तनि दूरे रह मर्दे…….?

का जमाना आ गयो भाया, सोसल डिस्टेन्सिंग के मतलब बता-बता के सभे पगला गइल बाकि केहू माने आ बुझे के तइयारे नइखे। के-के नाही लागल समुझावे में, बड़का भइया से लेके छोटका भइया तक, बबवा से लेके मोटा भाई तक, भुंअरी काकी से लेके मनराखन पांडे तक बाकि ई ससुर के नाती लो समझते नइखे। एह लोगन के एगो बेमारी धइले बा जवना के नाँव सबूत ह। जब ले दू -चार जने एन्ने-ओन्ने ना होखिहें, मनबे ना करी लो। दोसरकी लहर में कई लाख लो मर-बिला गइलें बाकि लोगन के…

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ए बाबू ! सपना सपने रहि जाई

का जमाना आ गयो भाया, अब त उहो परहेज करत देखाये लागल जे रिरियात घूमत रहल। आजु के समय में जब हिंदिये के ओकत दोयम दरजा के हो चुकल बाटे, त अइसन लोगन के का ओकत मानल जाव। हिंदियों वाला लो अपना बेटा-बेटी के अंगरेजी ईस्कूल में पढ़ावल आपन शान बुझता काहें से कि ओहू लोगन के नीमन से बुझा चुकल बा कि हिन्दी से रोजी-रोटी के गराण्टी भेंटाइल मोसकिल बा। हिन्दी के लेके जवन सपना रहे, उ ई रहे कि ई अङ्ग्रेज़ी के स्थान पर काबिज होई। बाकि अइसन…

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आपन ढेंढर भूलि दोसरा के फुल्ली निहारे के फैसन

का जमाना आ गयो भाया, एगो नया फैसन बजार में पँवरत लउकत बा, ढेर लो ओह फैसन ला पगलाइल बा। उचक के ओह फैसन के लपके खाति कुछ लोगन के कुटकी काट रहल बा। एह फैसन के फेरा में हर जमात के कुछ न कुछ लोग लपके ला लाइन लगवले देखात बा। कुछ लो लपकियो चुकल बा। एह फैसनवा के लपकते लोगन के चरचा होखे लागत बा। मने मुफ़ुत में टी आर पी के कवायद। ई कुछ चिल्लर टाइप के लो बा भा रउवा चिरकुट टाइप बूझ सकेनी, एह फैसन…

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अनुवाद के बाद के माने-मतलब

का जमाना आ गयो भाया। कुछ दिन से में/से के चकरी घूमे शुरू भइल बा। बाक़िर ई चकरिया के घूमलो में कुछ खासे बा। जवन आजु ले मनराखनो पांड़े के ना लउकल। ढेर लोग कहेलन कि अइसन कुल्हि काम पर मनराखन पांड़े के दिठी हमेशा जमले रहेले। अब मनराखनो बेचारे करें त का करें। उनका के आजु ले ई ना बुझाइल कि भोजपुरी में बयार मनई आ गोल-बथान देखि के बहेले। एक्के गोल में कई सब-गोल बाड़ी स, ओहिजो हावा के गति परिभाषा के संगे बहेले। जहवाँ एक गोल के…

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बाबा रे बाबा

आपन – आपन धरम माने के स्वतन्त्रता संविधान मे का दिया गइल , लोगन के लुच्चा ब्रांड के दोकान खोले के परमीसन खलित्ता मे आ गइल । देश भर के सोझबक मनई जेकर आस्था अपने धरम मे रहेले , ओकरे ओही आस्था के दोहन करे ला कब कवन नवका धरम / संप्रदाय / पंथ  बन जाई, पते ना चलेला । जब उहवाँ लोग शिकार होखे लगेलें, तबे जरि मनी केकरो कान पर जुवाँ रेगेनी सन । अइसनका दोकानी वाला बाबा, तांत्रिक, फकीर, मौलवी, फादर, भिक्षु लो अपने चारो ओरी ढेर…

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बंगड़ गुरु के मिललीं नानी

” का बंगड़ भइया,काहें सोकतायिल हउवा।एतरे त एतना चहकेला कि चिरई-चुरुंग फेल।आज काहें उदासल हउवा भाय ?” मिंकू बंगड़ गुरु के आगे -पीछे चलत परिकरमा करत रहलन बाकिर बंगड़ चुप। ” आजकल लगन क दिन ह भइया।एतना सादी-बियाह होत ह कि पापा नेवता-हँकारी करत हलकान- परेसान हो जात हउवन..त ऊ का ह कि जयिसहीं हम दस-बीस गो रुपैया मांगत हईं कि अगियाबैताल नियन सोंटा लेके मारे धउरा लेत हउवन।उधारी एतना चढ़ गईल ह कपारे प कि सोचते घुमटा आवे लगत ह।तनी चाह-पान क मन रहल ह…..।का बतायीं भइया नसा छूटत…

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एक ठे बनारस इहो ह गुरु

‘का गुरु आज ई कुल चमचम ,दमदम काँहे खातिर हो ,केहू आवत ह का ‘? प्रश्न पूछने वाला दतुअन करता लगभग चार फुट ऊँची चारदीवारी पर बैठा आने -जाने वालों से पूछ रहा था।”काहें मोदी आवत हउअन ,तोहके पता ना ह ?” पता ना ह ‘ ऐसे गुर्राते हुए बोला गया कि यदि पूछने वाला पहुँच में होता तो दो तीन लप्पड़ कही गए नहीं थे। पर पूछने वाला भी अजब ढीठ ,तुनक कर बोला -“जा जा ढेर गरमा मत….. .” कहता हुआ वह ‘ कोई नृप होहुँ हमहि का…

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