‘हो ना हो ‘ के कविता

जहाँ जीवन में चारू ओर अझुरहट आ तनावे होखे,मनई-मन में अकुलहट आ उबियाहटे भरल होखे ,उतावलापन, उबाल आ बेचैनिये समाइल होखे तब अइसनका समय में कविता में संघर्ष आ प्रतिरोध के स्वर स्वाभाविक बा।कविता मानव-मन के भावन के उच्छ्वास आ ओकरा माथा में उमड़त-घुमड़त सोच आ विचारने के कलात्मक अभिव्यक्ति होले।इहे कारन बा कि आज हर भाषा के कवितन में मौजूदा समय आ समाज के विसंगतियन, विद्रूपता आ चुनौतियन के बहुत मुखर वर्णन देखे के मिलत बा।लोकभाषा भोजपुरियो एकर अपवाद नइखे।देश,समय आ समाज के साथे डेग में डेग मिलावत चलेवाला…

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राजधानी दिल्ली में “रंग रसिया महोत्सव 2025” के आयोजन भइल

देश के राजधानी दिल्ली में स्वर कोकिला पद्मविभूषण शारदा सिन्हा जी के श्रद्धांजलि स्वरूप एक मनमोहक कार्यक्रम “रंग रसिया महोत्सव 2025” के आयोजन भइल। एह कार्यक्रम के संचालन माँ सरस्वती नृत्य भारती कलापीठ क संचालिका आ लोक गायिका विजय लक्ष्मी उपाध्याय कइनी। कार्यक्रम के भोजपुरी समाज दिल्ली के अध्यक्ष आ मैथिली भोजपुरी अकादमी के पूर्व उपाध्यक्ष श्री अजीत दुबे जी संबोधित कइलें। उहाँ भइल सगरे प्रदर्शन अद्भुत रूप से मनोरम रहल, बाक़िर कुछ विशेष प्रदर्शन अइसन रहल जवन दर्शक लोगन के  ‘वाह’ कहे पर मजबूर कर दीहलस, अपने माई के…

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भोजपुरी जन जागरण अभियान के 25वां धरना सम्पन्न भइल

3 अगस्त |  भोजपुरी भाषा के संविधान के आठवीं  अनुसूची में सामिल करावे ला ,पछिला 10 बरिस भोजपुरी जन जागरण अभियान अपना एह मांग के लेके जंतर मंतर पर धरना देत आ रहल बा। असवों 3 अगस्त के भोजपुरी जन जागरण अभियान  के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ संतोष पटेल के नेतृत्व में धरना आहूत रहल । जवना में देस के कोने कोने से आइल करीब 200 से बेसी भोजपुरी प्रेमी आ  साहित्यकार लोग शिरकत कइलस। भोजपुरी जन जागरण अभियान  के ई 25वाँ  धरना रहल ।

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स्त्री संवेदना के धारदार कृति:निमिया रे करुआइनि

पुस्तक- निमिया रे करुआइनि विधा-उपन्यास / उपन्यासकार – मीनाधर पाठक प्रकाशन वर्ष-2024 /प्रकाशन संस्थान – सर्वभाषा प्रकाशन , नई दिल्ली -59   ‘निमिया रे करुआइनि’ स्त्री संवेदना के उनुका मन के मोताबिक आ उनुका स्थिति का हिसाब से गढ़ाइल बा। कथाकार अपना कथा-विन्यास के स्मृतियन से जोड़त रोचक बनावे में कवनों कोर कसर नइखे छोड़ले। एह उपन्यास के नायिका सुरसतिया (सुरसती) के करुणा आ दुःख भरल जिनगी के जतरा जवन मन,मेहनत आ देह के शोषण से होके गुजरल बा , ओकर नीमन से शब्द चित्र खिंचाइल बा। एही उपन्यास के…

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भोजपुरी कविता में रचल – बसल रस के मिठास से सराबोर एगो मजिगर पोथी

भोजपुरी कविता के इतिहास बहुत पुरान बा। बाबा गोरखनाथ आ संत कबीर के कवित के थाती त भोजपुरी कविता में बड़ले बा साथे ओह काल से लेके आजु तक भोजपुरी कविता समय के साथ कदम ताल करत कविता के हर विधा में आपन जोड़दार उपस्थिति दर्ज कइले बा। महेंद्र मिश्र, भिखारी ठाकुर, रघुवीर नारायण सिंह, प्राचार्य मंनोरंजन, महेंद्र शास्त्री से होत आजु तक के भोजपुरी कविता के यात्रा अपना भीतर बहुत कुछ समेटले बा जेकरा पर हमनीं भोजपुरिया के गुमान बा। भोजपुरी काव्य में का नइखे? राष्ट्र गीत, सिंगार गीत,…

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विश्व भोजपुरी सम्मेलन गाजियाबाद इकाई का ओर से पुष्पांजलि अर्पित !

विश्व भोजपुरी सम्मेलन गाजियाबाद इकाई का ओर से आज 20जुलाई के संस्था के अंतरराष्ट्रीय महासचिव डॉ अरुणेश नीरन जी के पुष्पांजलि अर्पित कईल गइल ।बतावत चलीं कि डॉ नीरन जी 15 जुलाई के शिव लोक गमन क गइलन ।उनके व्यक्तित्व आ कृतित्व पर इकाई के महासचिव जे पी द्विवेदी विस्तार से प्रकाश डललेंं। इकाई अध्यक्ष मनोज तिवारी जी उहां के भोजपुरी खातिर कईल योगदान के कबों ना भूले जोग बतावत उनके राह चले के सभी के प्रेरित कइले।

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प्रकृति किहाँ बा मेला भारी

प्रकृति कहाँ बा मेला भारी, सभे करे मिलि-जुलि तइयारी। बादर-बदरी खुश हो अइलें, ढोल बजावत गीत सुनइलें, मस्ती में बूनी बरिसइलें, बिजुरी के सँग नाच देखइलें, धरती के हिरदया जुड़ाइल, घर-आँगन होखल फुलवारी। प्रकृति किहाँ बा मेला भारी।। सगरो लउके हरियर-हरियर, रसगर भइलें आहर-पोखर, नदी-नहर नाला उमंग में, गागर-गागर लागे सागर, बीज बोआइल हँसी-खुशी के, हँसल भविष्य के मनगर क्यारी। प्रकृति कहाँ बा मेला भारी।। पर्वत पत्थरदिल ना कहलस, तनिको कम ना ओमें बा रस, प्रेम बढ़ावत भू के छुअलस, हरखित होके सुध-बुध तेजलस, देखसु सूरज-चाँद चिहाके, कहसु हव सचमुच…

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रिमझिम बरसेला सवनवां

रिमझिम बरसेला सवनवां में संवरिया बदरा। रस के गगरी चुआवेले बदरिया बदरा डर लागे अन्हियरिया में चमके चहुँ ओर बिजुरिया ओरियानी के पानी छींटा मारे सोझ दुवरिया । खटिया मचिया भीजे तकिया मुडवरिया बदरा करिया घटा नचावे बन में मोरवा संग मोरिनिया । दादुर मेघा मेघा टेरे चातक मांगे पनियां । बैरिन बंसिया बजावे बंसवरिया बदरा। अंगना लागे काई सम्हरि न पाईं फिसले पउवां झुलुआ झूलें कजरी गावें मिलि के सगरी गउवां उफनलि पोखरी में उछलेलीं मछरिया बदरा । चान सुरुज मिलि छिपि के खेलें दिनवो लागे राती। पवन झकोरा…

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के हो लिलरा पर छिरकल गुलाल

के हो लिलरा पर छिरकल गुलाल बदरा उठल मनवां में केतनी सवाल बदरा।   गइलें सुरूज़ देखS पछिम के देसवा बबुआ के दादी सुनावेली खिसवा लवटे लगलें मदरसा से  लाल बदरा । के हो लिलरा पर छिरकल गुलाल बदरा।   दफ़तरवा से लवटे लगलें नोकरिहा होखे लगल पनघट पनिहारिन से खलिहा नापे चरवहवा  गइयन के चाल बदरा। के हो लिलरा पर छिरकल गुलाल बदरा।   लवटेली चारा ले चोंच में चिरइया उगे लगलीं नभवा में छिटफुट तरइया माझी खोलेला नइया के पाल बदरा । के हो लिलरा पर छिरकल गुलाल…

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मुखिया के पटीदार

तेल पिला के राखीं लाठी सभ देखी तेल के धार । हम मुखिया के पटीदार।   जीत क पगरी हमरा माथे रक्षक बनि डोलीं हम साथे हूँ-टू होखे कतौ कबों जे सुधरि के उपरे हमरा पाथे। हम बड़का हईं जुझार। हम मुखिया के पटीदार।   बरिस पाँच जे गुन गन गावै बदले मोट मलाई पावै सोझा रखि आपन अपनापा आँखि मुनी के मान बढ़ावै। बस उहवें दिखे बहार। हम मुखिया के पटीदार।   कलेक्टर के पी ए लेखा बनल भौकाल जहाँ क देखा गली मोहल्ले जय-जयकार माथ दिखे ना कउनों…

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