सन् उन्नीस सौ पचास,साठ आ सत्तर के दसक में पराधीन मारीसस देस में, गिरमिटिया आंदोलन के राष्ट्रीय चेतना के प्रतिनिधि कवि ब्रजेंद्र कुमार मधुकर भगत केवल एगो कवि साहित्यकार ना रहलन, बल्लुक ओह धरती पे बसल भारतीय मूल के सभे लोगन के आत्मा के आवाज़ रहलन । ओहिंजा पत्रकार,आंदोलनकारी, आजादी के सिपाही भी उ रहलन ।। मारीसस में “गिरमिटिया” पीड़ा, संघर्ष आ अस्मिता के जवन इतिहास हौ, उ ओकरा के गीत, कविता आ भावनात्मक अभिव्यक्ति में ढाल के अमर कर देहलन ।। “गिरमिटिया आत्मा के आवाज़ रहलन ब्रजेंद्र मधुकर भगत”…
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