजपुरी-हिन्दी के जानल-मानल साहित्यकार आ समीक्षक डॉ. ब्रजभूषण मिश्र सम्मेलन के सत्ताईसवां राष्ट्रीय अध्यक्ष होइहें। सम्मेलन के राष्ट्रीय महामंत्री प्रो. (डॉ.) जयकान्त सिंह ‘ जय ‘ बतवलें कि सत्तर के दशक से भोजपुरी भाषा, समाज, संस्कृति, साहित्य आ शिक्षा के निर्माण, उत्थान आउर वैश्विक पहचान खातिर लगातार सुव्यवस्थित पद्धति से काम करे…

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सतुआन के नवकी परिभाषा

का जमाना आ गयो भाया, ओह दिनवा जे भोपू पर नरेटी फार-फार के नरियात रहल, आजु काहें घिघ्घी बन्हा गइल बा। दुका-दुका दोहाई दिया रहल बा।समय के चकरी त चलते रहेले आ चलियो रहल बा। ओह चकरी के चकर-चकर में कई लो चौनिहा गइल बाड़ें।काहें भाय, अब का भइल ?अपना पर परल ह, त दरद होता, दोसरा के बेरा मजा आवेला। अब कापी राइट के संस्था के पता बतावे आ पूछे वाला लोग केने कुंडली मार के बइठल बाड़ें ? बिल के बहरा आईं महराज। का भइल,आजु अपना जात-बिरादर के…

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केशव मोहन पाण्डेय “भारतीय भाषा सम्मान 2023” से नवाजल गइलें

मन गद गद बा। देश के राजधानी दिल्ली में अध्यापन का संगे सर्वभाषा ट्रस्ट संयोजक, सर्वभाषा प्रकाशन के कर्ता-धर्ता, सर्वभाषा पत्रिका के संपादक आ भोजपुरी साहित्य सरिता के साहित्य संपादक   केशव मोहन पाण्डेय के  हिन्दी दिवस का दिने (मने 14 सितंबर) के  काशी में हिन्दुस्थान समाचार भोजपुरी भाषा के क्षेत्र मे उल्लेखनीय योगदान खातिर “भारतीय भाषा सम्मान 2023” से  सम्मानित कइल गइलl देवाधिदेव शिव के नगरी काशी में उहाँ के ई सम्मान श्री शंकरविजयेंद्रसरस्वती जी महाराज आ  उत्तर प्रदेश के डिप्टी सी. एम. श्री केशव प्रसाद मौर्य द्वारा दीहल गइल…

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भुकभुकवा के राग भैरवी

का जमाना आ गयो भाया, लोग-बाग बेगर सोचले-समझले कुछो नाँव राख़ लेत बा आ फेर अपढ़-कुपढ़ लेखा गल थेथरई करे में लाग जात बा।फेर त अइसन-अइसन विद्वान लोग जाम जात बाड़ें कि पुछीं मति। अरथ के अनरथ आ अनरथ के अरथ के घालमेल में असली बतिये बिला जात बिया। अबरी त साँचों में असली मकसदे बिला गइल। रोज नया-नया लोग आवत बाड़ें आ गाल बजा के, राग भैरवी कढ़ा के अपना-अपना खोली में ओलर जात बाड़ें। फेर त ढेर लोग चौपाल सजा-सजा के नून-मरिचा लगा-लगा के परोसे में जीव-जाँगर से…

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सुघर भूमि भारत

जहवाँ माई अँगने सुगना दुलारत सुघर भूमि भारत।   तीन ओरियाँ सिंधु, एक ओर ह हिमालय कन-कन में राम, गाँव-गाँव में शिवालय उहवें के ऊंच भाल दुनियाँ निहारत सुघर भूमि भारत।   मसजिद अजान, गुरुद्वारे गुरु बानी चर्च में बा प्रार्थना, बनता कहानी दुसुमन के दीठी पठावेला गारत सुघर भूमि भारत।   भोरहीं से पवना के जहवाँ मलय राग उहवें भेंटाला कामिनी के बिरह आग सुघरई के कामदेव उहें उघारत सुघर भूमि भारत।   गंगा जमुना नर्मदा अपने रवानी उर्वर भूमि खातिर खूब देलीं पानी अन्न उपजाई धरा सभे के…

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डा अमिता दुबे सर्वभाषा साहित्य सृजन सम्मान –2023 से सम्मानित

प्रो रामदरश मिश्र उनके कृतित्व के भूरि – भूरि सराहना कइलें। • नई दिल्ली, 11 सितंबर, 2023. हिंदी के सुपरिचित कवयित्री कथाकार आलोचक डा अमिता दुबे के सर्वभाषा ट्रस्ट का ओर से सर्वभाषा साहित्य सृजन सम्मान से सम्मानित कइल गइल। ई सम्मान ट्रस्ट का ओर से प्रोफेसर रामदरश मिश्र अपना आवास पर भइल एगो सादा समारोह में प्रदान कइलें। डा अमिता दुबे के उहाँ के शॉल से विभूषित करत सम्मान प्रतीक चिन्ह एवं प्रशस्ति पत्र भेंट कइलें।एह अवसर पर हिंदी के समालोचक कवि डा ओम निश्चल, सुपरिचित लेखिका आ दिल्ली…

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अगिन बरिसे

सावनों में दंवके सिवनवाँ अँगनवाँ मोरे, अगिन बरिसे। नीलहा अकसवा के बदरा रिगावे दिनवाँ में देहियाँ के लवरि जरावे सुसकेला खेतवा किसनवाँ अँगनवां ——– बिंयड़ा में धनवा क बियओ झुराइल पहिले जे रोपल,रोपलो मरुआइल बिरथा बा असवों रोपनवाँ अँगनवां————- कइसे कहीं अब हुंड़रा के धवरल रसते में गोजर बिच्छी के पँवरल फुँफकारे किरवा क फनवाँ अँगनवां ——–   जयशंकर प्रसाद द्विवेदी

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लोकउकितन में खेती के बात

भारतीय सभ्यता में जीव के उत्पत्ति, बढ़वार आ विलयके सिलसिला में अन्न के अहमियत के पहचान असलियत के अनुभव के आधार प बा । तैत्तिरीयोपनिषद्(आनन्दवल्ली, दूसरा अनुवाक्) के कथन ह कि पृथिवी के आसरे जतिना जीव बाड़न ऊ अन्ने से पैदा होले, जीएले आ अंत में ओही में बिला जाले- “अन्नाद्वै प्रजाः प्रजायन्ते । याः काश्च पृथिवीं श्रिताः । अथो अन्नेनैव जीवन्ति । अथैनदपि यन्त्यन्ततः ।”अन्नके उपज में बढ़ोतरी खेती के बेहतर प्रबंध के जरियहीं संभव ह ए से भारतीय सभ्यता में खेती के बहुत अधिक प्रमुखता दीहल गइल ।…

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जिनिगी गांव के : रोज जीए-मूवे वाला सुभाव के

–भगवती प्रसाद द्विवेदी   बाबू! रउआं परदेसी हईं नू? जरूर देश भा सूबा के राजधानी में राउर दउलतखाना होई। बइठीं हमरा एह टुटही खटिया पर भा ओह मचान पर। कहीं, हम अपने के का सेवा करीं?–हम भला राउर का खातिरदारी कऽ सकेलीं साहेब! पहिले हाथ-मुंह धोईं आ लीहीं हई गुर के भेली,साथ में एक लोटा इनार के शीतल जल। जे हमरा दुआर-दरवाजा प आवेला, बस हम इहे सभका खातिर लेके हाथ जोड़िके हाजिर रहेलीं। हं,अब रउआं इतमीनान से बतिआईं।   रउरा देह पर हई उज्जर धप्-धप् खादी के लिबास। कान्ह…

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