नेपाली आजी के दुख !

चइत क घाम में साईकिल चलावत शिखा स्कूल से घरे चहुँपल त, पियास क मारे मुँह झुरा गइल रहे। तेज हवा रहे त बाकिर लूह लेखा गरम ना रहे, लेकिन हवा के बिपरीत साईकिल खिंचल एतना आसान न होखे। साईकिल दुआरी पर ठाड़ा करके जल्दी से घर मे घुसल त दुगो नया परानी के देख ठिठक गईल। तनी देर गौर से देखला क बाद ओकरा जोर के झटका लागल अरे बाप रे, ई त ‘नेपाली आजी’ हई। बाकिर ई सँगवा एगो मुस्टंडा बा, ई के ह?  नेपाली आजी से कबो…

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माटसाहेब

माट साहेब के आवे से पहिले लइका सब इस्कूल गेट पर भीड़ लगा देत रहलन। माट साहेब आवते हाथ में बाल्टी उठा लेस।उनका पीछे सब बच्चा सब सफाई में लाग जात रहले। तनिके देर में इस्कूल के काया कलप हो जात रहे। फेर सब लइकन के सथहीं बइठा के ककहरा, पहाड़ा, कविता आ खेल सब करवावस।लइकन के साथहीं खाना खाये बइठस। छुट्टी होते अपना फटफटिया पर छुटल छाटल लइकन के साथे भी ले जास। ई माट साहेब के गाँव के कुछ लइका,जवन कि ओही इस्कूल से पढ़ के काॅलेज पढत…

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आपन बात

अनघा भाव मन के उद्बबेगत बहुत कुछ कह जाला। उहे सब जब लेखनी में समा के कागज पर उतरेला तब सबकुछ नया नया लागेला। बीतल समय से बहुत सुन्दर चित्र मिलेला जवना में वर्तमान परिप्रेक्ष्य खुद हीं अपना के फिट पावेला आ ई मेल  मन के खूबे भावेला।सुख, दुख,दया, अहम ,क्रोध आदि भाव साक्षात आपन प्रभाव डालेगा। अपना गुण के अनुकूल ई रिश्ता में खटास आ चाहे मिठास ले आवेला बाकिर रचना के मरम हमेशा आनंद में परिवर्तित हो के मिलेला। शिव सृष्टि के सिरजक हईं।उहाँ के मानुष आ प्रकृति …

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अंगार पड़ गइल

का जमाना आ गयो भाया,आजु कल त सभे के सेस में बिसेस बने के लहोक उठ रहल बा। भलही औकात धेलो भर के ना होखे। सुने में आवता कि एगो नई-नई कवयित्री उपरियाइल बानी आ कुछ लोग का हिसाब से उ ढेर नामचीन हो गइल बानी । मुँह पर लेवरन पोत के मुसुकी मारल उहाँ के सोभाव में बाटे। कुछ लोग त उनुका एगो अउर सोभाव बतावेला। कबों रेघरिया के त कबों लोर ढरका के, कबों जात-धरम के पासा फेंक के एगो-दू गो कार्यक्रम में अतिथिओ बनि के जाये लगल…

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बूड़ल बंस कबीर

1 तीन तिरिखा- देह, मन के, तत्त्व के। रूप-रस-धुनि-गंध-परसन तीर रहलन सत्त्व सारा देह के, आदिम समय से। भटक जाला बेबसी में अनवरत मन, भाव के फैलाव-घन में। चिर तरासा अस बयापल तत्त्व के बुनियाद में, कन परस्पर डूब रहलन तिश्नगी में। के कही कि के पियासल- नदी-जल कि माछरी? बेअरथ जनि हँस कबीरा। 2 छोटीमुटी गुड़ुही में बुलुकेला पनिया, छलछल गुड़ुही के कोर। पनिए से उपजलि नन्हींचुकी जीरिया, जीरिया भइल सहजोर। सातहूँ समुन्दर के सोखेली मछरिया मछरी में छुपल अकास। अँखिया में मचलेली नन्हीं-सी बुँदनिया, बुँदनि के मिटे न…

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भोजपुरी साहित्यकार जयशंकर प्रसाद द्विवेदी के ‘काव्य कौस्तुभ’ के मानद उपाधि मिलल

हिंदुस्तानी अकादमी के भिखारी ठाकुर सम्मान से सम्मानित भोजपुरी के सुप्रसिद्ध साहित्यकार जयशंकर प्रसाद द्विवेदी के ‘काव्य कौस्तुभ’ के मानद उपाधि से नवाजल गइल। साहित्य मंडल नाथद्वारा राजस्थान में  आयोजित भगवती प्रसाद देवपुरा स्मृति एवं राष्ट्रीय बाल साहित्य समारोह ( 6 – 7 जनवरी 2023) के उहाँ के एह  उपाधि से सम्मानित कइल गइल । बतावत चलीं कि जयशंकर प्रसाद द्विवेदी के अब तक ले 5 गो पुस्तक प्रकाशित हो चुकल बाडी आ उहाँ के 3 गो पुस्तकन के  सह सम्पादन कर चुकल बाड़ें। भोजपुरी साहित्य सरिता पत्रिका का पछिला …

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बाढ़ का कहर

थमें ना लहरिया कइसे निकली बहरिया। लेवे ना किसनवन के केहू अब खबरिया।। आ○1 चुनउआ से पहिले वादा रहे बच बचाव के..2 अब जानी गइनी इ सब होता खाली नाव के..2 तकला पर आवे सगरो पनीये नजरिया…2 लेवे ना किसनवन के केहू अब खबरिया।। आ○2 मिले आश्वासन खाली होत नाही कुछ बा..2 नेता लोग के बतिया भईल कुकुर के पूंछ बा..2 डूब गईल पाक्का अउरी फूस के अटरिया..2 लेवे ना किसनवन के केहू अब खबरिया।। आ○3 बाढ जब आवे तबे होला रोज दौड़ा..2 जगह जगह नेता लोग के लउके जामौडा..2…

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घर घर में रावण बा

बनल आदमी आदमी के हीं मुश्किल। घर-घर में रावण बा मिले ना केहू संगदिल।। बनल आदमी………………………… आ○1 माई-बाप-भाई केहू लउकत ना खास बा..2 केहू के केहू पर ना तनिको विश्वास बा..2 गईल बा रुपइया देख सबका से हिल-मिल.. बनल आदमी………………………… आ○2 अखियां तरस गइल पावे ला सनेहिया..2 माटिए में मिल जाइ एक दिन इ देहिया..2 फिर काहें लोरवे से भरल रहे महफिल.. बनल आदमी………………………… आ○3 पाण्डेय आनंद से ना आगे लिखात बा..2 दानव बनल इहवा मानुष के जात बा..2 घुट-घुट के मरे नेक लोग इहवा तिल-तिल..2 बनल आदमी………………………… आनन्द कुमार…

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कवन ठगवा नगरिया लूटलस हो…

नगर निगम चुनाव प कुछ हमार निजी अनुभव, जरूरी नइखे कि रवुआ हमार बात से सहमत होखीं।आरा शहर प पिछिला कुछ दिन से नगर निगम चुनाव के खुमार चढ़ल बा. आज सांझी के 5 बजे जा के भोजपुरी-हिंदी के पैरोडी कानफाडू गीत आ डी जे के हल्ला बंद भईल. कबो शाहाबाद के मुख्यालय इ शहर अब खलिहा भोजपुर जिला के मुख्यालय रह गईल बा तबो आजुवो इ शाहाबाद क्षेत्र के केंद्र में बनल बा. इतिहास का बेर-बेर दोहरावल जाव तबो इतिहास में तनिकी सा झाँकल जरूरी बा. आरा शहर के…

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भोजपुर में गाँधी के अइला के सै बरिस

मोहनदास करमचंद गाँधी के महात्मा के उपाधि तबे मिलल जब उ बिहार के धरती पर आपन गोड़ धरले। राजकुमार शुकुल से जिद से गाँधी जी चम्पारण अइले। गाँधी जी 1916 में कांग्रेस के लखनऊ अधिवेशन में भाग लेवे आइल रहीं। एही अधिवेशन में शुकुल जी से पहिला मुलाकात भइल। शुकुल जी के बार बार आग्रह रहे कि हमार प्रदेश में आके ओहिजा के किसानन के उद्धार करीं। गाँधी जी टालमटोल करत रहलें आ शुकुल जी जिद। आखिर में गाँधी जी मान गइले आ कल्कता अधिवेशन के बाद आवे के सकरले। …

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