सावनी गीत

पूरुब से आवेले बदरिया नु हो,जहां पिया जी हमार। भींजे मोरी कोरी रे चुनरिया नु हो,नाहीं बाड़ें रखवार। पुरुवा के झोंकवा से सिहरे बदनियां। टप टप अंचरा से चूवे मोरा पनियां। आगि लगो कोठवा अंटरिया नु हो, नाहीं बाड़ें रखवार। पूरुब से आवेले बदरिया नु हो,जहां पिया जी हमार। पिऊ पिऊ बोलेला मोर पिछवरवां। निनिया पराई गइलीं ननदी बहरवां। झलुआ क गीतिया बिरहिया नु हो, नाहीं बाड़ें रखवार। पूरुब से आवेले बदरिया नु हो,जहां पिया जी हमार। संझवा बिहनवां ना लागे मोर मनवां। सासु सुत्तें अंगना ससुर जी दलनवां। सेजिया…

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सावनी गीत

दिनवां धराइदा मोर सजनवां, सवनवां उदास लागे गोइयां। जहर बोले सगरो जमनवां, सवनवां उदास लागे गोइयां। संघे के सहेली सब करेलीं ठिठोली। कहिया तोहार होई बोलेलीं किबोली। नइहर में लागे नाहीं मनवां। सवनवां उदास लागे गोइयां। छतिया में हूक उठे घेरे जब बदरिया। केहू कहां छोड़ेला आपन गुजरिया। कधले देखइबा बस सपनवां। सवनवां उदास लागे गोइयां। अंगराइल देंहिया ना सम्हरे अंचरवा। देखि देखि बरसे ला बैरी बदरवा। कहिया लेजइबा मोर गवनवां। सवनवां उदास लागे गोइयां। राकेश कुमार पांडेय गांव-हुरमुजपुर सादात,गाजीपुर

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रोपनी गीत

खुश भईले इनर देवता आईल मनसून घरे नेवता अब बरसल खूब पनिया, चलऽचलऽ करे रोपनिया ना– —- मेध बरसे झमर-झमर चमके बिजुरिया , झामुर-झुमुर बियवा उखाड़े बियड़रिया, पसिनवा सुखावे हो तिरछी बेयरिया — चलऽचलऽ करे रोपनिया ना —– पियर-पियर बेंगवा के टर्र-टर्र स्वर लहरिया, केंकड़ा के झुण्ड देखीं अरिया-कगरिया, बकुला खोजन लागे डेड़िया मछरिया — चलऽचलऽ करे रोपनिया ना ——— सिर पर छोपी नाहीं घरे छूटल छातावा, घामो उगे, पानी परे सियरा के बिआहवा, छप-छप लईकन नहाए ओरिअनिया —– चलऽचलऽ करे रोपनिया ना– —! Surendra Prasad Giri

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कजरी

भर सावन मोहे तरसइला हो बदरु कहवाँ भुलइला ना। कवना सउतिन में अझुरइला हो बदरु कहवाँ भुलइला ना।   खेतवा फाटे अस फटे बेवइया बेहन सूखत जइसे मुदइया काहें असवों नाहीं अइला हो बदरु कहवाँ भुलइला ना।   कइसे जीहें चिरई-चुरमुन बबुआ चलिहें कइसे ढुनमुन ई बुझियो ना सरमइला हो बदरु कहवाँ भुलइला ना।   मचल बाटे हाहाकार अवता लेता सभे उबार कवना बातिन से कोहनइला हो बदरु कहवाँ भुलइला ना।   तोहू भइला जस विकास तूरला किसानन के आस जनता फेरा में फंसइला हो बदरु कहवाँ भुलइला ना।  …

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भुला गइला का..!

बम्बई नगरिया,मोहा गइला का। नाहीं अइला बदरवा,भुला गइला का।। तलवा तलइया कै फाट गइलैं सीना, खेतवा टिबुलिया के छूटल पसीना, गउवांं से लागे, अघा गइला का। नाहीं अइला बदरवा,भुला गइला का।। डहके गगनवां अ सिसके धरतिया, सुलगे सिवनवां न आवे ले बतिया, कउनो गलइचा, ओंघा गइला का। नाहीं अइला बदरवा,भुला गइला का।। धुरिया उड़ावे ला पापी पवनवा, गउवां के देवता कै जरेला सपनवां, बतिया प कउनो, कोंहा गइला का। नाहीं अइला बदरवा,भुला गइला का।। तउवा प जइसे, छनकेला पानी, वइसे भइल ‘लाल’ सबकर कहानी, चार बूंद चुयि के, हेरा गइला…

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कजरी बिना सावनी बहार के

नीक लागे नाहीं सावन क महीनवां ना। दिनवां धूप बरियार रतिया गरम बयार, बिस्तर भींजे तर तर चुवेला पसीनवां ना।।नीक0— नइखीं बदरा देखात लउके निर्मल आकाश, चंदा केलि करे पसरी गगनवां ना।।नीक0– बहे झोरि पुरवाई, रहिया धूर उधिराई, पानी बिना सून खेत ख़रिहनवां ना।।नीक0– आइल सावनी सोमार धूप बाटे बेशुमार, ब्रत मा सुखल जाला पानी बिनु परनवाँ ना।।नीक0— नाहीं कोइलर क शोर सपना दादुर पपिहा मोर, ओरिया चुवल नाही कबहुँ अगनवां ना।।नीक0— छाँह नइखे छतनार सूनी निमियाँ के डार, कतहुँ परे नाहीं बाग में झुलनवां ना।।नीक0— काशी कन कन में…

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याद कइल गइले कवि गीतकार ‘सत्तन’ जी

सुखवा क ताना आ दुखवा क बाना हेरि-हेरि हारीं हेराइल बहाना संझा बिहान ओरहन भींज जाला मड़इया में मोर मन भींज जाला…’सत्तन’ गत 19/07/2022 के साँझ के चार बजे से भोजपुरी के कवि-गीतकार स्व. सत्यनारायण मिश्र ‘सत्तन’ जी के पूण्यस्मृति में सत्तन सम्मान समारोह बार एसोशिएशन सिविल कोर्ट सभागार ,गोरखपुर में आयोजित भइल। कार्यक्रम के अध्यक्षता प्रो रामदेव शुक्ल जी कइलें,मुख्य अतिथि पं हरिराम द्विवेदी जी रहलें , मंचासीन मुख्य वक्तागण प्रो अनंत मिश्र, प्रो चितरंजन मिश्र, जुगानी भाई, डा आद्या प्रसाद द्विवेदी ,प्रो आर डी राय जी रहलें ।…

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कजरी

असों बरखा ना भईल बरसात में , दिन चाहे रात में ना ।। बितल सूखले आषाढ़, घाम होखता प्रगाढ़ अगिया लागि गइल बा कूल्हिए जजात में दिन चाहे रात में ना।। बरिसल तनिको नाहीं अदरा , भींजल एको दिन ना चदरा जिनिगी आके फँसल बिया झंझावात में … दिन चाहे रात में ना ।। बिया धान कऽ सुखाइल , खेत इचिको ना रोपाइल सभे रहऽता किसानन संगे घात में.. ।। सुखले बीतत बाटे सावन , लागत बाटे भकसावन पनिया फेर दिहलस कूल्हि जज़्बात में …. जिनिगी कइसे अब ढोआई ,…

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भिखारी ठाकुर प विशेष संगोष्ठी के आयोजन

बीएचयू के भोजपुरी अध्ययन केंद्र में आज “भोजपुरी की लोक संस्कृति और उसके लोक नायक” श्रृंखला के तहत भिखारी ठाकुर प विशेष संगोष्ठी के आयोजन भइल. एह संगोष्ठी के अध्यक्षता समन्वयक श्रीप्रकाश शुक्ल जी कइनी. जहवां विशिष्ट वक्ता के रूप में बलिया से आइल डा. शुभनीत कौशिक लोक संस्कृति आ भोजपुरी नाटकन के परंपरा प विस्तार से डलनी त मुख्य वक्ता के रूप में दिल्ली विश्वविद्यालय से आइल डा. मुन्ना कुमार पांडेय जीआपन सारगर्भित भाषण से लोक नायक के रूप में भिखारी ठाकुर के अवदान आ एगो नायक के रूप…

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गीत

खेतवा जोतात बा फरहरी बरिसत केनियो ना बदरी लागsता सुखार परी अबरी करजा कँपावताटे हड़री ! गरजत तड़पत कबो कबो आवत चमकत दमकत भागताटे धावत घामावा उगत बाटे चमवा जरावत सुबहे में लागsता दुपहरी ! ट्रेक्टर रोटोबेटर खेतवन के जोते घास पात साफ करे मटिये में गोते पूख असरेषावा प असरा बा लागल लगिहें लेवाड़ तबे सगरी ! सगरो सुनाता बाढ़ कइले बा तबाही शहर पहाड़ प मचल धावाधाही धनवा रोपेके जहाँ ताव बाटे बिगड़त ताके आसमान गाँव नगरी ! असरा उमेद प बीतल सँउसे जिनगी करजे आभाव में मिलल…

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