हम गाँव क हईं गँवार सखी

हम गाँव क हईं गँवार सखी! हम ना सहरी हुँसियार सखी! बस खटल करीला सातो दिन, आवे न  कबो  अतवार  सखी! हम गाँव क हईं गँवार सखी! लीची,अनार,अमरूद,आम, सांझो बिहान खेती क काम, घेंवडा़,लउकी,धनिया जानी, ना जानीं हरसिंगार सखी!हम गाँव क हईं गँवार सखी! इहवाँ जमीन बा बहुत ढेर, असहीं उपजे जामुन आ बेर, इ गमला में के फूल ना ह, जे खोजे सवख सीगांर सखी! हम गाँव क हईं गँवार सखी! गोबर-गोथार , चउका-बरतन, अंगना,दुअरा सब करीं जतन, दम लेवे भर के सांस न बा, बानीं तबहूं बेकार सखी!…

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