प्रेम -प्रेम सब कोई कहे ,प्रेम न चीन्हे कोई…..

साहित्य -सरिता क फरवरी अंक “प्रेम -विशेषांक ” ह। ग्यानी -ध्यानी पुरखा -पुरनिया प्रेम के अकथ -अबूझ कहले हउवन।सचहूं, कहाँ केहू गुन-गथ पउलस प्रेम के ? जे एह अबूझ के बूझ लिहलस ऊ परम आनंद में मगन,सुध -बुध बिसरवले मगन मन गावे -नाचे लगल आ दीन -दुनिया से बेखबर ‘चैतन्य ‘ हो गइल,’मीरा’ हो गइल।कबीर ,तुलसी ,रैदास हो गइल।पीर में मातल,नेह में भोरल ‘घनानंद’ हो गइल।केतना -केतना कहाइल, केतना गवाइल, केतना बखानल गइल बाकिर प्रेम क खिस्सा ,कहनी ,गीत,ओतने अजान, ओतने रहस्यमय,ओतने नया, ओतने पुरान आजो ह जेतना सृष्टि के…

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