बरसि गइलैं बदरा,आजु मोरी गुंइयां। मनवा जुड़ा गइलै,महकल ई भुइयां।। आजु मोरी गुंइयां,बरसि गइलैं बदरा।। आजु मोरी गुंइयां,बरसि…… खेतवा सिवनवा में भरि गइलैं पानी, पोखरी सुनावे ले हंसि के कहानी, तलवा के जइसे,छुवल चाहे कुंइयाँ। आजु मोरी गुंइयां,बरसि…… पेड़वन के फुंनुगी पे नाचल बा बुनियाँ, पात पात झूमल बा चहँकल टहनियाँ, मछरी तलइया में,मारें कलइया। आजु मोरी गुंइयां,बरसि…… गउवांं किसनवां के हियरा जुड़ायल, खेतीबारी रोपनी कै,मैसम बा आयल, उतरल सवनवाँ,करी पार नइया। लालबहादुर चौरसिया ‘लाल’ आजमगढ़
Read MoreCategory: भोजपुरी गीत
बतावा बुढ़ऊ
काहें काशी पर मोहइला बतावा बुढ़ऊ। काहें आदि देव कहइला बतावा बुढ़ऊ। जाने के त सभ जानेला हउवा बड़का दानी भगतन खातिर कई जाला, बढ़-चढ़ के मनमानी काहें असुरन पर लोभइला बतावा बुढ़ऊ। जेकर अरजी तहरे लग्गे दुख ओकर भागेला दाही-दुसमन भूत-प्रेत, पानी सबही माँगेला काहें दसानन से लुटइला बतावा बुढ़ऊ। हम निरधन तहरा सोझा,हमके राह देखावा मझधार में बूड़त नइया, ओके पार लगावा काहें हम पर ना छोहइला बतावा बुढ़ऊ। कैलास के बासी हउवा, मृग छाला पहिरेला जंगल झाड़ का बतलाईं, पहड़ो में रहि लेला।…
Read Moreसावनी गीत
पूरुब से आवेले बदरिया नु हो,जहां पिया जी हमार। भींजे मोरी कोरी रे चुनरिया नु हो,नाहीं बाड़ें रखवार। पुरुवा के झोंकवा से सिहरे बदनियां। टप टप अंचरा से चूवे मोरा पनियां। आगि लगो कोठवा अंटरिया नु हो, नाहीं बाड़ें रखवार। पूरुब से आवेले बदरिया नु हो,जहां पिया जी हमार। पिऊ पिऊ बोलेला मोर पिछवरवां। निनिया पराई गइलीं ननदी बहरवां। झलुआ क गीतिया बिरहिया नु हो, नाहीं बाड़ें रखवार। पूरुब से आवेले बदरिया नु हो,जहां पिया जी हमार। संझवा बिहनवां ना लागे मोर मनवां। सासु सुत्तें अंगना ससुर जी दलनवां। सेजिया…
Read Moreसावनी गीत
दिनवां धराइदा मोर सजनवां, सवनवां उदास लागे गोइयां। जहर बोले सगरो जमनवां, सवनवां उदास लागे गोइयां। संघे के सहेली सब करेलीं ठिठोली। कहिया तोहार होई बोलेलीं किबोली। नइहर में लागे नाहीं मनवां। सवनवां उदास लागे गोइयां। छतिया में हूक उठे घेरे जब बदरिया। केहू कहां छोड़ेला आपन गुजरिया। कधले देखइबा बस सपनवां। सवनवां उदास लागे गोइयां। अंगराइल देंहिया ना सम्हरे अंचरवा। देखि देखि बरसे ला बैरी बदरवा। कहिया लेजइबा मोर गवनवां। सवनवां उदास लागे गोइयां। राकेश कुमार पांडेय गांव-हुरमुजपुर सादात,गाजीपुर
Read Moreरोपनी गीत
खुश भईले इनर देवता आईल मनसून घरे नेवता अब बरसल खूब पनिया, चलऽचलऽ करे रोपनिया ना– —- मेध बरसे झमर-झमर चमके बिजुरिया , झामुर-झुमुर बियवा उखाड़े बियड़रिया, पसिनवा सुखावे हो तिरछी बेयरिया — चलऽचलऽ करे रोपनिया ना —– पियर-पियर बेंगवा के टर्र-टर्र स्वर लहरिया, केंकड़ा के झुण्ड देखीं अरिया-कगरिया, बकुला खोजन लागे डेड़िया मछरिया — चलऽचलऽ करे रोपनिया ना ——— सिर पर छोपी नाहीं घरे छूटल छातावा, घामो उगे, पानी परे सियरा के बिआहवा, छप-छप लईकन नहाए ओरिअनिया —– चलऽचलऽ करे रोपनिया ना– —! Surendra Prasad Giri
Read Moreकजरी
भर सावन मोहे तरसइला हो बदरु कहवाँ भुलइला ना। कवना सउतिन में अझुरइला हो बदरु कहवाँ भुलइला ना। खेतवा फाटे अस फटे बेवइया बेहन सूखत जइसे मुदइया काहें असवों नाहीं अइला हो बदरु कहवाँ भुलइला ना। कइसे जीहें चिरई-चुरमुन बबुआ चलिहें कइसे ढुनमुन ई बुझियो ना सरमइला हो बदरु कहवाँ भुलइला ना। मचल बाटे हाहाकार अवता लेता सभे उबार कवना बातिन से कोहनइला हो बदरु कहवाँ भुलइला ना। तोहू भइला जस विकास तूरला किसानन के आस जनता फेरा में फंसइला हो बदरु कहवाँ भुलइला ना। …
Read Moreभुला गइला का..!
बम्बई नगरिया,मोहा गइला का। नाहीं अइला बदरवा,भुला गइला का।। तलवा तलइया कै फाट गइलैं सीना, खेतवा टिबुलिया के छूटल पसीना, गउवांं से लागे, अघा गइला का। नाहीं अइला बदरवा,भुला गइला का।। डहके गगनवां अ सिसके धरतिया, सुलगे सिवनवां न आवे ले बतिया, कउनो गलइचा, ओंघा गइला का। नाहीं अइला बदरवा,भुला गइला का।। धुरिया उड़ावे ला पापी पवनवा, गउवां के देवता कै जरेला सपनवां, बतिया प कउनो, कोंहा गइला का। नाहीं अइला बदरवा,भुला गइला का।। तउवा प जइसे, छनकेला पानी, वइसे भइल ‘लाल’ सबकर कहानी, चार बूंद चुयि के, हेरा गइला…
Read Moreकजरी बिना सावनी बहार के
नीक लागे नाहीं सावन क महीनवां ना। दिनवां धूप बरियार रतिया गरम बयार, बिस्तर भींजे तर तर चुवेला पसीनवां ना।।नीक0— नइखीं बदरा देखात लउके निर्मल आकाश, चंदा केलि करे पसरी गगनवां ना।।नीक0– बहे झोरि पुरवाई, रहिया धूर उधिराई, पानी बिना सून खेत ख़रिहनवां ना।।नीक0– आइल सावनी सोमार धूप बाटे बेशुमार, ब्रत मा सुखल जाला पानी बिनु परनवाँ ना।।नीक0— नाहीं कोइलर क शोर सपना दादुर पपिहा मोर, ओरिया चुवल नाही कबहुँ अगनवां ना।।नीक0— छाँह नइखे छतनार सूनी निमियाँ के डार, कतहुँ परे नाहीं बाग में झुलनवां ना।।नीक0— काशी कन कन में…
Read Moreकजरी
असों बरखा ना भईल बरसात में , दिन चाहे रात में ना ।। बितल सूखले आषाढ़, घाम होखता प्रगाढ़ अगिया लागि गइल बा कूल्हिए जजात में दिन चाहे रात में ना।। बरिसल तनिको नाहीं अदरा , भींजल एको दिन ना चदरा जिनिगी आके फँसल बिया झंझावात में … दिन चाहे रात में ना ।। बिया धान कऽ सुखाइल , खेत इचिको ना रोपाइल सभे रहऽता किसानन संगे घात में.. ।। सुखले बीतत बाटे सावन , लागत बाटे भकसावन पनिया फेर दिहलस कूल्हि जज़्बात में …. जिनिगी कइसे अब ढोआई ,…
Read Moreगीत
खेतवा जोतात बा फरहरी बरिसत केनियो ना बदरी लागsता सुखार परी अबरी करजा कँपावताटे हड़री ! गरजत तड़पत कबो कबो आवत चमकत दमकत भागताटे धावत घामावा उगत बाटे चमवा जरावत सुबहे में लागsता दुपहरी ! ट्रेक्टर रोटोबेटर खेतवन के जोते घास पात साफ करे मटिये में गोते पूख असरेषावा प असरा बा लागल लगिहें लेवाड़ तबे सगरी ! सगरो सुनाता बाढ़ कइले बा तबाही शहर पहाड़ प मचल धावाधाही धनवा रोपेके जहाँ ताव बाटे बिगड़त ताके आसमान गाँव नगरी ! असरा उमेद प बीतल सँउसे जिनगी करजे आभाव में मिलल…
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