घेरी घेरी बरसे बदरिया

घेरी घेरी बरसे बदरिया बलम नौउकरिया से आई जा हो। बदरा अंगे अंग करेला ठिठोली मारे ला मुस्की बोलेला कुबोली घड़कन जगावे बुजुरिया बलम नौउकरिया से आई जा हो। चुअ ता ओरवन बह ताटे खोरी छुअत हवईया मोहै चोरी चोरी झाँकत घटा अँगनईया बलम नौउकरिया से आई जा हो। देवरा सतावे ला कजरा निहारी ननदी ठिठोली करै खींची सारी भभक ता मन कै डिबरिया बलम नौउकरिया से आई जा हो। केतना कहीं साँच का का बताईं हियरा बहै लोर कईसे देखाईं “योगी” सतावै पिरितिया बलम नौउकरिया से आई जा हो।…

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नारी

मुकद्दर के मारल भगावल हई कहि के अबला धरा पे सतावल हई, घर के देहरी मोरे खातिर जेहल भई हाँथ कंगन पिन्हाँ के छिपावल हई।   सभ्य दुनिया कहाँ बा बतावे कोई साँच नेहिया पिरितिया देखावे कोई, इन्तहाँ भुत में बाटे हमरे भईल आज भी मोके माहुर पियावे कोई।   चौसर पे रख के संघारल हई त कभों चीर खिंच के उघारल हई, कभों बन के शक्ति पुजाई ला हम त कभों दिल से हमहीं बिसारल हई।   दर्द बाटे हिया में धसल काँट जस वक्त से पहिले हमहीं त…

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