साहित्यकार के माने-मतलब

साहित्य एगो अइसन शब्द ह जवना के लिखित आ मौखिक रूप में बोले जाये वाली बतियन के देस आ समाज के हित खाति उपयोग कइल जाला। ई  कल्पना आ सोच-विचार के रचनात्मक भाव-भूमि देवेला। साहित्य सिरजे वाले लोगन के साहित्यकार कहल जाला आ समाज आ देस अइसन लोगन के बड़ सम्मान के दीठि से देखबो करेला। समय के संगे एहु में झोल-झाल लउके लागल बा। बाकि एह घरी कुछ साहित्यकार लो एगो फैसन के गिरफ्त में अझुरा गइल बाड़न। एह फैसन के असर साहित्यिक क्षेत्र में ढेर गहिराह बले भइल…

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आपन बात

भोजपुरी भाषा के लेके राह बनावल आ ओह राहि पर चलल दूनों दुरूह कारज बाटे। ओहू मे जब समय के मार पड़े लागे त कबों-कबों साँसो लीहल कठिन हो जाला। कुछ अइसने भोजपुरी साहित्य सरिता परिवार के रीढ़ डॉ सुमन सिंह के संगे ई नवका बरीस लेके आइल। सुमन जी के हमराही श्री राजीव सिंह जी के असामयिक निधन पूरे परिवार के मानसिक विचलन मे लिया के खाड़ कS देलस। लेखनी चले से मना कर रहल बिया,बुझता सियहिये सुखा गइल बा। आवाज भर-भरा रहल बा,गला भरल रहत बा। आँखि के…

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