मनोहर दूनों हाथ जोड़ के भगवान से कहलें ” प्रभु हमरा के एगो बड़हन मकान दिहीं ताकि हम रउरा खातिर अलग से पूजा घर बना के राउर पूजा कर सकीं। ”
” हम तहार ई काम नइखीं कर सकत ” भगवान कहलें ।
” काहे प्रभु ” मनोहर अचकचा के पूछलें ।
” अभी तूं त हमरा के हरदम अपना आँखि के सोझा राखे लऽ । भोरे,सांझ के हमार पूजा करेलऽ । हमरा आगा माथ नवावे ल ।हम जे तहरा बड़हन मकान दे देबि त तूं खाली भोर आ सांझ के हमार पूजा करबऽ। हमरा आगा हर समय माथ ना नवइबऽ। आउर समय हमरा के अपना आँखि से दूर रखबऽ ” भगवान जबाब दिहलें।
” लागता कि भगवानों कलजुगी हो गइल बाडेंन
हरदम साथ रहला के लोभी हो गइल बाडेंन।”
मनोहर मने मन सोचलें।
- मनोकामना सिंह
जमशेदपुर, झारखंड
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