प्रो. बलभद्र के आलोचना-दृष्टि

भोजपुरी साहित्य में आलोचना विधा विकासशील बा।भोजपुरी आलोचना में मैदान खाली बा।एह दिसाईं ढेर परती-पराँत बा।एह दिसाईं बहुते मेहनत के दरकार बा।एह स्थिति में सर्व भाषा ट्रस्ट, नई दिल्ली द्वारा सद्यः प्रकाशित डॉ बलभद्र के आलोचना पुस्तक”भोजपुरी साहित्य:हाल-फिलहाल”भोजपुरी आलोचना विकसित करे के दिसाईं उल्लेखनीय कृति बा।माईभाषा में शिक्षा के जरूरत अब राजपाट भी महसूस कर रहल बा।5अगस्त,2021के द हिंदू में उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू के माईभाषा में शिक्षा के महत्व के प्रसंग में एगो लेख:”ए लैंग्वेज लैडर फॉर एन एडुकेशन रोडब्लॉक” (शिक्षा मार्ग खातिर शिक्षा के सीढ़ी)प्रकाशित भइल बा।तकनीकी शिक्षा के…

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भोजपुरी साहित्य:परम्परा आ परख

बिना सरकारी संरक्षण आ पोषण के लोकभाषा भोजपुरी के रचनात्मक विकास लगातार हो रहल बा।भोजपुरी साहित्य के रचनात्मक विकास में आरंभे से समाज के गण्यमान्य आ प्रबुद्ध लोग सक्रिय रहल बा, आजो सक्रिय बा आ काल्हुओ रही।अपना माईभाषा से केकरा प्रेम आ लगाव ना ह?माने माईभाषा से आ माईभूमि से लगाव आ प्रेम सबके होला, होखे के चाहीं।भोजपुरी साहित्य में हर विधा में लगातार रचना हो रहल बा:कविता, कहानी, उपन्यास, लघुकथा, एकांकी, नाटक, निबंध, विनिबंध, जीवनी, संस्मरण, आत्मकथा, व्यंग, समीक्षा, आलोचना, यात्रा-संस्मरण, पत्राचार आदि-आदि।भोजपुरी साहित्यिक पत्रकारिता के सामने तबो एगो…

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