धरती पर उतरीं

भूखल अँखिया सूखल ओठ, ताक रहल बा तोहरी ओर इनकर पीर हरीं ।   शादी के हव घर मे बाला मुँह न निवाला एतना ठाला ई त हव गरीब के कम्बल जेतना धोवै ओतना काला तोहऊँ काला तब्बो माला, फेकत हव सब तोहरी ओर अब्बो शरम करीं ॥   हम गुदरी मे जीयै वाला नाही चाही शाल दुसाला जी डी पी के हम का जानी हमके तs रोटी कs लाला सूखल बूड़ल एह माटी मे छाती पीटै करिया गोर अब तs रहम करीं ॥   कमर लँगोटी हाथ लकुटिया घर…

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