एगो रोमांचक यात्रा

जतरा के अनुभव सभके गुगुदावेला , दुख सुख , नीमन – बाउर कूल्हि के सनीमा लेखा मानस पटल पर उकेर जाला । कुछ  कुछ अइसने एहसास लेवे खाति बाबा नागार्जुन के “अथातों घुमक्कड़ जिज्ञासा” के अनुकरण हमरो से भइल । गाजियाबाद से मुंबई के यात्रा अकेले शुरू भइल । पहिलका पड़ाव अकोला रहे , जहवाँ हमार एगो हितई बाटे । एक दिन के विश्राम कइला के बाद अपने एगो अजीज प्रिय अनुज राम प्रकाश मिश्रा जी के संगे अकोला से मुंबई के जतरा शुरू भइल । अगिला दिने उहाँ एगो…

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अवघड़ आउर एगो रात

रहल होई १९८६-१९८७ के साल , जब हमारा के एगो अइसन घटना से दु –चार होखे के परल , जवना के बारे बतावल चाहे सुनवला भर से कूल्हि रोयाँ भर भरा उठेला । मन आउर दिमाग दुनों अचकचा जाला । आँखी के समने सलीमा के रील मातिन कुल्हि चीजु घुम जाला । इहों बुझे मे कि सांचहुं अइसन कुछो भइल रहे , कि खाली एगो कवनों सपना भर रहे । दिमाग पर ज़ोर डाले के परेला । लेकिन उ घटना खाली सपने रहत नु त आजु ले हमरा के ना…

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बुढ़िया माई

१९७९ – १९८० के साल रहल होई , जब बुढ़िया माई आपन भरल पुरल परिवार छोड़ के सरग सिधार गइनी । एगो लमहर इयादन के फेहरिस्त अपने पीछे छोड़ गइनी , जवना के अगर केहु कबों पलटे लागी त ओही मे भुला जाई । साचों मे बुढ़िया माई सनेह, तियाग आउर सतीत्व के अइसन मूरत रहनी , जेकर लेखा ओघरी गाँव जवार मे केहु दोसर ना रहुए । जात धरम से परे उ दया के साक्षात देवी रहनी । सबका खाति उनका मन मे सनेह रहे , आउर छोट बच्चन…

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