आपन रीति आपन नीति आपन करम भुला गइलन। देखs घरवाँ रार मचावे शकुनि मम्मा आ गइलन॥2॥ सोचलन उहवाँ होई का,का करत होइहें ओहनी फाँका। देखलें जरत घीव क दियरी चउकठ लँघते बउरा गइलन॥ देखs घरवाँ रार मचावे शकुनि मम्मा आ गइलन॥2॥ बाबू-माई कबों न बुझलन भाईन के भाई न समुझलन बहिनो घरवाँ फाँड़ करावे दिन अछते हहुआ गइलन॥ देखs घरवाँ रार मचावे शकुनि मम्मा आ गइलन॥2॥ घर वालन के ठेलि भुइयाँ हित-मीत ला इनरा-कुइयाँ अपने नीमन खाट पकड़ि के लोटs खातिर अगरा गइलन॥ देखs घरवाँ रार मचावे…
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सम्पादन टीम
संरक्षक रामप्रकाश मिश्रा, अकोला उपाध्यक्ष महाराष्ट्र प्रदेश, भाजपा (उत्तर भारतीय मोर्चा) अशोक श्रीवास्तव (गाजियाबाद) अनामिका वर्मा (भोपाल) प्रकाशक आ सम्पादक जे. पी. द्विवेदी (गाजियाबाद) कार्यकारी सम्पादक डाॅ. सुमन सिंह (वाराणसी) साहित्य सम्पादक केशव मोहन पाण्डेय (दिल्ली) सहायक सम्पादक डाॅ. ऋचा सिंह (वाराणसी), सुनील सिन्हा (गाजियाबाद), डाॅ. रजनी रंजन (झारखंड) सरोज त्यागी (गाजियाबाद) सलाहकार सम्पादक मोहन द्विवेदी (गाजियाबाद), कुलदीप श्रीवास्तव (मुंबई) तकनीकी – एडिटिंग – कम्पोजिंग सोनू प्रजापति (गाजियाबाद) छाया चित्र सहयोग आशीष पी मिश्रा (मुंबई) प्रकाशन: सर्व भाषा ट्रस्ट, नई दिल्ली
Read Moreलोरी गीत
जाईं हम लोभाय हो, बबुअवा के मुसुकी पर। केई पुचकारे, केई अंगे लगावेले अंगे लगावेले, अंगे लगावेले 2 केकरा अँचरवा नीचे,2 जालें लुकाय हो बबुअवा के मुसुकी पर। जाईं हम लोभाय हो, बबुअवा के मुसुकी पर। माई पुचकारे, बाबू अंगे लगावेले अंगे लगावेले, अंगे लगावेले 2 दादी के अँचरवा नीचे,2 जालें लुकाय हो बबुअवा के मुसुकी पर। जाईं हम लोभाय हो, बबुअवा के मुसुकी पर। केई किलकावे, केई लहकि बोलावेले लहकि बोलावेले, लहकि बोलावेले 2 केकरा सुरतिया देखि,2 जालें अघाय हो बबुअवा के मुसुकी पर। जाईं हम लोभाय…
Read Moreभोजपुरी गीत के भाव-भंगिमा
कविता के बारे में साहित्य शास्त्र के आचार्य लोगन के कहनाम बा कि कविता शब्द-अर्थ के आपुसी तनाव, संगति आ सुघराई से भरल अभिव्यक्ति हऽ। कवि अपना संवेदना आ अनुभव के अपना कल्पना-शक्ति से भाषा का जरिये कविता के रूप देला। कवनो भाषा आ ओकरा काव्य-रूपन के एगो परंपरा होला। भोजपुरी लोक में ‘गीत’ सर्वाधिक प्रचलित आ पुरान काव्य-रूप हऽ। जेंतरे हर काव्य-रूप (फार्म) के आपन-आपन रचना-विधान, सीमा आ अनुशासन होला, ‘गीतो’ के बा। दरअसल गीत एगो भाव भरल सांकेतिक काव्य-रूप हऽ, जवना में लय, गेयता आ संगीतात्मकता कलात्मक रूप…
Read Moreमुफ़लिसी में चमकल नगीना-हीरा प्रसाद ठाकुर
साहित्य के अखाड़ा मे कुछ अइसनो कवि आ लेखक पहलवान पैदा भइलें,जे ‘स्वांतः सुखाय’ खातिर आपण कलाम दउरावत रहलें आ अपना कृतिअन के प्रकाशन आर्थिक लाभ के दृष्टि से ना बलुक सेवा भावना से करत रहि गइलें आ उ ग्लोबल हो गइलें।ओइसनें हिन्दी आ भोजपुरी के सुपरिचित गीतकार कविवर ‘हीरा प्रसाद ठाकुर’ जी रहनीं। उहाँ के भोजपुरी साहित्य के मुख्यधारा से एकदमे अलग-थलग। पाटी-पउवा से कोसहन फरका। पत्र-पत्रिकन से कवनों मतलब ना। सोरहो आना स्वतंत्र। नदी के बहाव लेखा उन्मुक्त रहिके आपण लेखनी गोदनी। ‘माटी के आवाज’ नामक कविता संग्रह…
Read Moreमहापण्डित राहुल सांकृत्यायन
ई दुनिया बड़ बे; बहुत बड़ औरी एतहत बड़हन दुनिया में जाने केतने लोग बाड़ें औरी जाने केतने लोग पहिलहूँ ए दुनिया में रहल बाड़ें लेकिन कुछ नाँव लोगन के मन में ए तरे घुस जाला कि ओकरा खाती समय के केवनो मतलब ना रह जाला। औरी ओह हाल में बकत आपन हाथ-गोड़ तुरि के बइठ जाला। चुपचाप। अइसन लोगन क नाँव औरी काम एक पीढी से दूसरकी पीढी ले बिना केवनो हील-हौल पहुँच जाला। कुछ अइसने लोगन में एगो नाम बा महापण्डित राहुल सांकृत्यायन जी कऽ जिनकर साहित्य में…
Read Moreनिरमल गाँव
आज बुधना गाँव बड़ दिन लउटल बा। नयका कुरता पायजामा आ लाल गमछा ओढ के जइसहीं बस से उतरल, आपन भयाद लोग के देख के मुँह बिचकावत कहलस- ई का? हमनी के गँऊवा में सफाई अभियान ना चलऽता का? बोलते-बोलते आगे बढत रहे कि गोबरे पर गोर पर गईल ।हे भगवान! एहीसे त हम गँऊवा से भाग गईनी।माई बेराम ना रहित तऽ हम अइबो ना करऽतीं।चलऽ, पहिले गंगा जी चलऽ।नहा-धो के घरे जाइब। अबकी सब संघतिया के बुधना के वेबहार ठीक ना लागल।बाकिर बड़ दिन बाद संघतिया के अइला के…
Read Moreनदी आ बेटी
नदी आ बेटी के सिरजन भगवान धरती के सुनरी सरूप बदे बनवलन। धरती पर मनई के बसे आ जीये बदे ई दुनो जन के अपना जीवन नेछावर करेके भेजलन। बेटी धरती पर मनई बसईली त नदी ओही मनई के जीवन दान दिहली ।खेती आ पानी के जुगाड़ के जिम्मा ई लिहली। ऐसही धरती फलत-फूलत आज एतना बड़ आपन संसार बना लिहली। खूब खूश होखे ई दुनो जन आपन एतना सुंदर सिरजन देख के। आज नदी बेकल बारी। उनका के सब लोग गंदा कर देत बा। उ आपन दुख केकरा से…
Read Moreभउजी
हमरा पूरा जवार में एके गो भउजी रहली । बिजे भउजी। गाँव में भउजी , चाची, दादी ई सबलोगन के उनकरा ‘भतार’ के नाम से ही बोलावल जाला। आ सब नाम के साथे ‘वा’ आ चाहे ‘ईया’ लगा के बोलला से अपना निअन जनावेलन लोग। भईया हमरा सब गोतिया के बड़ बेटा हउअन। गाँव में बड़ लोग उनका के बिजइया आ छोट लोग बिजे भईया आ बिजे चाचा कहेलन। बिजे भईया सगरी जवार के छोट लइकन के देखनहार रहलन। उहे सभ लइकन के पढाई लिखाई आ चाहे अउरो कवनो बात होय…
Read Moreभोजपुरी में बाल साहित्य
प्राचीन काल में भोजपुरी बिहार प्रांत के भोजपुर, आरा ,बलिया, छपरा, सीवान, गोपालगंज आ यूपी के कुशीनगर, देवरिया गोरखपुर, महराज गंज ,सिद्धार्थ नगर, मऊ , आजमगढ़, गाजीपुर आ बनारस के भाषा रहे बाकिर अब्ब आपन भोजपुरी एगो अंतर्राष्ट्रीय भाषा हो गइल बाटे । भोजपुरी खाली भारत के बिहारे यूपी के भाषा ना रहिके नेपाल , मॉरीशस, फीजी, गुआना, सूरीनाम जइसन देशन में भी बोलचाल के भाषा के रूप में फइल गइल बा । भोजपुरी भाषा में सभ तरह के साहित्य रचल जा रहल बा बाकिर बाल साहित्य के नाम पर…
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