जब से बहल बयारि फगुन के।

अमराई में कहईं कोइलि बोल गइल ह। मोजर गंध हिया के बान्हन खोल गइल ह। उसठा होंठ कसाँइन लागे आँखिन चढ़ल खुमार सगुन के।   कवन निगोरा टेसू बन में आग लगावल? कोना आँतर में मुरझाइल राग जगावल। पनख रहल मनगुपुते डारी अँखुवन से गँउजार तरुन के।   कुइँ दल खिलल भँवर मदमातल, घूप थिराइल। तलई के पानी में केकर रूप हिराइल? बउराहिन जलमछरी जोहे पता न कउँची खाक-बिहुन के।   रतियो कुछ गर्हुआइल जइसन, चैन उपाटल। ना सुख सपन सिराइल तबले, नीन उचाटल। बन पाँखी के तान तान से,…

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आयल जगावे फगुनवा

जागा जवान अरे जागा किसान आयल जगावे फगुनवा, रंग बिरंगा है नेहिया के बान आयल जगावे फगुनवा। सुगना जगावे कोयलिया जगावे गेहुंआ के बाली पे नाच दिखावे, भौरा जगावे ला गावे हो गान आयल जगावे फगुनवा।   वीरों का मौसम है, वीरों का चोला, देखि वसन्ती जिया मोरा डोला। जय बोला जवान, जय बोला किसान, आयल जगावे फगुनवा। जागा जवान अरे जागा किसान आयल जगावे फगुनवा। रंग बिरंगा है नेहिया के बान आयल जगावे फगुनवा।   उमाशंकर शुक्ल दर्पण ग्राम -पोस्ट पक्खनपुर बिछैला जिला अम्बेडकरनगर, उत्तरप्रदेश पिन 224125 दूरभाष 8882168961

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नैनन चलावेली बान

ले भौंहन क तीर कमान नैनन ! नैनन चलावेली बान।   रति सी अंग अंग हौ ढारल सोझा आइल बा, सभ हारल भरमावै सभके धियान। नैनन—   साज समाज बीच जब आवे अवते इहाँ मधुर मुसुकावे सुघरई क छोड़े निसान। नैनन —   जब जब सुर में गीत सुनावे मन के तार तार झनकावे सांसत में डारस परान। नैनन—     जयशंकर प्रसाद द्विवेदी

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बुझीं जनि ठिठोली

कउवो से करकस कोइलिया के बोली बुझीं जनि ठिठोली,इहे हियरा टटोली।   बकुला भगत संगे हुंडरो बा आइल देखीं भला आजे बिलरो धधाइल बघवो त मनवाँ के राज आज खोली। बुझीं जनि ठिठोली,इहे हियरा—   रात दिन होत बात बाS अझुरउवा उपरा त अउर भीतर बाउर भउवा भरलको पुरलको फइलउले बा झोली । बुझीं जनि ठिठोली,इहे हियरा—   बुझलें न अबले, जोड़त हाथ दुअरे लागत बा आइल चुनउवा ह नियरे भरमावे भर दिन चार चार गो टोली । बुझीं जनि ठिठोली,इहे हियरा—   जयशंकर प्रसाद द्विवेदी 09-10-2025

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रिमझिम बरसेला सवनवां

रिमझिम बरसेला सवनवां में संवरिया बदरा। रस के गगरी चुआवेले बदरिया बदरा डर लागे अन्हियरिया में चमके चहुँ ओर बिजुरिया ओरियानी के पानी छींटा मारे सोझ दुवरिया । खटिया मचिया भीजे तकिया मुडवरिया बदरा करिया घटा नचावे बन में मोरवा संग मोरिनिया । दादुर मेघा मेघा टेरे चातक मांगे पनियां । बैरिन बंसिया बजावे बंसवरिया बदरा। अंगना लागे काई सम्हरि न पाईं फिसले पउवां झुलुआ झूलें कजरी गावें मिलि के सगरी गउवां उफनलि पोखरी में उछलेलीं मछरिया बदरा । चान सुरुज मिलि छिपि के खेलें दिनवो लागे राती। पवन झकोरा…

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के हो लिलरा पर छिरकल गुलाल

के हो लिलरा पर छिरकल गुलाल बदरा उठल मनवां में केतनी सवाल बदरा।   गइलें सुरूज़ देखS पछिम के देसवा बबुआ के दादी सुनावेली खिसवा लवटे लगलें मदरसा से  लाल बदरा । के हो लिलरा पर छिरकल गुलाल बदरा।   दफ़तरवा से लवटे लगलें नोकरिहा होखे लगल पनघट पनिहारिन से खलिहा नापे चरवहवा  गइयन के चाल बदरा। के हो लिलरा पर छिरकल गुलाल बदरा।   लवटेली चारा ले चोंच में चिरइया उगे लगलीं नभवा में छिटफुट तरइया माझी खोलेला नइया के पाल बदरा । के हो लिलरा पर छिरकल गुलाल…

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फगुनहटे में

पिहिके कोइलिया तनिक अहटे में धसोर गइल पुरुवा फगुनहटे में॥   भउजी के कजरारी अँखियन क थिरकन ससरे लहर बनि सिहरे लागल तन मन विलमते रंगवो डलल सहते में । धसोर गइल—   सुध-बुध हेराइल मोजराइल अमवा एह घरी नीक लगे बदराइल घमवा ई देखS बुढ़वो रंगल रसते में। धसोर गइल—   हुलसे पवनवा गोटाइ गइल छिमिया पियराइल सरसो हरिया गइल निमिया सरम के चुनरिया उड़ल कसते में । धसोर गइल—   जयशंकर प्रसाद द्विवेदी

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नैना के तीरे

डूबि गइलें सजना सखी रे, कजरारे नैना के तीरे। नैना के तीरे हो, नैना के तीरे। डूबि गइलें सजना सखी रे, कजरारे नैना के तीरे।   अँकुरल मन में प्रीत क बिरवा, बेर बेर हियरा के चीरे। कजरारे नैना के तीरे।   तलफत जियरा पिय के खातिर , पीर बढ़ावत धीरे-धीरे। कजरारे नैना के तीरे।   विरह में माति बनल बउराहिन अब मन लागत ना कहीं रे । कजरारे नैना के तीरे।   पपिहा बनि पिउ के गोहराऊँ उहो जेपी क मीत नहीं रे। कजरारे नैना के तीरे।   डूबि…

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जरावऽ दियना

होई सगरो अंजोर हंसी घरे- घरे भोर कि जरावऽ दियना, भारत माता के मंदिरवा जरावऽ दियना । एगो दिया धर ऽअंगना में एगो दिया दलानी एक दिया घर के पिछवारे भुइंया परल पलानी नाहीं गोसयां गोहार ,नाहीं सूझे उजियार कि जरावऽ दियना, जहां जिनगी अन्हरवां जरावऽ दियना । एगो दीया गंग- जमुन के जेकर निर्मल पानी भरल परल जेकरा अंचरा में अनगिन अमर कहानी लेके असरा उजास पोंछे सब कर पियास की जरावऽ दियना, चलऽ ओही जलधरवा जरावऽ दियना । एक दिया ओ महतारी के जे शहीद जन्मावे बलिवेदी पर…

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झंखे साँच

झंखे साँच झूठ क जयकारा हौ बाबू हई देखा आइल हरकारा हौ बाबू ।   मंच क पंच तक कारोबार फनले बा कीमत असूले ला रउबार ठनले बा । गीत चोरन क चढ़ गइल पारा हौ बाबू । झंखे साँच—   पीढ़ा पर बइठ के सबका के कोसल टुटली कमरिया संगे धरि धरि पोसल कबों छूटी ना मजगर चारा हौ बाबू। झंखे साँच—   भावेला उनुका त पतुरिया के संगत मुँह बेगर दाँत क चउचक बाटे रंगत पानी घाट घाट के त खारा हौ बाबू। झंखे साँच—   गुरुजी आ…

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