हमार गाँव

हमर गऊआं गजब अलबेला उदास कभी होखे ना देला ।   ओहि मोरा गऊआं में बलवां बधरिया धानी चुनरिया में लागे बहुरिया डोल्हा पाती ओहिजे जमेला उदास कभी होखे ना देला ।   ओहि मोरा गऊआं में चाना के पुलिया मछरी फँसावे ला लागेला जलिया ओकर पीपर त लागे झुमेला उदास कभी होखे ना देला ।   ओहि हमर गऊआं में जिला चउकवा ओहिजे  मिलेला सउँसे गाँव के सनेसवा ओहिजा कुछु कुछु केहु बकेला उदास कभी होखे ना देला ।   ओहि मोरा गऊआं में काली स्थनवा रोजे रोज  होखेला…

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लइकन सबके कविता पढ़ावल जरूरी बा

पथराइल आँखन में गंगा बहावल जरूरी बा दिलन के दरार के दूरी मिटावल जरूरी बा I   परदा के पीछे बइठ के खेल रहल केहु खेल ओकरा चेहरा से परदा हटावल जरूरी बा I   रोजे-रोज उछालल जाता नवका नवका नारा नवका नरवन से दामन बचावल जरूरी बा I   निरदोसवन के खून बहल रोके के खातिर बारूद के जंगल में आग लगावल जरूरी बा I   सूर के बाल्मीकि के आ तुलसी कबीरजी के लइकन सबके कविता पढावल जरूरी बा I   डॉ. हरेश्वर राय, सतना, मध्य प्रदेश  …

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रउआ बिटियन प खूबी इतराईं भाईजी

रउआ बिटियन के खूबहिं पढ़ाईं भाईजी रउआ बिटियन के खूबहिं लिखाईं भाईजी।   भेदभाव के भूत भगाईं प्रेम के जोत जलाईं नेह-छोह के खाद डालके सुन्दर फूल खिलाईं, रउआ बिटियन के बेनिया डोलाईं भाईजी रउआ बिटियन के झुलुआ झुलाईं भाईजी ।   तनिका सा ढीली छोड़ब त धइ ली इ आकास  चाँद सुरुज जइसन फैलाई दुनियाँ में परकास, रउआ बिटियन के खूबहिं हँसाईं भाईजी रउआ बिटियन के खूबहिं खेलाईं भाईजी ।   घर के बन दरवाजा खोलीं खुला समर में लड़े दीं ऊँचा से ऊँचा परवत प छोड़ीं ओहके चढ़े…

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